जमीन से हजारों फिट ऊपर आकाश की ऊँचाइयों पर विमान में विस्फोट। जिसके भीतर थे मोना चौधरी और महाजन
“मोना चौधरी को खत्म करो। मैं सूटकेस-नोटों से भरा सूटकेस लेकर, तुम्हारे पास आऊं। एक साथ डिनर करेंगे।”
“जरूर करेंगे।” गुर्रा उठा जसबीर वालिया –“एक साथ डिनर करेंगे हम और...”
“हो सकता है हम डिनर न कर सकें।”
“क्यों बख्तावर?” जसबीर वालिया के माथे पर बल उभरे।
“मोना चौधरी, पारसनाथ और महाजन तुम्हारी तलाश में कॉटेज से कब के निकल चुके हैं। उनमें बात हो चुकी है। वो तुम्हें मारने के लिए निकले हैं और उनके इरादे बुलंद हैं।”
“रिवॉल्वर की गोली बुलंद इरादों को नहीं पहचानती। वो सिर्फ अपना लक्ष्य देखती है बख्तावर सिंह। जसबीर की गोली को किसी से दोस्ती करना पसंद नहीं।”
“मोना चौधरी और उसके दोनों साथी तुम्हारी तरफ आ रहे हैं। ज्यादा दूर नहीं हैं वो। कभी भी तुम्हारे पास पहुँच सकते हैं। मोना चौधरी का निशाना पहले लेना। वो मर गयी तो पारसनाथ और महाजन, समझो आधे मर गए।”
“ऐसा ही होगा।”
आतंक का चेहरा
मोना चौधरी के खिलाफ बख्तावर सिंह
का एक और मौत से भरा कदम।

0 Comments