डॉक्टर बगल के कमरे से पहुंचा ।
बगल का कमरा वैसा ही बैडरूम था लेकिन नीमअन्धेरा था । वहां शैलजा बार-बार आंखों पर रुमाल फेरती पलंग पर पड़ी थी और गोल्डी आनन्द उसके करीब एक कुर्सी पर बैठा हुआ था । वो डॉक्टर को आया देखकर उठकर खड़ा हो गया, शैलजा ने तकियों के सहारे जरा उकडू हो जाना ही काफी समझा ।
शैलजा खूबसूरत लड़की थी, उम्र में पच्चीस-छब्बीस की जान पड़ती थी, बैठी हुई थी फिर भी साफ जान पड़ता था उसके आकर्षक व्यक्तित्व का एक नग उसका लम्बा कद भी था ।
गोल्डी आनन्द पैंतीस के करीब उम्र का वैसे फ्लैशी रख-रखाव वाला आदमी था जैसे कि खामखाह अंटी का नावां चमकाने वालों के बीच रिवाज था ।
"हल्लो !" - डॉक्टर तनिक मुस्कराता हुआ बोला "आई एम डॉक्टर कदम ।” -
"मेरे ख्याल से" - आनन्द बोला- "आप पुलिस टीम से हैं।"
"आपका ख्याल दुरुस्त है । तो आप डकबिल मोटल के मालिक हैं ?"
"हां।" - वो गर्व से बोला- "अभी तो एक ही मोटल का मालिक हूं लेकिन बहुत जल्द मेरी होटल्स और मोटल्स की चेन होगी ।"
"वैरी गुड | अपनी आइन्दा तरक्की के लिये मेरी बधाई अभी से कबूल फरमाइये।"
"शुक्रिया ।"
"आज शाम मैडम आपके मोटल में थीं और रात को वहीं ठहरने वाली थीं ?"
"हां"
"कत्ल के सम्भावित वक्त के आसपास भी ये वहीं थीं?"
"हां । मैं खुद इस बात का गवाह हूं। मैडम की ये एलीबाई पहले ही पूरी तरह से ठोकी बजाई जा चुकी है । "
“दैट्स वैरी गुड । मैडम, इस... इस वारदात के बारे में आपकी जाती राय क्या है ?"
"प्रभात ने बहुत बुरा किया ।" - वो गुस्से में बोली"जुल्म ढाया । कोई जेहनी तौर पर बीमार शख्स ही ऐसा कर सकता है । उसे आज से बहुत पहले किसी साइकियाट्रिस्ट की शरण में होना चाहिये था ।” -
"आप तो पक्का ही फैसला किये बैठी जान पड़ती हैं कि कातिल प्रभात है । "
"आपको कोई शक है उसके कातिल होने में ?"
“आपको है ?"
"नहीं । बिल्कुल नहीं । प्रभात अतुल से जलता था । हसद ने उसकी दीवानगी को दोबाला कर दिया, नतीजा आपके सामने है ।"
"ऐसे मामलात में नौजवान जलते-भुनते ही रहते हैं, कोई कत्ल तो नहीं कर देता !"
"कोई नहीं कर देता । वो कोई कोई नहीं है । वो तो... वो तो वो है ।"
“आपका उससे अफेयर था ?"
"दोस्ती थी । "
"उस दोस्ती से भी आपने आज नाता तोड़ लिया ।"
“हां । आखिरकार । हालात तो पहले से ही बिगड़ने लगे थे, अतुल को लेकर रोज की चिड़चिड़ भैं-भैं पहले से जारी थी लेकिन कल रात तो जैसे अति हो गयी। उसने अतुल को लेकर कल ऐसा कोहराम मचाया कि मैंने तभी फैसला कर लिया था कि अब मेरी जिन्दगी में उसके लिये कोई जगह नहीं थी ।"
" लिहाजा कल के वाकये ने ही आपको वो चिट्ठी लिखने के लिये प्रेरित किया जिसमें आपने उसे अपनी जिन्दगी से, अपने फ्लैट से बाहर हो जाने का अल्टीमेटम जारी किया था ?”
"हां । "
" और पीछे चिट्ठी छोड़कर आप डकबिल मोटल चली गयीं ?"
"हां ।"
“वहां जाने का फैसला पूर्वनिधारित था या एकाएक किया ?"
उसने तत्काल उत्तर न दिया ।
डॉक्टर बड़े सब्र के साथ उसके बोलने की प्रतीक्षा करता रहा ।
“दोनों ही बातें थीं।" - आखिरकार वो बोली - "गोल्डी से मैं पहले से परिचित थी । कई बार ये मुझे तफरीहन अपने मोटल में आकर ठहरने का इनविटेशन दे चुका था । जब मैंने चेंज के लिये यहां से जाने का इरादा किया तो इसके मोटल का ख्याल मेरे जेहन में आना स्वाभाविक था । "
“लिहाजा आपने यहां पीछे प्रभात के लिये चिट्ठी छोड़ी और गुड़गांव डकबिल मोटल चली गयीं ?"
"हां । "
"पीछे यहां चिट्ठी छोड़ने का मतलब तो ये हुआ कि इस फ्लैट की चाबी प्रभात के पास भी थी ?"
"ये भी कोई कहने की बात है । जब वो रहता ही यहीं था तो..."
"आई अन्डरस्टैण्ड | आपके और प्रभात के अलावा कोई और भी शख्स है जिसके पास यहां की चाबी है ?"
वो भड़की और तनकर बैठ गयी ।
"क्या समझते हैं आप मुझे ?" - वो तीखे स्वर में बोली
"क्या मतलब ?”
"आप मुझे कोई ऐसी-वैसी लड़की समझते हैं ?"
"मैडम, मैं आपको जानता नहीं, इसलिये समझता नहीं, इसीलिये ये सवाल पूछा । अब बरायमेहरबानी जवाब दीजिये ।"
" और किसी के पास यहां की चाबी नहीं । "
"मकतूल के पास भी नहीं ?"
"नहीं।"
"तो फिर वो आपकी गैरहाजिरी में फ्लैट के भीतर कैसे दाखिल हुआ ?"
"प्रभात के कराये हुआ जिसके पास कि चाबी थी ।"
"और कोई तरीका मुमकिन नहीं ?"
"नहीं, और कोई तरीका मुमकिन नहीं । "
"फ्लैट की चाबी का एतबार आपने सिर्फ प्रभात पर किया ! सिर्फ उसे ये इज्जत बख्शी ?"
"हां । "
"फिर भी नाता तोड़ लिया ।"
"जरूरी हो गया था, उसी की वजह से जरूरी हो गया था । कई बार कई काम न चाहते हुए भी करने पड़ते हैं । इट वाज ए डिफिकल्ट डिसीजन बट आई हैड टू टेक इट | वो अपने हसद के मारे मिजाज पर काबू पाकर दिखाता तो ऐसी नौबत न आती ।"
"आपकी सोच के मुताबिक उसके मिजाज को खातिर में लाया जाये तो इसका मतलब ये हुआ कि कत्ल की नौबत एकाएक न आयी, वो उसने पहले से तैयारी करके, बहुत सोच-विचार के किया ?"
" ऐसे ही किया होगा।"
"फिर कत्ल में उसके नशे में होने का तो कोई रोल न हुआ।"
"नशा अपने में कत्ल का हौसला पैदा करने के लिये किया होगा।"
" लिहाजा हौसला पैदा करने के लिये टुन्न होना भी उसकी कत्ल की तैयारी का हिस्सा था ?"
"ये फिजूल की बातें हैं ।" - वो झुंझलाई - "दायें-बायें की बातों से आप हकीकत को नहीं झुठला सकते । वो कातिल है और उसके सिवाय कातिल कोई हो ही नहीं सकता । उसके पास कत्ल का तगड़ा उद्देश्य था, कत्ल के लिये इस्तेमाल हुआ हथियार उसका था, वो मौकायवारदात से फरार होता पकड़ा गया था, और क्या चाहिये आपको ?"
“जो शख्स कभी आपके दिल के करीब रहा हो उसके बारे में इतना हार्श वर्डिक्ट देना..."
"सच्ची बात कहनी ही पड़ती है । "
“जरूरी तो नहीं होता । हालात भी देखे जाते हैं, उनकी नजाकत भी पहचानी जाती है लेकिन खैर... गुड़गांव कैसे गयीं आप ?"
"क्या मतलब ?"
"सफर का कौन-सा जरिया अख्तियार किया ?"
"बस से गयी । हवाई जहाज तो है नहीं मेरे पास ।"
"होता भी तो उस पर गुड़गांव जाना मुमकिन न होता । मेरा ख्याल था कि आप कार से गयी होंगी, आजकल तो दिल्ली शहर में हर किसी के पास कार है...
"मेरे पास नहीं है ।”
" दैट्स टू बैड । चलानी तो आती होगी ?"
“आती है। कार चलाना आने के लिये खुद की कार होना जरूरी नहीं होता ।"
"सही फरमाया आपने । मकतूल के बारे में कुछ बताइये !"
"क्या बताऊं ?"
"वही जो आप जानती हैं । "
"होनहार नौजवान था, बहुत टेलेंट था उसमें । आइन्दा दिनों में बहुत तरक्की करने वाला था ।"
"किस फील्ड में ?"
"फिल्मों में ।"
"बतौर हीरो ?"
"बतौर लेखक । अतुल की एक कहानी मुम्बई के एक बड़े प्रोड्यूसर ने खरीदी है बहुत बड़े बजट की फिल्म बनाने के लिये । दो लाख तो उसे साइनिंग अमाउन्ट ही मिली थी जबकि दस लाख का कान्ट्रैक्ट था । कितने ही प्रोड्यूसर अभी से उसके पीछे थे, आइन्दा दिनों में फिल्मों में वो बहुत बड़ी हस्ती बनने वाला था ।”
" आप पर फिदा था ?"
“कौन बोला ऐसा ?”
"किसी के बोलने की जरूरत कहां है ! फिर भी कोई बोला तो आप ही बोलीं । "
“मैं !”
" जी हां । जब आप बार-बार पुरजोर लहजे में कहती हैं कि प्रभात उससे जलता था क्योंकि उसके आपसे ताल्लुकात थे तो और क्या मतलब हुआ इसका ? आपको मालूम हुआ होगा कि पुलिस की निगाह में ये केस एक लव ट्रायंगल का नतीजा है ?"
"हां । "
"तो फिर कहने को बाकी क्या रह गया ?"
"वो... वो क्या है कि... अतुल मुझे प्रभात के खिलाफ भड़काता तो था ।”
"क्यों ? क्योंकि वो आपके और प्रभात के अफेयर को सेबोटाज कर के खुद आप पर काबिज होना चाहता था ?”
" ऐसी कोई बात नहीं थी ।"
"मकतूल आपके दिल में प्रभात की जगह लेने की कोशिश नहीं कर रहा था ?"
"नहीं।"
"तो फिर ये हसद वाली, जलन वाली, ईर्ष्या वाली बात कहां से पैदा हो गयी जो कि आप कत्ल की वजह बताती हैं ?"
"वो बात नहीं थी लेकिन...'
"क्या लेकिन ?"
"प्रभात ऐसा समझता था।"
"लिहाजा उसने जो कदम उठाया एक मुगालते के तहत उठाया ! उसने नाहक एक शख्स की जान ले ली !"
"जाहिर है।"
"क्यों ?"
"क्योंकि वो पागल है । उसके दिमाग में फितूर है । उसके जितनी शराब पीने वाले शख्स को भले-बुरे की पहचान नहीं रहती।"
"लगता है दुनिया की कोई ताकत आपको यकीन नहीं दिला सकती कि प्रभात कातिल नहीं । आपका तो बस चले तो आप ही उसे फांसी पर टांग दें । "
"इन बातों का क्या फायदा, जनाब ?" - गोल्डी आनन्द बोला - “ये क्या कर सकती हैं ? ये तो महज हकीकत बयान कर सकती हैं। बाकी जो करना है पुलिस ने करना है, मुल्क के कायदे-कानून ने करना था ।"
" आप ठीक कह रहे हैं लेकिन जिसे ये हकीकत समझती हैं उस पर इनका अतिरिक्त जोर देना, जरूरत से ज्यादा जोर देना, खटकने वाली बात है ।"
आनन्द सकपकाया ।
“अगर ये विवेकशील बात करें तो दो में से एक बात इन्हें कबूल करनी होगी। या तो कत्ल की बुनियाद ईर्ष्या की भावना नहीं या फिर मकतूल इन पर दिलो-जान से फिदा था ।"
"वो मुझे पसंद करता था ।" - शैलजा दबे स्वर में बोली "लेकिन वो मेरे बारे में कितना सीरियस था, इस तरफ मैंने खास ध्यान नहीं दिया था ।"
"जब आप कहती हैं कि वो आपको प्रभात के खिलाफ भड़काता था..."
"तब मुझे नहीं सूझा था कि वो अपना क्रेडिट बनाने के लिये ऐसा करता था।"
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