देवा का बड़ा भाई शंकर चौहान पुलिस में था, उसे भी पता चल गया था कि देवा को विनायक शेट्टी के कत्ल के सिलसिले में पुलिस हैडक्वार्टर ले जाया गया था और उससे काफी सख्ती से पूछताछ की गई थी। शंकर चौहान ने घर में भी उसकी खूंखार खिंचाई की थी और एक भाई या पुलिस वाले की तरह घर में भी उससे पूछताछ करने की कोशिश की थी। उसने देवा को खूब डांट भी पिलाई थी। घर में अच्छा-खासा तनाव फैल गया था। दोनों भाई एक-दूसरे पर चीखने-चिल्लाने लगे थे, उनकी मां और बहनें सन्न रह गई थीं। देवा जैसे पुलिस हैडक्वार्टर से और भी पक्का होकर आया था। उसने खूब हाजिरदिमागी से जुबान चलाई थी, जिस मौके पर चुप रहना बेहतर था, उस मौके पर उसने जुबान को ताला लगा लिया था। उसने काफी हद तक पुलिस वालों को भी यकीन दिला दिया था कि विनायक शेट्टी के कत्ल से उसका कोई ताल्लुक नहीं था। घर में भी आखिर वो यही प्रमाण देने में कामयाब हो गया था। बड़ी मुश्किल से घर में चीख-पुकार बंद हुई थी और हंगामा ठण्डा पड़ा था।
उस दिन शाम को देवा लीना के फ्लैट पर पहुंचा था तो बड़ा खुश नजर आ रहा था। होता भी क्यों न एक बड़ी मुसीबत उसके सिर से टल गई थी।
"आज रात का क्या प्रोग्राम है, हनी ?" उसने लीना को बाहों में भींचते हुए पूछा।
"आज कार्लोस क्लब चलते हैं।" लीना ने उसकी गर्मजोशी का जवाब गर्मजोशी से देते हुए जबाव दिया।
"नहीं। हम कार्लोस क्लब नहीं जाएंगे।" देवा ने फौरन फैसला सुना दिया।
लीना को शायद उसकी जुबान से इंकार सुनने की उम्मीद नहीं थी। उसकी गर्मजोशी में फौरन ही कुछ कमी आ गई थी, वो पीछे हटते हुए हल्की खफा होकर बोली---
"वो क्यों ?"
“मुझे वो जगह पसन्द नहीं है।" देवा ने इत्मीनान से जवाब दिया--- "हमें और किसी क्लब में चलना चाहिये, हनी ।"
"नहीं। मैं तो कार्लोस क्लब ही जाना चाहती हूं।" लीना जरा उनककर बोली। उसके लहजे में औरतों वाली विशेष जिद्द उभर आई थी।
"मैंने कहा न हम वहां नहीं जा रहे।" देवा के लहजे में सख्ती थी।
"लेकिन क्यों? कोई बात भी तो हो। यह तो कोई वजह न हुई कि तुम्हें वो जगह पसन्द नहीं है।" लीना ने जिद्द की।
"सबसे बड़ी वजह यह है कि आज शनिचर है और शनिचर की रात को कर्लोस क्लब में विनायक शेट्टी गैंग के लोगों का आना-जाना लगा रहता है।" देवा ने बताया।
"ओह...! तो डर गए ?" लीना का अन्दाज छेड़ने वाला था। वो अब से शायद देवा को सताने और उससे अपनी बात मनवाने की प्रैक्टिस शुरू करना चाहती थी।
"ऐसी कोई बात नहीं।" देवा तेजी से बोला--- "मैं किसी से नहीं डरता। लेकिन मैं पीठ पर गोली खाना पसन्द नहीं करता। मैं नहीं चाहता कि कोई धोखे से पीछे से वार कर दे।"
"ठीक है।" लीना ने जल्दी ही हथियार डाल दिये--- "अगर तुम वहां नहीं जाना चाहते तो न सही हम किसी और क्लब चलते हैं, वो ठीक रहेगा।"
"हां। हांलाकि वो भी कार्लोस क्लब से कम नहीं है। लेकिन वो कम-से-कम जगह तो अच्छी है। वहां अच्छे लोग आते हैं। अगर तुम उसी इलाके में जाना चाहती हो, तो यह ठीक रहेगा ।"
देवा के ज्यादातर कपड़े अब लीना के फ्लैट में ही में टंगे रहते थे। वो नहाने और शेव बनाने के लिये बाथरूम में चला गया।
कुछ देर बाद वो तैयार होकर निकला, तो उसका हुलिया पूरी तरह शरीफ और इज्जतदार आदमियों वाला था। वो थ्री पीस सूट में था। आमतौर पर प्रतिष्ठित लोग इस हुलिये में डिनर पर जाया करते थे। यह दूसरी बात थी कि उसकी बगल में एक होलस्टर भी लगा हुआ था जिसमें रिवाल्वर पड़ा हुआ था। उसकी जेब में चपटी-सी पिस्टल भी रखी हुई थी। प्रतिष्ठित लोग डिनर पर जाते वक्त ऐसी चीजें साथ लेकर नहीं जाते थे।
लीना हरे रंग के एक रेशमी गाऊन में थी और जीती-जागती कयामत नजर आ रही थी। उस गाऊन में उसके भरपूर और सुडौल अंगों का आकर्षण उफन रहा था। उसके कंधों पर एक खूबसूरत ऊनी शॉल पिनों की मदद से टिकी हुई थी। शॉल ने उसकी शख्सियत को गरिमापूर्ण बना दिया था। वो दोनों जब सीढ़ियां उतरकर नीचे आए तो राहगीरों ने गर्दनें घुमा-घुमाकर उनकी तरफ देखा था।
इसमें शक नहीं था कि उनकी जोड़ी बहुत खूबसूरत नजर आ रही थी और जंच भी खूब रही थी। सड़क के किनारे एक उम्दा कार उसकी प्रतीक्षक थी। यह गाड़ी देवा ने खरीद ली थी और लीना से किया हुआ वादा पूरा कर दिया था कि वो उस वक्त उसे तफरीह के लिये ले जाने की बात करे जब उसके पास कार हो ।
ब्लूम्ज क्लब पहुंचकर वो बालकनी में ऐसी जगह बैठे, जहां से देवा चारों तरफ नजर रख सकता था और खुद उनके बारे में पता नहीं चलता था कि वो खासतौर पर वहां बैठे हैं।
वो बालकनी अर्ध-चन्द्राकार में दूर तक फैली हुई थी और उसके एक सिरे पर उनकी मेज थी। वो नीचे बैठे हुए तमाम लोगों पर नजर रख सकते थे और दरवाजे से अन्दर आने वाले हर शख्स को भी देख सकते थे।
देवा के पीछे सिर्फ दीवार थी। इसलिये उसे इस तरफ नजर रखने की जरूरत नहीं थी। वो यहां वक्त गुजारते वक्त लुत्फ उठा सकता था। नीचे कैब्रे हो रहा था, देवा उसका भी लुत्फ उठा रहा था। कुल मिलाकर इस वक्त जिन्दगी उसे बहुत खूबसूरत नजर आ रही थी। उन्होंने शैम्पेन पी और बहुत बढ़िया खाना खाया, उसके बाद वो कैब्रे देखते हुए सिगरेट का धुआं उड़ाते रहे थे। बारह बजे के करीब क्लब की तमाम सीटें भर चुकी थीं। इस दौरान देवा ने किसी ऐसे शख्स को अन्दर आते नहीं देखा था, जिस पर उसे अपना दुश्मन होने का सन्देह हो सकता।
उपस्थित जनों की तरफ से इत्मीनान होने के बाद देवा ने कुछ देर डांस भी किया था। डांस के दौरान भी थोड़ा-बहुत खाने-पीने का सिलसिला चलता रहा था। फिर क्लब की एक सिंगर अपनी कला का प्रदर्शन करने लगी। वो एक भारी-भरकम औरत थी, लेकिन आवाज मधुर और सुरीली थी। वो नकली डायमंड्स के बहुत-से जेवर पहने हुए थी । देवा की समझ में सिर्फ इतना ही आया था कि वो जो कुछ गा रही थी बड़े ऊंचे दर्जे की शायरी थी, क्योंकि वो शायरी देवा की समझ में नहीं आ रही थी। फिर वो दोनों बालकनी में वापस आ गए थे और दोबारा अपनी कुर्सियों पर बैठ गए थे। अचानक देवा की निगाह बालकनी में दूसरी तरफ बैठी एक लड़की पर पड़ी थी। वो सफेद फ्रॉक पहने एक बेहद हसीन लड़की थी। उसके बाल भूरे थे और वो बहुत-सी दुर्लभ सौंदर्य का खजाना थी।
हालांकि उसके साथ नौजवान था जो देखने में पहलवान लगता था।
लेकिन देवा ने उसकी मौजूदगी की कोई परवाह किये बगैर गहरी निगाहों से लड़की की तरफ देखा था, वो फिर देखता ही रह गया। फिर वो लड़की की तारीफ किये बगैर न रह सका था।
"वाओ...क्या लड़की है!"
"कहां?" लीना ने बुरी तरह चौंककर पूछा।
"वो... सफेद फ्रॉक में भूरे बालों वाली जो लड़की बैठी है, मैं उसी की बात कर रहा हूं।" देवा ने बिना झिझके बता दिया था।
लीना ने आंखें सिकोड़कर उत्सुकता से इधर-उधर देखा । फिर गर्दन घुमाकर दोबारा देवा को देखने लगी। देवा के चेहरे पर ऐसे भाव थे जैसे वो मंत्रमुग्ध हो गया हो।
लीना के चेहरे पर अप्रिय से भाव नजर आने लगे थे।
"देखो।" वो जहरीले लहजे में बोली--- “तुम्हारे मुंह से लार घुटनों पर टपक रही है।” उसने व्यंग्यपूर्ण लहजे में देवा को खबरदार किया और बुरा-सा मुंह बनाकर बोली--- “मेरी तो समझ में नहीं आ रहा कि तुम्हें उस चुड़ैल में क्या नजर आ रहा है?"
"तुम एक औरत हो न ?” देवा मुस्कराते हुए बोला--- “स्पष्ट है कि तुम उसको एक औरत की नजर से ही देख रही हो। मर्द की नजर से देखोगी तो तुम्हें मालूम हो जाएगा कि उसमें दिल को खींच लेने की ताकत है।"
"मैं मर्दों की नजर और फितरत से अच्छी तरह वाकिफ हूं। मुझे मालूम है कि औरत की कौन-सी 'चीज' मर्द को खींचती है।" उसने 'चीज' शब्द पर जोर देते हुए मुंह बनाकर कहा था ।
“दरअसल तुम उसे देख ही नहीं रहीं। तुम ईर्ष्यालु हो रही हो। प्रतिस्पर्धा ने तुम्हारी आंखों पर पट्टी बांध दी है।"
देवा ने छेड़ने वाले अन्दाज में मुस्कराते हुए कहा ।
"मुझे क्या जरूरत है उससे ईर्ष्या करने की ?" लीना ने लापरवाही जाहिर करने की कोशिश की--- "मैंने कहा न कि मुझे तो उसमें कोई खास बात नजर नहीं आती, सिवा इसके कि वो थोड़ी कम उम्र और नौजवान है।"
“नौजवानी अपने आप में खुद एक बहुत बड़ी चीज होती है, डार्लिंग।" देवा ने मुस्कराते हुए कहा था। वो आज लीना को परेशान करने के मूड में नजर आता था। लीना ने कहा---
“तुम्हें शायद नौजवान इसलिये अच्छे लगते हैं, क्योंकि तुम खुद नौजवान हो।” उसका लहजा एकदम धीमा हो गया था--- “वैसे अब तुम अपनी उम्र से बहुत बड़ी-बड़ी बातें करने लगे हो।"
“वो तो मैं हमेशा से करता आया हूं।" देवा उसी शरारती-सी मुस्कराहट के साथ बोला था।
लीना ने एक बार फिर लड़की की मेज की तरफ देखा ।
फिर उसने देवा का दृष्टिकोण बदलने की कोशिश करते हुए कहा—
“लेकिन उसके सामने जो मर्द है, वो तो पूरा डाकू नजर आता है।"
“मुमकिन है कि वो डाकू ही हो।” देवा ने लापरवाही से कहा--- "डाकू होना फिर भी कोई ज्यादा बुरी बात नहीं है। इस शहर में सर्टिफाईड डाकुओं से भी ज्यादा बुरे लोग हैं। लेकिन मैं...उस डाकू जैसे नौजवान के बारे में नहीं, उसकी साथी हसीना के बारे में सोच रहा हूं। पता नहीं, वो कौन है?" देवा ने गम्भीर लहजे में कहा।
“चलती-फिरती चीज है। मैं शर्त लगा सकती हूं कि वो इसी किस्म की लड़की है जो थोड़े-से पैसों के लिये किसी के साथ भी चल देती है।" लीना के लहजे में वाकई ईर्ष्या की तपिश थी।
"मेरा ख्याल ऐसा नहीं है।" देवा तेजी से बोला था--- "मैं भी शर्त लगाकर कह सकता हूं कि वो कोई ऐसी-वैसी लड़की नहीं है।" उसे शायद लीना की टिप्पणी अच्छी नहीं लगी थी।
लीना ने कुछ हैरत से देवा की तरफ देखा ।
देवा ने वेटर को बुलाया और लड़की की तरफ इशारा किये बगैर नीची आवाज में बोला---
“वो जो दूसरी तरफ सफेद फ्रॉक पहने भूरे बालों वाली लड़की बैठी है, उसे जानते हो?"
वेटर ने उस तरफ देखा, फिर मुस्कराकर बोला---
"वो मिस करीना है, सर! करीना कोहली।”
"करीना... कोहली...?” देवा ने सोचते हुए सिर हिलाया--- "मैंने पहले कभी यह नाम नहीं सुना।"
वेटर दबी दबी-सी मुस्कराहट के साथ बोला---
“असल में मिस कई क्षेत्रों में अपने दूसरे कोड नाम से ज्यादा मशहूर है। शायद आपने वो नाम सुन रखा हो सर....।"
"क्या नाम है वो...?" देवा ने उत्सुकता से पूछा।
"गनगर्ल ।” वेटर ने धीमे स्वर में बताया।
"हे भगवान!" देवा की आंखें हैरत से फैल गईं--- "क्या यह गनगर्ल है ?"
"जी हां सर! लेकिन सर, यह बात किसी को कहियेगा नहीं कि इसके बारे में मैंने आपको बताया है।” वेटर का लहजा मध्यम हो गया था--- "हमें यहां इस तरह की बातें करने की परमीशन नहीं है। मैंने आपको खास कस्टमर समझकर बता दिया है।"
“फिक्र न करो और जब तुम बिल लाओगे, तो देखोगे कि मैं तुम्हें कितनी टिप देता हूं।” देवा ने मुस्कराते हुए उसे तसल्ली दी ।
“थैंक्यू सर !” वेटर के चेहरे पर खुशी के भाव नजर आने लगे थे। उसने गर्दन जरा-सी झुकाई और वापस चला गया।
"तो यह गनगर्ल क्या होती है?" वेटर के जाते ही लीना ने तीखे लहजे में पूछा।
"यह जानने के लिये तुम्हें अण्डरवर्ल्ड के तौर-तरीकों की थोड़ी बैकग्राउण्ड के बारे में भी मालूम होना चाहिये, तुम्हें इस किस्म की छोटी-छोटी बातें भी मालूम होनी चाहिये।"
“क्यों...?" लीना ने भौंहें उचकाकर पूछा।
"क्योंकि तुमने एक लम्बा समय विनायक शेट्टी जैसे बड़े गैंगस्टर के साथ गुजारा है।”
देवा ने ये सब कुछ बड़े नम्र-लहजे में कहा था। लेकिन बात फिर भी कुछ ऐसी थी कि लीना को बुरा लगना लाजिमी था। मगर इससे पहले कि वो अपनी नाराजगी को शब्दों में प्रकट करती । देवा ने जल्दी से अपनी बात आगे बढ़ा दी---
“किसी भी गैंग से सम्बन्ध रखने वाला या बदमाशी करने वाला कोई भी माहिर और अच्छा बन्दूकबाज सिर्फ अपने इलाके में ही नहीं बल्कि पुलिस के लिये भी जानी-पहचानी हस्ती होता है। जब भी वो रास्ते में या कहीं और पुलिस को नजर आता है, तो पुलिसवाले उसकी तलाशी जरूर लेते हैं कि वो कहीं वारदात के लिये तो नहीं जा रहा।"
लीना के चेहरे पर बेजारी के भाव गायब हो चुके थे और उनकी जगह दिलचस्पी ने ले ली थी। देवा ने उसके चेहरे के भावों का जायजा लेते हुए कुछ क्षण रुककर बात आगे बढ़ाई---
"वो तलाशी दिये बगैर अक्सर ज्यादा दूर नहीं जा पाता। कभी उसे पुलिस ऑफिसर रास्ते में रोक लेते हैं और कभी उससे बड़े बदमाश। इसका हल उन लोगों ने यह निकाला है कि वो हथियार किसी और के पास रखने लगे हैं। आमतौर पर वो कोई खूबसूरत और शरीफ दिखाई देने वाली लड़की होती है। जिस पर शायद ही कोई सन्देह कर सके। वो लड़की गैंगस्टर से अलग-थलग रहकर चलती है। मगर बन्दूकबाज को यह मालूम रहता है कि वो कहां है? वो बन्दूकबाज की पहुंच में ही रहती है। जब भी बन्दूकबाज को हथियार की जरूरत पड़ती है, वो गनगर्ल से ले लेता है। लड़की चुपके से उसके पास पहुंचकर उसे गन देती है और उसके बाद रफू-चक्कर हो जाती है। बन्दूकबाज वारदात के बाद फरार होते वक्त या कहीं आसपास ही रहने की मर्जी से कुछ दूर निश्चित किये स्थान पर मौजूद गन वाले को गन वापस कर देता है। वो पैदल या किसी टैक्सी में बैठकर फौरन ही उस इलाके से गायब हो जाया करती है। लेकिन वो कहीं भी हड़बड़ी नहीं दिखाती । न ही अपने एक्शन से संदिग्ध ही नजर आती है। इधर वारदात करने वाला बन्दूकबाज अगर मौका-ए-वारदात के आसपास पकड़ा भी जाता है तो उसके पास से कोई हथियार बरामद नहीं कर पाते पुलिसवाले। अब तुम्हारी समझ में आया कि गनगर्ल क्या होती है?"
“मुझे तो इसमें कोई ऐसी बात नजर नहीं आती, जिसके आधार पर गनगर्ल को खासी अहमियत दी जाए।" लीना नाक चढ़ाकर बोली।
“तुम्हारा यह अन्दाजा गलत है।" देवा मुस्कराकर बोला--- “हकीकत यह है कि गनगर्ल होना कोई मामूली बात नहीं है। हजारों-लाखों लड़कियों में से कोई एक लड़की गनगर्ल बनती है। उसमें बड़ी समझदारी, फुर्ती और इरादों की मजबूती जरूरी होती है।"
"अगर वेटर ने झूठ नहीं बोला और यह वाकई करीना कोहली नामी गनगर्ल है तो यह अंडरवर्ल्ड की सबसे मशहूर और सबसे जबर्दस्त गनगर्ल है। वेटर ने जब मुझे इसका नाम बताया था, तो फौरन मुझे याद नहीं आया था कि मैं यह नाम पहले भी सुन चुका हूं। अंडरवर्ल्ड में इसकी हैसियत काफी अनोखी-सी है। मुझे उम्मीद नहीं थी कि करीना कोहली नामी गनगर्ल इतनी जवान और इतनी खूबसूरत होगी।" उसने एक बार फिर करीना कोहली की तरफ देखा। फिर कुछ देर बाद बोला--- "उसने गनगर्ल के रूप में अपना 'कैरियर' दिल्ली में शुरू किया था। यह वहां के एक बदमाश अफजल कुरैशी के लिये काम करती थी। वो लम्बे अर्से के लिये जेल चला गया तो यह हरनाम सिंह वाधवा के साथ जुड़ गई थी। लेकिन हरनाम को जल्दी ही कत्ल कर दिया गया था। उसके बाद यह यहां आ गई थी और कन्हैया डाबर नामी बदमाश के साथ काम करने लगी थी। डाबर को मैं नहीं जानता। हो सकता है यह गैण्डे जैसा आदमी ही कन्हैया डाबर हो जो इस वक्त उसके साथ बैठा हुआ है ।"
"नहीं....यह कोई डाबर-शाबर नहीं है।" लीना ने कहा।
"तुम कैसे कहती हो?” देवा ने आँखें सिकोड़कर उसे देखा ।
"क्योंकि एक बार डाबर से मेरी मुलाकात हो चुकी है। एक पार्टी में मुझे उसके साथ डांस करने का मौका मिला था।” लीना ने बताया ।
उस दौरान नीचे डांस का दूसरा दौर शुरू हो गया था। देवा और लीना भी डांस करने नीचे आ गए थे। 'गनगर्ल' और उसका गैण्डे जैसा साथी भी डांस कर रहे थे।
देवा उस लड़की को करीब से देखकर और भी मोहित हो गया था। करीब से वो उसे और भी ज्यादा खूबसूरत और आकर्षक लग रही थी। वो उसकी तरफ इतना ज्यादा आकर्षित रहा था कि लीना की तरफ से उसका ध्यान ही हट गया था। काफी देर बाद देवा को अहसास हुआ था कि एक शख्स जबर्दस्ती लीना के साथ फ्री होने की कोशिश कर रहा था।
वो एक भारी-भरकम आदमी था और उसका हुलिया काफी शरीफ लोगों जैसा था। वो थ्री पीस सूट में था। मगर उसकी हरकतें शरीफों वाली नहीं थीं। ज्यादा नशे ने उसे बहका रखा था और वो अजीब-अजीब हरकतें कर रहा था।
वैसे तो उसकी डांस पार्टी उसके साथ थी जो एक नई उम्र की स्लिम-सी जीरो फिगर लड़की थी, बिल्कुल गुड़िया जैसी। मर्द के भारी-भरकम जिस्म के सामने वो और भी ज्यादा नाजुक नाजुक-सी लग रही थी। छोटी-छोटी सी। मर्द अपने गोरिल्लों जैसे बालों को मोटे-मोटे बाजुओं में लड़की के नाजुक से जिस्म को दोहरा किये जा रहा था। वो एक अच्छा खासा बड़ी उम्र का आदमी था, जिसकी गिनती बुजुगों में भी की जा सकती थी। लेकिन उसकी हरकतें किसी किशोर लफंगे से भी ज्यादा छिछोरी थीं। अपनी पार्टनर के साथ होने के बावजूद वो लीना के साथ छेड़छाड़ कर रहा था और उसे अपनी तरफ आकर्षित करने के लिये अजीबो-गरीब हरकतें कर रहा था।
जब भी दोनों जोड़े नाचते-नाचते एक पल के लिये एक-दूसरे के पास पहुंचते थे, तो वो लीना को देखकर आंख मारता था, हाथ हिलाता और फिर उसे छूने की कोशिश करता था। जब देवा का ध्यान उसकी तरफ गया था और उसने दो-तीन बार उसकी ये हरकतें देखी थीं तो उसका चेहरा गुस्से से सुर्ख हो गया था।
इस दौरान दोनों जोड़े एक बार फिर एक-दूसरे के करीब आए तो वो आदमी एक बार फिर लफंगों की तरह लीना को आंख मारकर बोला---
"हैलो प्यारी लड़की! अगले राउंड में तुम्हें मेरे साथ डांस करना है।"
उसका स्टाईल ऐसा था जैसे वो देवा को देख ही न रहा हो। देख ही रहा हो तो उसे खातिर में लाने की जहमत न उठा रहा हो।
अचानक देवा ने लीना को अपनी बांहों के घेरे से आजाद कर दिया और लम्बे-चौड़े आदमी की जीरो फिगर साथी को भी बाजू से पकड़कर एक तरफ खड़ा कर दिया।
इससे पहले कि वो आदमी कुछ समझ पाता, देवा ने उसके जबड़े पर एक प्रचंड घूंसा जड़ दिया। घूंसा इतना जर्बदस्त था कि वो दैत्याकार आदमी न सिर्फ गिर पड़ा था बल्कि चिकने फर्श पर आठ-दस फुट दूर तक फिसलता चला गया था।
फिर... इससे पहले कि वो संभलता और फर्श से उठता, देवा लपककर उसके पास पहुंचा और उसकी पसलियों में जोरदार ठोकर रसीद कर दी।
वो शख्स भैंसे की तरह इकराकर लोट-पोट हुआ तो देवा ने उसकी पसलियों के दूसरी तरफ भी जोरदार ठोकर जमा दी।
उसके मुंह से पहले से भी जोरदार कराहट निकली। अब उठना शायद उसके बस की बात ही नहीं रही थी। वो निचेष्ट हो गया।
देवा ने लीना का बाजू पकड़ा और बढ़ते हुए बोला---
"आओ हनी चलें। यह जगह इस काबिल नहीं कि यहां और रुका जाए।"
बिल वो अदा कर चुके थे। लीना का हाथ पकड़कर वो पिछले दरवाजे की तरफ जा रहा था। रास्ते में देवा को वही वेटर खड़ा नजर आया जिसने उन्हें डिनर सर्व किया था और जिसे देवा ने बिल के साथ-साथ सौ का नोट टिप दी थी।
वेटर मुस्कराते हुए बोला---
“सर.... आपने उस मोटे की खबर तो अच्छी ली। उसकी हरकतें बता रही थीं कि इसके साथ कुछ ऐसा ही होगा। लेकिन...जब यह होश में आएगा तो काफी हंगामा करेगा।"
देवा ने कोई जवाब नहीं दिया था और एक बार फिर दरवाजे की तरफ बढ़ा था। तब वेटर उसके पीछे लपकते हुए बेहद धीमे स्वर में बोला था--
“सर... आपको मालूम है, यह आदमी कौन है ?"
"नहीं।” देवा ने संक्षिप्त-सा जवाब दिया।
"ए०सी०पी० तांब्रे ।"
"हे भगवान!" देवा के मुंह से अनायास निकल गया। उसके वहमो-गुमान में भी नहीं था कि नशे में लफंगों जैसी छिछोरी हरकतें करने वाला वो शख्स असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस भी हो सकता है।
देवा उसे नाम से जानता था, लेकिन उसकी शक्ल उसने कभी नहीं देखी थी। जब वो पिछले दरवाजे से निकलकर भाग रहा था तो लीना ने उखड़ी हुई सांसों के दरम्यान पूछा था---
"यह ए०सी०पी० तांब्रे कौन है?"
"इसका पूरा नाम जयंत तांब्रे है। यह पुलिस के जासूसों यानि डिटेक्टिव डिपार्टमेंट का इंचार्ज है यानि यह भी डिटेक्टिव है। सुना है यह पुलिस का सबसे सख्त ऑफिसर है।" देवा ने जवाब दिया।
"क्या तुम्हारे ख्याल में तुम्हें इस घटना की वजह से मुसीबत उठानी पड़ सकती है?" लीना ने पूछा।
"जाहिर है ।" देवा तेज लहजे में बोला--- “जो कुछ मैंने इसके साथ किया है। इसके लिये मुझे कोई इनाम या अवार्ड तो मिलने से रहा।"
वो कार में बैठकर तेजी के साथ वहां से रवाना हो गए।
आधे मील का फासला तय करने के बाद देवा ने कार की रफ्तार जरा कम कर दी, ताकि उसका बॉडीगार्ड जगमोहन अपनी कार में उसके पीछे लगा रह सके और पीछे कहीं फंसा न रह जाए। जब उसे रियर-व्यू मिरर में उसकी कार की हैडलाइटें नजर आने लगीं तो देवा ने दोबारा कार की रफ्तार बढ़ा दी। वो जल्द से जल्द इस इलाके से निकल जाना चाहता था।
लीना के फ्लैट के पास पहुंचकर देवा ने कार रोकी और लीना जल्दी से उतर गई ।
उस दौरान एक कार तेजी से पीछे की तरफ से आई, फिर रात का सन्नाटा, गोलियों की तड़तड़ाहट से भंग हो गया। अन्धेरे में शोले चमकते दिखाई दिये थे। वो कार गोलियां बरसाती हुई इस तेजी से आई थी कि पलक झपकते ही गायब हो गई थी। फायरों की आवाज सुनते ही लीना तेज़ी से पलट पड़ी थी। फिर खौफ से चीखी थी---
"देवा...तुम ठीक तो हो ?"
"हां।" देवा ने कार के फर्श से उठते हुए कहा--- "मेरी सावधानी काम आ गई। मैंने जब कुछ ज्यादा ही तेजी से उस कार को करीब आते देखा था, तो मुझे खतरे का अहसास हो गया था और मैं कार के फर्श पर गिर गया था। यह तो अच्छा हुआ कि तब तक तुम कार से उतरकर बिल्डिंग की दीवार की ओट में पहुंच चुकी थीं। अगर तुम में गाड़ी होतीं तो हम दोनों एक ही वक्त में फर्श पर नहीं गिर सकते थे। गाड़ी में इतनी जगह ही नहीं है। फिर शायद हम दोनों का ही काम तमाम हो जाता।" फिर जैसे देवा को कुछ ख्याल आया और वो आंखें सिकोड़कर लीना को घूरते हुए बोला--- “कहीं तुम्हें इस हमले का पहले से तो पता नहीं था? तुम गाड़ी रुकते ही तेजी से उतरकर दीवार की ओट में चली गई थीं।"
"यह तुम क्या कह रहे हो देवा?" वो एकदम कड़ककर बोली--- "तुम मुझ पर शक कर रहे हो? इसका मतलब, तुम्हें मेरे ऊपर भरोसा नहीं रहा।"
"जब एक आदमी पर अचानक गोलियों की बौछार हो जाए और वो मरने से बाल-बाल बचा हो, तो उसे किसी पर भी शक हो सकता है। किसी पर से भी उसका भरोसा उठ सकता है।" देवा एक ठण्डी सांस लेकर बोला था।
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