अण्डरवर्ल्ड में हालात वाकई बड़ी तेजी से पलटा खाते थे और घटनाएं तूफानी अन्दाज में एक-के-बाद-एक घटती चली जाती थीं। देवा घटनाओं के बारे में सोच रहा था। वो उसे खुद भी सब कुछ ख्वाब लग रहा था। चौबीस घण्टों के अन्दर-अन्दर वो एक बड़े गैंग लीडर को कत्ल कर चुका था, दूसरे गैंग लीडर ने उसके लिये अपने दरवाजे खोल दिये थे। उसे एक अवैध पत्नी भी उपलब्ध हो गई थी। जिसे वो एक मामूली-से गंदे होटल से निकालकर एक बाइज्जत-सा फ्लैट दिलाने में कामयाब हो चुका था। देवा का फिलहाल अपना घर छोड़ने का कोई इरादा नहीं था। उसे मालूम था कि उसका अभी से घर छोड़ देना उसके मां-बाप को अच्छा नहीं लगेगा। लीना को फ्लैट पर छोड़ने के बाद वो एक बार फिर पीटर के सैलून की तरफ रवाना हो गया था। वो इस वक्त जैसे सीमांत इलाके में जा रहा था।
एक तरफ वो गैंग थे जिनका संचालन यू०पी०, बिहार या मध्य प्रदेश के लोग करते थे। यह कुल मिलाकर कई गिरोहों का जमावड़ा कहा जा सकता था। जिसे कई सतहों पर विभिन्न प्रदेशों के लोग कण्ट्रोल करते थे, जिसमें यू०पी० के लोग ज्यादा थे। दूसरी तरफ लोकल और गोवानी बदमाशों का सिक्का चलता था, दोनों इलाकों के बीच में एक अदृश्य-सी सीमा रेखा थी। दोनों तरफ के बदमाश एक-दूसरे के इलाके में जाते हुए डरते थे। लेकिन यू०पी०, मध्य प्रदेश वालों की दहशत बहरहाल कुछ ज्यादा थी। देवा इस वक्त जैसे दोनों इलाकों की दरम्यानी पट्टी पर चला जा रहा था। जिसे कूटनीतिक और आर्मी क्षेत्रों में नो मैंस लैंड कहा जाता है। वो पैदल ही था क्योंकि किराये की कार उसने वापस कर दी थी। उसकी जमापूंजी तेजी से घटती जा रही थी।
अचानक एक कार तेजी से उसके पास से गुजरी और थोड़ा आगे जाकर ब्रेकों की तेज चरचराहट के साथ रुक गई।
देवा ठिठक गया।
पहला ख्याल तो उसके जेहन में यही आया कि वो यहां से भागे । लेकिन अगले ही क्षण उसने उस कार को पहचान लिया और भागने का इरादा छोड़ दिया।
हालाकि उस कार पर पुलिस का कोई शिनाख्ती निशान नहीं था। लेकिन सभी को मालूम था कि पुलिस की स्पेशल ब्रांच की कार थी। स्पेशल ब्रांच के जासूसों को विशेषाधिकार प्राप्त थे। देवा को किसी जासूस ने ही पुकारा था। अगर वो दौड़ पड़ता तो जासूस उसे पीछे से गोली भी मार सकता था। इसलिये देवा ने खामोशी से उसके पास चले जाने में ही भलाई समझी थी।
वो कार के करीब पहुंचा, तो सख्त चेहरे और लम्बे-चौड़े जिस्म वाले पुलिसिये ने हुक्म दिया---
“गाड़ी में बैठो।"
उसने अपने हुक्म की तामील का इन्तजार भी नहीं किया और खुद ही हाथ बढ़ाकर देवा को कार के खुले दरवाजे से अन्दर घसीद खुद लिया।
कार तेजी से आगे बढ़ गई।
गाड़ी में तीन स्पेशल ब्रांच के पुलिसिये जासूस मौजूद थे। जब वो हैडक्वार्टर पहुंचे थे तो तीन और डिटेक्टिव उनके साथ हो लिये थे।
देवा को अपने घेरे में लिये हुए वो सेकिण्ड फ्लोर के एक कॉन्फ्रेंस रूम में दाखिल हो गया। यह कमरा कॉन्फ्रेंस के अलावा पूछताछ के लिये भी इस्तेमाल किया जाता था।
"मेरा ख्याल है, यह तो तुम्हें मालूम ही होगा कि पिछली रात विनायक शेट्टी मारा गया है?" एक डिटेक्टिव ने चुभते हुए लहजे में कहा। यह बाकी जासूसों का ऑफिसर लगता था ।
"हां।" देवा ने कोई खास प्रतिक्रिया जाहिर किये बगैर कहा--- "मैंने सुबह टी०वी० न्यूज में देखा और सुना था।"
छः के छः डिटेक्टिव, एक साथ हँस पड़े थे जैसे देवा ने उन्हें कोई जोक सुनाकर हँसने पर मजबूर कर दिया हो।
“एक्टिंग अच्छी कर लेते हो।" उसी पुलिसिये ने कहा, जो उनका चीफ मालूम होता था--- "टी०वी० में न्यूज देखने से बहुत पहले ही तुम्हें मालूम हो गया होगा कि शेट्टी कत्ल हो चुका है। बल्कि तुम्हें तो उसके कत्ल से पहले ही मालूम होगा कि वो कत्ल होने वाला है। क्योंकि उसे कत्ल करने वाले तो तुम ही थे।"
"इन दिनों मौसम काफी गर्म हो रहा है।” देवा बोला--- “लगता है तुम्हारे दिमाग में गर्मी चढ़ गई है।"
"बातों में उलझाने की कोशिश न करो छोकरे वर्ना हमें सख्ती से काम लेना पड़ेगा।" पुलिस के जासूस ने कहा--- "हमें सब कुछ मालूम हो चुका है। अब तुम सीधी तरह अपने मुंह से कबूल कर लो, तुम्हारे हक में यही बेहतर है।"
"मेरी समझ में नहीं आ रहा कि तुम किस तरह की बातें कर रहे हो!" देवा ने यों प्रकट किया जैसे वो इस कार्यवाई से डरने लगा हो ।
"ओह...! तो अब तुम यह साबित करने की कोशिश करोगे कि तुम बड़े सख्त जान हो।” डिटेक्टिव ने कहरमयी नजरों से उसे घूरा।
"नहीं। मैं कुछ साबित करने की कोशिश नहीं कर रहा।" देवा ने उसी लहजे में कहा।
"कर रहे हो।" डिटेक्टिव गुर्राया ।
"मैं सिर्फ सच बोलने की कोशिश कर रहा ऑफिसर।"
पुलिसियों ने एक-दूसरे की तरफ देखा, फिर उसी ऑफिसर ने पूछा।
"कल रात बारह से तीन बजे तक तुम कहां थे?"
"जहां मैं हर रोज रात को हुआ करता हूं।" देवा ने शांत लहजे में कहा।
"कहां?" ऑफिसर गुर्राया ।
"अपने घर पर---अपने बिस्तर में।"
"इसका सबूत ?"
"मेरी पूरी फैमिली कसम खाकर इस बात की गवाही दे सकती है।"
"यह तुमने कहां से लिया था?” ऑफिसर ने भड़ककर कहते हुए रिवाल्वर देवा की तरफ उठाया था।
यह वही रिवाल्वर था जिससे उसने विनायक राव शेट्टी को गोली मारी थी।
देवा का दिल जैसे उछलकर हलक में आ गया। लेकिन उसने अपना चेहरा शांत ही रखने की कोशिश की थी।
"मैंने इससे पहले यह गन कभी नहीं देखी।" देवा ने जवाब दिया।
देवा ने रिवाल्वर को थामने की या उसे छूने की कोशिश नहीं की थी। दिल ही दिल में उसे अन्दाजा हो रहा था कि स्थिति गम्भीर थी।
देवा को नहीं मालूम था कि पुलिसवाले कहां तक हकीकत से वाकिफ हो चुके हैं। लेकिन उसे यह मालूम था कि पुलिस वाले किसी गैंगस्टर या मुजरिम के कत्ल की तफ्तीश भी उसी सरगर्मी से करते थे। जितनी सरगर्मी से कि वो किसी शरीफ आदमी या किसी नेता के कल्ल की तफ्तीश किया करते थे। ‘वो मुजरिम मरा तो जुर्म कम हुआ' वाली पॉलिसी पर काम नहीं करते थे। क्योंकि कत्ल की पहेली हल नहीं होती थी तो उनका रिकॉर्ड खराब होता था। और कोई भी पुलिसवाला किसी भी सूरत में अपना रिकॉर्ड खराब करना नहीं चाहता। लेकिन देवा भी हर हाल में इस इल्जाम को झुठलाए चले जाने का निश्चय कर चुका था।
उसने रिवाल्वर पर से नजरें हटाकर यथासंभव गरिमा और शालीनता से सिर बुलंद करके अपनी बात दोहराई---
"मैंने यह रिवाल्वर इससे पहले कभी नहीं देखा ।"
चीफ डिटेक्टिव ने अचानक ही उसके मुंह पर उल्टे हाथ का थप्पड़ रसीद किया और फुंकारने के से ढंग से बोला---
"बकवास बंद करो छोकरे, और सच-सच बोलो... कबूल करो। बयान करो।"
"मेरे साथ मारपीट करने की जरूरत नहीं।” देवा गुस्से से बोला। उसकी आंखें जैसे सुलग रही थीं--- “मेरा भाई खुद पुलिस में है और मैं तुम लोगों के हथकण्डों से अच्छी तरह वाकिफ हूं। मुझे मालूम है कि तुम लोग हिरासत में लोगों के साथ क्या करते हो। बेगुनाहों से जैसा जुर्म चाहते हो उसका इकरार करवा लेते हो। लेकिन मैं किसी ऐसे जुर्म का इस तरह इकरार नहीं करूंगा, जो तुम मेरे सिर थोपना चाहते । मैं तुम्हें यह भी बता दूं कि मेरे इस शहर के कुछ बड़े लोगों से अच्छे सम्बन्ध हैं। मेरे साथ ज्यादती करने वाला फायदे में नहीं रहेगा। इसके अलावा... मैं खुद भी इस शहर का एक बड़ा और ताकतवर आदमी बनने जा रहा हूं। उस वक्त मुझे पुराने हिसाब-किताब जरूर याद आयेंगे। इसलिये तुम अगर मेरे साथ अच्छा सलूक करोगे तो हम सबके लिये बेहतर होगा।"
कहकर देवा खामोश हो गया।
उसने इतने ठोस और आत्मविश्वासभरे लहजे में बातें कही थीं कि कुछ क्षण के लिये उस बड़े-से कमरे में सन्नाटा छा गया था। फिर शायद चीफ डिटेक्टिव ने महसूस किया था कि इस खामोशी से उनका कोई अच्छा प्रभाव नहीं पड़ रहा था। ऐसा लगता था जैसे वो तजुर्बेकार पुलिसवाले एक कम उम्र लड़के की बातों के रौब में अए गए हों। उससे प्रभावित हो गए हों।
उसने ताली बजाई और व्यंग्य से बोला---
“भाषण अच्छा झाड़ लेते हो।" फिर उसने अपने साथियों की तरफ देखते हुए कहा--- "आज तक मैंने इस उम्र के किसी उचक्के और लफंगे को इस तरह भाषण देते नहीं सुना। लगता है इसने पहले से रिहर्सल कर रखी है कि इसे यहां आकर क्या बोलना है।" इससे पहले कि देवा कोई जवाब देता, वो दोबारा देवा की तरफ पलट पड़ा था। फिर असल टॉपिक की तरफ आते हुए बोला--- “तुम विनायक शेट्टी की गर्लफ्रेण्ड के साथ घूमने-फिरने लगे थे।"
"उसका तो शहर की आधी लड़कियों के बारे में दावा था कि वो उसकी गर्लफ्रैंड हैं, पता नहीं तुम किसकी बात कर रहे हो?” देवा ने लापरवाही से जवाब दिया।
"मैं आम लड़कियों की नहीं, उसकी एक खास गर्लफ्रैण्ड की बात कर रहा हूं, जिसके साथ उसके काफी दिनों से लगातार सम्बन्ध चल रहे थे। उसे उसकी महबूबा यानि प्रेमिका का ओहदा हासिल था।"
“मैं ऐसी किसी लड़की को नहीं जानता ।"
"तुम अच्छी तरह जानते हो, मैं किस लड़की की बात कर रहा हूँ ।"
"किसकी ?"
ऑफिसर ने कड़ी नजरों से देवा की तरफ देखा, फिर गुर्राया---
"वही कयामत ढाने वाली हसीना जो क्लब में डांस के नाम पर अपने गुदाज बदन का प्रदर्शन करती है। उसका जिस्म गजब का है। जो हर दिल में भूचाल उठाती है।"
“मैं ऐसी किसी लड़की को नहीं जानता।” देवा ने सपाट लहजे में दोहराया।
इस बात पर एक बार फिर चीफ डिटेक्टिव को गुस्सा आना चाहिये था, लेकिन उसने जैसे अक्ल से काम लेने की कोशिश करते हुए कहा---
"मगर हमें अपने विश्वस्त सूत्रों से पता चला है कि तुम दो-तीन दिन से उसके साथ घूम रहे थे। उसके साथ देखे जा रहे थे। उन लोगों को पहले ही अन्देशा था कि इसका नतीजा खतरनाक निकलेगा।" उसने रुककर देवा की आंखों में झांका। फिर बोला--- “शायद वो खतरनाक नतीजा यह होता कि तुम मारे जाते। किसी गली-कूचे में हमें तुम्हारी लाश पड़ी हुई मिलती, लेकिन किसी तरह वो बला उतर गई और तुम्हारे बजाय विनायक शेट्टी खुद मारा गया।”
"इससे यह कहां साबित हो गया कि उसे मैंने मारा है?" देवा बोला--- “अगर तुम्हारी बात को ही मान लिया जाए, तब भी निन्यानवे परसेंट संभावना तो इसी बात की थी कि उसके हाथों मैं मारा जाता। भला विनायक शेट्टी जैसा खूंखार बदमाश और पक्का निशानेबाज मेरे जैसे अनाड़ी के हाथों कैसे मारा जाता?"
"यही बात तो हमें भी उलझन में डाल रही है, क्योंकि ऐसा मुमकिन नहीं लगता।"
चीफ डिटेक्टिव का लहजा अब काफी बदला हुआ था।
अचानक कमरे के बाहर से कुछ तेज-तेज आवाजें सुनाई दीं। दरवाजे पर शायद कोई अर्दली तैनात था जो किसी को अन्दर आने से रोकने की कोशिश कर रहा था। फिर दरवाजा एक झटके के साथ खुला था और एक शख्स अन्दर दाखिल हुआ था। वो शायद अर्दली को एक तरफ धकेलकर अन्दर आया था। वो सफेद बालों वाला एक रौबीला आदमी था, उसकी नाक पर एक सोने के फ्रेम वाला चश्मा टिका हुआ था और उसका काला कोट जाहिर कर रहा था कि वो कोई वकील था---
"मैं अपने क्लाईंट मिस्टर देवा का जमानतनामा लेकर आया हूं।" उसने एक कागज हवा में लहराते हुए रौब से कहा--- "माननीय जज साहब ने हुक्म जारी किया है कि उल्लेखित शख्स को फौरन रिहा कर दिया जाए।"
कई डिटेक्टिव गहरी सांस लेकर रह गए। उनके चेहरों पर पराजय के भाव झलक आए थे। जिस संदिग्ध को उन्होंने अभी थोड़ी देर पहले ही पूछताछ के लिये पकड़ा था। इतनी जल्दी कोर्ट से उसकी जमानत मंजूर हो जाने का मतलब था कि बहरहाल, उसके शहर के कुछ प्रभावशाली लोगों से सम्बन्ध जरूर थे, जैसा कि देवा ने खुद कहा था।
वो इस वकील को भी पहचानते थे। यह एक जाना-माना फौजदारी का वकील था। जो अपने पेशे में बहुत कामयाब था और ज्यादातर वो अण्डरवर्ल्ड के गैंगस्टर लोगों के केस ही लड़ता था।
अन्दरखाने उसे काफी असर का मालिक और जोड़-तोड़ का माहिर समझा जाता था। लेकिन स्पेशल ब्रांच वाले तो देवा को एक मामूली लफंगा और लावारिस समझकर उठा लाए थे। उन्हें नहीं मालूम था कि ज्यों ही वो पूछताछ के लिये पुलिस हैडक्वार्टर पहुंचाया जाएगा, एक कामयाब और शातिर वकील उसका जमानतनामा लेकर आ धमकेगा।
चीफ डिटेक्टिव ने वकील से जमानतमामा लेकर गौर से उसे जांचा। वो कानूनी तौर पर बिल्कुल सही और कम्पलीट था।
अब पुलिस वालों की कानूनी कार्रवाई के तहत देवा को छोड़ देना जरूरी हो गया था।
उनके पास कोई ऐसी शहादत या सबूत नहीं था जिसके आधार पर वो देवा पर बाकायदा चार्ज लगाकर उसे हिरासत में रख सकते। मजबूरन उन्हें कोर्ट के जमानतनामे का सम्मान करना पड़ा।
देवा जाने के लिये उठ खड़ा हुआ। किसी ने उसे रोकने की कोशिश नहीं की। वो वकील के पीछे-पीछे दरवाजे की तरफ जाते हुए बोला---
"तुम लोगों का सलूक मेरे साथ जरा-सा खराब रहा। लेकिन मैं एक उच्च-स्तर का इन्सान हूं। इसका सबूत देते हुए मैं तुम्हें माफ कर रहा हूं। मुझे तुम लोगों से कोई शिकायत नहीं है।" उसका लहजा बहुत खुशगवार था।
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