एक तरफ तो देवा बलराम के खून का प्यासा हो रहा था, दूसरी तरफ उसकी जुर्रत और मानसिक दृढ़ता का भी कायल हो रहा था। जिस रात उसने बलराम और उसकी प्रेमिका को कार में देखा था उसी रात खालिद और उसके दो साथियों ने बलराम पर हमला किया था, जिसमें वो बच गया था। लेकिन क्लब में बलराम बड़े इत्मीनान से अपनी प्रेमिका के साथ डांस और ड्रिंक्स में मस्त दिखाई दिया था। जैसे कभी कुछ हुआ ही न हो।
उसके बाद देवा को जैसे अपने गुस्से और आक्रोश पर काबू ही नहीं रहा था। उसने बलराम गैंग के विरुद्ध ऐसी भयानक कार्रवाईयां शुरू कर दी थीं, जिनके परिणामों की उसे कोई परवाह नहीं थी।
देवा ने उन लोगों के कई गोदाम बमों से उड़वा दिये थे। देवा के कई आदमियों ने बलराम गैंग के कई ट्रक लूट लिये थे जो कई किस्म की शराबों से लदे हुए थे। उन्होंने बलराम के कई सप्लायरों को भी बुरी तरह मारा-पीटा था जो उसे शराब वगैरह के लिये सामान सप्लाई किया करते थे। ऐसे कई लोगों को गोली भी मार दी गई थी। इस तरह उन लोगों को एक चेतावनी दी गई थी जो बलराम के साथ लेन-देन और कारोबार कर रहे थे।
बलराम गैंग के कई अच्छे निशानेबाजों और लड़कों का कत्ल कर दिया गया था और बाकी को धमकियां पहुंचा दी गई थीं कि अगर उन्होंने तुरन्त शहर न छोड़ा, तो उनका हश्र भी ऐसा ही किया जायेगा।
कई ऐसे जुआघर और क्लब जिनके बारे में समझा जाता था कि वो बलराम की सम्पत्ति थे, उन्हें लूट लिया गया था और उनमें खूब तोड़-फोड़ मचाई गई थी। कई मजबूत दीवारों और दरवाजों वाले क्लबों पर बमों द्वारा हमला किया गया था।
इस खूरेजी और खौफनाक अभियान में देवा अपने पूरे साधनों का इस्तेमाल कर रहा था और उसने पूरे शहर में जबर्दस्त दहशत और सनसनी फैला दी थी। उसे यकीन था कि उसने बलराम गैंग के प्यादों के दिलों पर भी अपनी ताकत और साधनों की धाक बिठा दी होगी। इस काम में बाबूराव कामले द्वारा उपलब्ध करवाई गई जानकारियां देवा के बहुत काम आई थीं। अब देवा ने फैसला किया था कि कामले से किया गया वादा पूरा करना चाहिये। उसने बाबूराव कामले को अपने पास बुला लिया था। वही दो आदमी उसे देवा के सामने ले आए थे। उनमें से एक मारियो था।
"बाबूराव !" देवा ने नर्म लहजे में कहा--- "तुम्हारी बताई हुई सारी बातें सही साबित हुई है। यह रही तुम्हारी रकम ।" उसने एक मोटा-सा लिफाफा मेज पर फेंक दिया।
बाबूराव के उतरे हुए चहरे पर थोड़ी चमक आ गई और उसने जल्दी से हाथ बढ़ाकर लिफाफा उठा लिया। उसमें से नोट निकाले और लालची इंसान की तरह नोटों को गिनने लगा। पूरे तीन लाख रुपये थे।
उसने आश्चर्य-मिश्रित अविश्वास से देवा की तरफ देखा । उसके चेहरे पर बेहद आभार झलक आया। उसे शायद जरा भी उम्मीद नहीं थी कि उसके साथ किया गया वादा पूरा किया जाएगा। अण्डरवर्ल्ड में इस किस्म की परम्परा ही नहीं थी। वहां वादा सिर्फ मजबूरी में ही निभाया जाता था।
"बहुत-बहुत धन्यवाद!” कामले कांपते-से स्वर में बोला--- “मुझे उम्मीद नहीं थी कि मेरे साथ किया गया वादा पूरा किया जाएगा।"
"मैं हमेशा अपना वादा पूरा करता हूं। चाहे वो अच्छा हो या बुरा ।" देवा बोला--- “अब जाओ। गुडलक कामले !”
मारियो वहीं उपस्थित था। देवा ने उसे निर्देश दिया कि वो अपनी निगरानी में बाबू कामले को ट्रेन में बिठाकर आए। मारियो अपने साथी समेत कामले को लेकर विदा हो गया।
एक घण्टे बाद मारियो मुंह लटकाए देवा के कमरे में वापस आया था।
"मैं एक बुरी खबर लेकर आया हूं, बॉस!” उसने मुर्दा-सी आवाज में कहा था--- "रेलवे स्टेशन पहुंचने से पहले ही एक गाड़ी ने सामने आकर हमारा रास्ता रोका था और इससे पहले कि हम अपने हथियार निकाल सकते, दो आदमियों ने फायरिंग करके बाबू कामले को मार डाला। पुलिस के पहुंचने से पहले हमें वहां से भागना पड़ गया।"
"अच्छा!” देवा के चेहरे पर चिंता के बादल तैर आए थे--- “लेकिन पुलिस और मीडिया वाले यही समझेंगे कि उसे मैंने मरवाया है। जल्दी से कार वापस लाने की कोशिश करो।"
मारियो सिर हिलाकर विदा हो गया। लेकिन देवा देर तक वहीं बैठा उसके बारे में सोचता रहा था। उसे मालूम था कि मारियो एक बेहद अच्छा गनमैन होने के साथ-साथ बहुत शातिर और लड़ाका तथा चालाक भी था। देवा को काफी हद तक यकीन था कि तीन लाख रुपये के लिये मारियो और उसके साथियों ने ही कामले को ठिकाने लगा दिया था। दूसरे दिन उस वक्त उसके सन्देह की काफी हद तक पुष्टि हो गई, जब उसने देखा कि मारियो अपने लिये नई कार खरीदकर लाया था।
लेकिन देवा के पास इस समय ऐसी बातों के लिये वक्त नहीं था क्योंकि बलराम भी उसकी समस्त कार्रवाईयों को खामोशी से बर्दाश्त नहीं कर रहा था। वो भी पलटवार करने लगा था। दोनों गिरोहों के टकराव से शहर की अमन-शांति भंग होकर रह गई थी। वातावरण में खौफ और भय फैल गया था। मीडिया वाले चीख रहे थे कि बेगुनाहों के जान और माल माफिया वालों की वार की लपेट में आ रहे थे। पुलिस और प्रशासन क्या कर रहा था?
दूसरे दिन उसे जे०सी०पी० कैलाश पंवार का फोन आया था। वो भूमिका के बगैर बोला था---
"सुरेन्द्र पाल, आज दोपहर दो बजे मैं तुमसे मिलना चाहता हूं। प्लाजा होटल के कमरा नम्बर चार में पहुंच जाना। समय का ख्याल रहे।" कैलाश पंवार ने कहकर फोन बंद कर दिया।
दो बजे देवा प्लाजा होटल के सामने जा पहुंचा। उसके बॉडीगार्ड भी दो गाड़ियों में भरे हुए उसके साथ थे।
होटल की इमारत काफी बड़ी थी, वो लोग गाड़ियों में से उतरकर अन्दर प्रवेश कर गए। देवा के बॉडीगार्डों ने उसे अपने घेरे में ले लिया था। जब वो लोग सुईट नम्बर चार में जाने के लिये लिफ्ट द्वारा ऊपर पहुंचे तो राहदारी में उनका स्वागत पुलिस के बारह-तेरह जवानों ने किया था। उन्होंने जल्दी से देवा और उसके बॉडीगार्डों को घेर लिया था और फुर्ती से उन्हें निहत्था करना शुरू कर दिया था। देवा और उसके बॉडीगार्डों को विरोध का मौका ही नहीं मिल सका था।
"हमारे हथियार क्यों छीने जा रहे हैं? सारे हथियार लाईसेंसी हैं।" देवा ने ऊंची आवाज में एतराज जताया था।
"हमें मालूम है, तमाम हथियार लाईसेंसी हैं।" एक पुलिस व्यंग्य से बोला था--- "पर हमें जो हुक्म मिले हैं। हम उनकी तामील कर रहे हैं। साहब का हुक्म है कि आज यहां एक भी गोली चलने की नौबत नहीं आनी चाहिये।"
देवा ने नाक-भौंह भी सिकोड़े थे और थोड़ा गुस्सा भी जताया था। लेकिन पुलिसियों ने उसे जरा-सी सहूलियत नहीं दी थी।
पुलिसियों ने देवा के बॉडीगार्डों को एक कमरे में धकेल दिया था और उन्हें वार्निंग दी थी---
"जब तक तुम्हें इस कमरे से बाहर आने के लिये न कहा जाए, यहां से निकलने की कोशिश न करना, अन्यथा पछताओगे।"
उस कमरे का दरवाजा बन्द कर दिया गया था और बाहर दो स्टेनगनधारी जवानों को तैनात कर दिया गया था। देवा दांत पीसकर रह गया था। वो बेबसी से यह सबकुछ देख रहा था। पुलिसवालों के ऑफिसर ने उसकी तरफ देखकर कहा---
“तुम्हें ज्यादा परेशान होने की जरूरत नहीं है। तुम्हारे दुश्मन के आदमियों के साथ भी ऐसा ही व्यवहार किया गया है।"
फिर उसने देवा को अपने साथ आने का इशारा किया। वो देवा को सुईट नम्बर चार के दरवाजे तक ले गया। उसने दस्तक देकर दरवाजा खोलने के बाद देवा को अन्दर जाने का इशारा किया।
देवा थोड़ा हिचकिचाया तो दो मजबूत पुलिसियों ने उसे लगभग धकेलकर अन्दर भेज दिया। देवा को अन्दाजा हुआ कि उसके पीछे दरवाजा बंद हो गया था।
फिर उसने सामने नजर डाली, तो उसके होश फाख्ता हो गए थे। लम्बे-चौड़े कमरे में एक बड़ी-सी मेज के पीछे छः आदमी बैठे हुए थे और एक कुर्सी खाली थी। वो शायद उसी के लिये थी। मेज के एक सिरे पर जे०सी०पी० कैलाश पंवार अपने तमाम भौंडे और भद्देपन के साथ आला ढंग से विराजमान था। बाकी छः आदमी शहर के खास-खास गिरोहों के सरदार थे। देवा उन सबको पहचानता था। उनमें बलराम भी था।
“आओ, बैठो देवा! ताकि मीटिंग शुरू की जा सके।” कैलाश पंवार ने करखट लहजे में कहा।
देवा यथा-संभव रौब और अकड़ से चलता हुआ आग बढ़ा था और खाली कुर्सी पर जा बैठा था। उसने कहर भरी नजरों से बलराम को घूरा। बलराम के भावों में कोई परिवर्तन नहीं आया था। उसके होठों पर हल्की-सी मुस्कराहट थी। उसने एक नजर देवा के बाजू पर डाली, जो हवा में झूल रहा था।
ज्वॉइंट पुलिस कमिश्नर कैलाश पंवार ने खखारकर गला साफ किया। वो शहर में कानून के रक्षकों का मुखिया था। पूरे पुलिस विभाग पर उसका हुक्म चलता था। सरकार ने उसे भर्ती करके ट्रेनिंग देकर भारी तनख्वाह और भत्ते देकर इसलिये नियुक्त कर रखा था कि वो गुण्डों, बदमाशों, चोरों, स्मगलरों को खत्म करेगा, उनके गिरोहों का खात्मा करेगा। लेकिन वो इस वक्त उनके साथ मीटिंग कर रहा था।
वो सब उसे नियमित रूप से "महीना" भिजवाते थे। हर गैंग लीडर उससे नफरत भी करता था और महीना देने के बावजूद उससे डरता भी था। उन सबको मालूम था कि वो अपनी गर्दन बचाने और अपनी पोजीशन साफ करने के लिये उनकी गर्दनें भी कटवा सकता था। कोई भी कार्रवाई उनके खिलाफ कर सकता था।
"यह जंग अब बन्द हो जानी चाहिये।” पंवार बोला--- “जो तुम लोगों ने शुरू कर रखी है।" साथ ही उसने गुस्से से मेज पर जोरदार घूंसा मारा था--- "मीडिया ने आसमान सिर पर उठा रखा है। यहां तक कि कई बड़े नेताओं को भी शहर की इस स्थिति पर चिंता है। कई रसूख वाले बड़े-बड़े बिजनेसमैनों का एक डेलीगेशन ने मुख्यमंत्री से मुलाकात करके कहा है कि शहर की इस स्थिति की वजह से व्यापार धन्धे तबाह होने की हालत में पहुंच रहे हैं और शहर का नाम पूरी दुनिया में तबाह हो रहा है। डेलीगेशन ने मांग की है कि इस सारे मामले की जांच के लिये एक कमेटी का गठन किया जाए। जिसका अध्यक्ष ऐसा निडर और ईमानदार जज हो जिसे बड़ी से बड़ी रिश्वत देकर भी खरीदा न जा सके। जो किसी से डरे नहीं। किसी के दबाव में न जाए। तुम लोगों को अन्दाजा है कि अगर ऐसा कोई कमीशन या कमेटी बना दी गई, तो उसका परिणाम क्या होगा ?"
वो सब खामोश रहे। लेकिन उन्हें अच्छी तरह मालूम था कि अगर इस तरह की कोई कमेटी या आयोग गठित कर दिया गया, तो उसकी शामत ही आ जाएगी।
फिर कैलाश पंवार ने खासतौर पर देवा और बलराम से सम्बोधित होकर कहा-
"मुझे मालूम है कि शहर की वर्तमान गड़बड़ स्थिति के जिम्मेदार तुम दोनों के गैंग हैं। बाकी गैंग इस काबिल नहीं हैं कि बड़े पैमाने पर खून-खराबा, लूटमार और लड़ाई कर सकें। मैं कहता हूँ तुम सब लोग पहले की तरह खामोशी से अपने काम-धन्धे क्यों नहीं करते। इस शहर में इतनी जान है कि तुम सबको पाल सके। लेकिन कुत्तों की तरह आपस में लड़ते रहने से सबके मुंह का निवाला छिन जाएगा। इसलिये बेहतर यही है कि तुम मेरे सामने जंग बंद करने का वादा करो....सुलह...सफाई से काम करो। जियो और जीने दो के सिद्धांत पर अमल करके जिन्दगी सुख से गुजारो ।"
"क्या तुम्हें इस शख्स से उम्मीद है कि यह अपने वादे पर कायम रहेगा?" बलराम ने जहरभरे लहजे में देवा की तरफ इशारा करते हुए कहा।
"सबसे बड़े वादाखिलाफ तो तुम खुद हो।" जवाब में देवा उसे खूंखार निगाहों से घूरकर बोला।
इससे पहले कि वो दोनों आपस में लड़ने लगते कैलाश पंवार हाथ उठाकर लगभग चिल्लाते हुए बोल उठा---
"शटअप, मेरी बात ध्यान से सुनो... वर्ना मैं तुम दोनों को ही शहर से तड़ीपार कर दूंगा। साल-दो साल के लिये ।”
"इस तरह तुम अच्छी खासी ऊपरी कमाई से हाथ धो बैठोगे।" देवा उसकी तरफ देखकर गुर्राते हुए बोला।
"अपने ओहदे से हाथ धोने से बेहतर है कि मैं उस आमदनी से हाथ धो लूं।” कैलाश पंवार ने गहरी सांस ली।
देवा ने अब खामोश हो जाना ही बेहतर समझा था। लेकिन यह अन्दाजा लगाना मुश्किल नहीं था कि अन्दर ही अन्दर वो गुस्से से खौल रहा था। हकीकत यह थी कि देवा दिल ही दिल में सोच रहा था। कि इस वक्त चुप्पी साध लेना ही बेहतर है। लेकिन वक्त आने पर वो एक-एक करके अपने सारे दुश्मनों को ठिकाने लगा देगा। कोई बड़ी बात नहीं किसी दिन वो इस करप्ट संयुक्तायुक्त पुलिस कैलाश पंवार का पत्ता भी साफ कर दे। इस संसार में कुछ भी असंभव नहीं है।
कैलाश पंवार ने मेज पर शहर का एक विस्तृत नक्शा फैला दिया था। मोटी-मोटी लाईनों के माध्यम से शहर के कई इलाकों को बांट दिया गया था और हर इलाके पर उनमें से किसी एक गैंग लीडर का नाम लिखा हुआ था। वही छः गैंग-लीडर जो उस वक्त उस मीटिंग में मौजूद थे।
"यह मैंने तुम सब लोगों के लिये हदबंदी कर दी है।" कैलाश पंवार ने बात आगे चलाई--- "शहर का बड़ा हिस्सा दोनों बड़े गिरोहों को दिया गया है। छोटे-छोटे गिराहों को छोटे-छोटे इलाके दिये गए हैं। अब सब गिरोहों को अपने-अपने धन्धे अपने-अपने हिस्से में सीमित रखने होंगे। कोई किसी दूसरे के इलाके में पांव फैलाने या कब्जा जमाने की कोशिश नहीं करेगा। इसी में सबका भला है।"
सारे बड़े भाई लोगों ने झुक-झुककर नक्शे का जायजा लिया और मन ही मन उन्हें मानना पड़ा कि करप्ट पुलिस ऑफिसर ने बहुत न्यायप्रियता से सबको उनके इलाके "अलॉट" किये थे। उसने उन सबकी ताकत और हैसियत का ख्याल रखा था। वो सब चाहते तो उसी इलाके में सीमित रहकर अच्छी खासी कमाई कर सकते थे।
मगर वो अपने स्वभाव और अपनी फितरत का क्या करते ? यह बात शायद होश संभालते ही उनकी फितरत में शामिल हो जाती थी कि वो अपना हिस्सा ले-लेने के बाद दूसरे के हिस्से पर झपट्टा मारने की कोशिश जरूर करते थे।
कैलाश पंवार ने बात जारी रखी---
"मैं इस नक्शे की एक-एक कॉपी तुम सब लोगों को दे रहा हूं। तुम सबको इस हदबंदी का पाबन्द रहना है। जो भी इसके खिलाफ जाएगा, मैं उसको शहर से बाहर निकाल दूंगा। चाहे वो कोई भी हो। तुम्हें अपने-अपने आदमियों को यह हदबंदी अच्छी तरह समझानी होगी और यह भी बताना होगा कि इसकी पाबंदी कितनी जरूरी है। तुममें से हर व्यक्ति अपने आदमियों की हरकतों का जिम्मेदार होगा। अगर कोई अपने कारिन्दों की हरकतों को कण्ट्रोल नहीं कर सका तो फिर उसे गैंग लीडर रहने का भी कोई हक नहीं रहेगा। अब शहर में मार-धाड़ नहीं होनी चाहिये। वर्ना मैं तुरन्त और सख्त एक्शन लूंगा। अब तुम लोग जा सकते हो। देवा, तुम अपने आदमियों को लेकर सबसे पहले जाओगे उसके बाद बारी-बारी सब जाएंगे।"
देवा उठ खड़ा हुआ था, उसने एक आखिरी कहर भरी नजर बलराम पर डाली थी और कमरे से निकल आया था।
उसके ख्याल में आज की मीटिंग का सबसे बड़ा फायदा यह हुआ था कि उसने अपने सबसे बड़े दुश्मन बलराम को बहुत पास से देख लिया था। अब वो उसे बहुत दूर से भी पहचान सकता था।
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