देवा उस रात करीना के साथ एक हाई क्लास क्लब ब्लूम्ज में आया हुआ था। दोनों उस वक्त बहुत उम्दा वस्त्रों में थे। और उनकी जोड़ी बेहद जंच रही थी। हॉल में उपस्थित समस्त जोड़ियों में सबसे सुन्दर जोड़ी उन्हीं की थी। दोनों बहुत सभ्य-सुशील और शालीन नजर आ रहे थे। उन्हें देखकर कोई सोच भी नहीं सकता था कि वो दोनों कौन थे और जिन्दगी में क्या-क्या कर चुके थे? उस रात देवा महसूस कर रहा था कि करीना नाईट क्लब की रंगीनियों से ज्यादा आनन्द नहीं उठा रही है। वो देवा के साथ डांस तो कर रही थी, मगर ऐसा लगता था जैसे उसका दिमाग कहीं और ही था। कभी-कभी उसकी अंगुलिया व्याकुलता से हिलने लगती थीं और वो खोजती निगाहों से इधर-उधर देखने लगती थीं। ऐसा लगता था जैसे क्लब में उसे किसी की उपस्थिति की अपेक्षा या आशंका थी, मगर अपेक्षित व्यक्ति उसे वहां कहीं नजर नहीं आ रहा था। देवा आग्रह करके करीना को क्लब में लाया था और अब वो महसूस कर रहा था कि ऐसा करके शायद उसने अच्छा नहीं किया था।

"क्या बात है हनी ?" देवा ने पूछ ही लिया--- “ऐसा लगता है कि यहां तुम्हारा दिल नहीं लग रहा?"

"वो...असल...मेरी तबीयत कुछ ठीक नहीं है।" करीना ने उखड़े-उखड़े-से अन्दाज में जवाब दिया था।

"माहौल में रमने की कोशिश करो, दिल बहल जाएगा।"

नियमित अंतराल से वो डांस करते रहे और रात ढलती रही थी। एक राउंड में वो नाचते-नाचते हॉल के एक सिरे पर पहुंचे तो देवा की निगाह डॉसिंग-फ्लोर से जरा दूर स्थित एक मेज की तरफ चली गई और वो चौंक पड़ा था। उस मेज पर उसे वही लड़की बैठी दिखाई दी थी, जो पत्रकार सोनाली मुखर्जी बनकर उसके ऑफिस में आकर उससे मिली थी। सोनाली के साथ एक सुन्दर पुरुष भी था। उस पुरुष ने बढ़िया किस्म का सूट पहन रखा था। मगर न जाने क्यों देवा को वो उतना शरीफ और इज्जतदार नहीं लगा था जितना कि वो खुद को जाहिर करने की कोशिश कर रहा था। इससे पहले देवा ने उस लड़की और उस व्यक्ति को वहां नहीं देखा था। अब तो सुबह होने वाली थी, न जाने दोनों किस वक्त वहां आ बैठे थे। लड़की ने उसे देखा भी था या नहीं? यह सोचकर देवा ने उस वक्त लड़की के सामने जाना मुनासिब नहीं समझा।

देवा ने अपने साथ लिपटी डांस कर रही करीना का ध्यान लड़की की तरफ आकृष्ट किया और उससे पूछा---

"तुम उस लड़की को जानती हो। वही...जो हरे रंग की पौशाक में है।"

करीना ने तुरंत उस लड़की की तरफ देखा था और देवा ने महसूस किया था कि करीना उस लड़की को देखकर चौंकी थी। मगर अगले ही पल उसने अपने भावों पर काबू पा लिया था और सपाट लहजे में बोली थी---

"नहीं...मैं उस लड़की को नहीं जानती। मगर... तुम क्यों पूछ रहे हो?"

“बस...यों ही।" देवा ने उसे टालने की कोशिश की।

करीना ने उस मेज की तरफ पीठ कर ली थी। देवा ने महसूस किया था कि करीना के शरीर में तनाव आ गया था। फिर कुछ सेकेण्ड बाद करीना बोली---

“बस...अब घर चलो। मुझे अपनी तबीयत बिगड़ती महसूस हो रही है। मैं यहां और नहीं रुकना चाहती।” उसके लहजे में अनुरोध भी था और व्याकुलता भी। देवा ने उससे बहस करना उचित नहीं समझा था और उसकी बात मान ली थी। वो दोनों क्लब से बाहर आ गए। बाहर रात का अंधेरा फैला था। तभी फोन बजा तो देवा ने फोन सुना उधर से कुछ कहा गया, जिसे सुनने के बाद देवा के होंठो से निकला।

"ओह... हे भगवान!"

"क्या हुआ ?" करीना ने घबराकर पूछा।

"उस गधे खालिद ने बलराम को मारने की कोशिश की, मगर असफल रहा।" देवा ने गुस्से से जवाब दिया।

देवा ने बताया कि पिछली शाम बलराम पर हमला किया गया था, लेकिन उसे खरोंच तक नहीं आई थी। पुलिस के पूछने पर बलराम ने बताया था कि उसे अन्दाजा है, उस पर हमला किसने कराया होगा? लेकिन उसने किसी का नाम जुबान पर लाने से इंकार कर दिया था। पुलिस को आशंका थी कि यह हमला किसी नई गैंगवार का आरम्भ हो सकता है।

"उस निकम्मे और खरदिमाग इंसान ने सारा खेल ही बिगाड़ दिया।" देवा गुस्से में था--- "मैंने गलती की, जो उसे इस काम के काबिल समझा। अब बलराम अपनी प्रतिक्रिया प्रकट करेगा। वो पलटकर हम पर हमला करायेगा और खुद इतना सावधान हो जाएगा कि हम मुद्दतों तक उस पर वार करने का मौका नहीं पा सकेंगे।"

"ओह देवा...इस खबर ने तो मुझे परेशान कर दिया है।" करीना ने सहमे हुए से स्वर में कहा--- “अब तुम्हें बेहद सावधान रहना होगा।"

देवा ने कोई जवाब नहीं दिया। वो कार में बैठकर घर की तरफ चल पड़े। रास्ते में भी देवा खामोश ही रहा था, लेकिन उसका चेहरा बता रहा था कि उसके दिमाग में हलचल मची हुई है और वो कोई योजना पका रहा है। जिस बिल्डिंग में उनका अपार्टमेंट था, उसके सामने पहुंचकर देवा ने गाड़ी रोकते हुए करीना से कहा---“तुम ऊपर चलो, मैं गाड़ी पार्क करके आता हूं।” गाड़ी वो किराये की एक गैरेज में खड़ी किया करता था। गैरेज वहां से करीब दो फलांग दूर थी।

करीना गाड़ी से उतरकर बिल्डिंग में प्रवेश कर गई, तो देवा ने गाड़ी आगे बढ़ा दी थी और मोड़ काटा था। उसी दौरान उसे अहसास हुआ कि किसी और गाड़ी के शक्तिशाली इंजन की तेज आवाज उभरी थी और वो गाड़ी उसके पीछे आ रही थी। देवा ने पीछे देखे बगैर ही किसी अनजाने खतरे के अहसास से अपनी कार की गति बढ़ा दी थी। लेकिन इसके उपरांत भी पीछे वाली गाड़ी द्रुत गति से उसके पास आती गई थी।

अब देवा ने जरा-सी गर्दन मोड़कर उसे देख भी लिया था। वो गहरे रंग की एक बड़ी-सी गाड़ी थी और उसकी खिड़कियों पर काले पर्दे फैले हुए थे। इस तरह की गाड़ियां देखने में ही मृत्युदूत-सी नजर आती थीं। तभी देवा ने उस गाड़ी की खिड़की से नारंगी रंग के शोले अपनी गाड़ी की तरफ लपकते देखे। उसके साथ ही तड़तड़ाहट की जोरदार आवाजें उभरी थीं। यह निसन्देह मशीनगन की फायरिंग थी। देवा ने अपनी गाड़ी से गोलियां टकराती महसूस कीं।

देवा की कार की बॉडी मोटी स्टील की थी और शीशे बुलेटप्रूफ थे, गोलियां उनसे टकराकर इधर-उधर बिखर गई थीं। लेकिन उन अज्ञात हमलावरों से इसके उपरांत भी उसका पीछा नहीं छूट सकता था। देवा को मालूम था कि वो जिस मिशन पर आए हैं। उसे पूरा करने की जी-तोड़ कोशिश करेंगे। ऐसी स्थिति में गैरेज की तरफ जाना देवा की नजर में बहुत बड़ी बेवकूफी होती। उसे मालूम था कि दुश्मन उसे घेर-घारकर मारने में कामयाब हो जाएंगे और गैरेज का आदमी उसकी कोई मदद नहीं कर सकेगा। इस वक्त देवा को बचाव की एक ही राह दिखाई दी थी कि उसे किसी भी तरह “अपने इलाके" में पहुंचने की कोशिश करनी चाहिये, जहां उसका "हैडक्वार्टर" था। उसे यकीन था कि दुश्मन वहां तक उसका पीछा करने की जुर्रत नहीं करेंगे। अगर वो वहां तक पहुंच भी जाते तो देवा के आदमी उसकी मदद को पहुंच सकते थे। होटल के नीचे तम्बाकू स्टोर में हर वक्त उसके कुछ आदमी उपस्थिति रहते थे।

इस निर्णय पर पहुंचते ही देवा ने गाड़ी का एक्सीलेटर पूरी ताकत से दबा दिया था। गाड़ी एक झटके से उछलकर तोप से छूटे गोले की तरह तेजी से आगे की तरफ लपकी थी। अब वो जिस रफ्तार से शहर की सड़कों पर से गुजर रहा था, उसकी कल्पना कोई पागल ही कर सकता था। गनीमत थी कि उस वक्त सड़कें लगभग सुनसान पड़ी हुई थीं।

दूसरी गाड़ी निरंतर उसके पीछे लगी रही थी, मगर उस दौरान दोनों गाड़ियों के बीच का फासला बढ़ गया था।

कभी फासला कम हो जाता था, तो पिछली गाड़ी वाले उसे गोलियों के निशाने पर लेने की कोशिश करते थे, मगर देवा अपनी गाड़ी को लहराते हुए उनकी उस कोशिश को असफल बना देता था। तब हमलावरों ने चालाकी दिखाई और उन्होंने देवा की गाड़ी के टायरों को निशाना बनाना शुरू कर दिया। मशीनगन के वर्स्ट के साथ जोरदार धमाके गूंजे थे।

देवा को अन्दाजा हो गया कि उसकी गाड़ी के पिछले दोनों टायर फट चुके हैं। गाड़ी बुरी तरह लहरा गई थी। देवा ने स्टेयरिंग से जूझते हुए गाड़ी को काबू में रखने की कोशिश की, लेकिन जिस समय टायर फटे थे, उस समय उसकी गाड़ी की रफ्तार बहुत ज्यादा थी, गाड़ी बेकाबू होकर फुटपाथ से टकराई और कुछ देर फुटपाथ से रगड़ खाती हुई कुछ दूर जाकर उलट गई थी।

देवा ने अपने आपको सिर के बल गिरते हुए महसूस किया। और फिर उसका दिमाग अन्धेरें में डूबता चला गया।

जब देवा को होश आया था, तो उसने अपने आपको किसी तंग जगह में फंसा हुआ महसूस किया था। वो आड़ा, तिरछा और लगभग औंधा पड़ा हुआ था। उसके नीचे कालीन था और ऐसा लगता था कि वो कुछ लोगों के पैरों में पड़ा हुआ था। उसके शरीर को इधर-उधर झटके भी लग रहे थे।

कुछ मिनट बाद उसकी समझ में आया कि वो किसी कार के पिछले हिस्से में पड़ा हुआ था। कार की पिछली सीट पर दो आदमी बैठे हुए थे और कार तेज रफ्तार से चली जा रही थी। उसे यकीन होने लगा कि वो दुश्मनों की कार में था।

कसमसाता हुआ वो उठ बैठा। पिछली सीट पर वाकई दो आदमी बैठे हुए थे, लेकिन वो अन्धेरे की वजह से उनके चेहरे नहीं देख पाया।

"यह तो बहुत ही बुरी बात है, यह अभी तक मरा नहीं है।" कार के अन्धेरे में एक आवाज उभरी जो देवा के लिये अपरिचित थी।

"मुझे कहां ले जा रहे हो?" देवा ने बेखौफी से पूछा।

"तुम्हें जल्दी ही पता चल जाएगा।" जवाब मिला।

"कम-से-कम मुझे सीट पर तो बैठ लेने दो। मैं यहां बड़ी खराब हालत में फंसा पड़ा हूं।" कहते हुए देवा ने उठने की कोशिश की, तो उसे बेहद कमजोरी का अहसास हुआ और उसे चक्कर-सा आ गया था।

एक आदमी ने उसका गिरेबान पकड़कर एक झटके से उसे उठाया और सीट पर बिठा दिया। अब वो उन दोनों आदमियों के बीच में था । उसने देखा कि अगली सीटों पर भी दो आदमी बैठे हुए थे। उनमें से एक आदमी गाड़ी चला रहा था।

"तुम इस यात्रा का मजा लेने की कोशिश करो लड़के!" किसी ने फुंफकार वाले ढंग से उसके कान में कहा--- "क्योंकि यह तुम्हारी अन्तिम यात्रा है।"

दो क्षण के लिये देवा को अपनी दिल की धड़कनें रुकती हुई महसूस हुईं। उसकी अब तक की जिन्दगी खतरों से खेलते हुए गुजरी थी, लेकिन ऐसी स्थिति से उसका पाला पहली बार पड़ा था।

"मेरा ख्याल है, तुम्हारा सम्बन्ध पूर्वी साईड गैंग से है?" कहते हुए देवा ने पूरी कोशिश की कि उसके लहजे में खौफ प्रकट न हो।

"बिल्कुल ठीक समझे हो तुम।" उसी शख्स ने व्यंग्य से जबाब दिया जो देवा से बात कर रहा था।

“और तुम लोग, हो कौन?" देवा ने पूछा।

"मैं...?" उसने जहरीले अन्दाज में कहा। फिर उसने अजीब-से ढंग में कहकहा लगाया। उसकी हँसी में मौत की आहट साफ सुनाई देती थी। वो क्रूर स्वर में बोला--- “मैं शरद शिरके का भाई हूं।"

देवा के बदन में एक सर्द-सी लहर दौड़ गई थी। शरद शिरके उसके विरोधी गैंग का चीफ था। जिसे देवा ने गनगर्ल करीना के सहयोग से मार डाला था। उसके बाद ही बलराम उस गैंग का लीडर बना था।

इस वक्त शरद शिरके के भाई की दया-दृष्टि पर निर्भर होने का मतलब देवा अच्छी तरह समझ रहा था। गाड़ी बाहरी इलाके में से गुजर रही थीं। देवा को मालूम था कि कोई भी उचित स्थान देखकर उसे गाड़ी से बाहर धकेल दिया जाएगा और फिर उसके शरीर में न जाने कितनी गोलियां उतार दी जाएंगी। उसके बाद शायद कोई राहगीर उसकी लाश को देखेगा या चील-कौवे उसे नोचेंगे।

लेकिन देवा बहरहाल ऐसी भयानक मौत के ख्याल से हथियार डाल देने वालों में से नहीं था। उसने हर हाल में जिन्दगी की लड़ाई लड़ना सीखा था। इस वक्त वो निहायत निडरता, शांति और ठण्डे दिल से सोच रहा था कि इस स्थिति में उसका अगला कदम क्या होना चाहिये? उसकी इसी खूबी ने उसे इस कम उम्र में ही शहर के सबसे बड़े और खतरनाक गैंग का लीडर बनाने में अहम रोल अदा किया था।

आखिर उसने किस्मत आजमाई की एक युक्ति सोच ही ली थी। अगर वो अपनी युक्ति में सक्रियता लाने में सफल हो भी जाता तो भी उसके जिन्दा बच पाने की संभावना एक-दो प्रतिशत ही थी जिन्दगी का दांव खेलने को बेहतर समझ रहा था। कुछ सेकेण्ड वो खामोश और निश्चिंत बैठा रहा फिर उसे सामने वाली साइड से एक कार आती दिखाई दी। देवा ने आंखें सिकोड़कर अपने सामने से आने वाली कार की गति का अन्दाजा लगाने की कोशिश की। और सही समय पर देवा चीते की तरह उछला था फिर उसने कार चलाने वाले की गुद्दी पर प्रचंड घूसा रसीद कर दिया था। इसके साथ ही उसने आगे झुककर स्टेयरिंग व्हील पर गिरफ्त कसने की कोशिश की। कार बुरी तरह लहराई। ड्राइवर के लिये निसन्देह यह हमला कतई अनपेक्षित था। मगर उसने स्टेयरिंग-व्हील नहीं छोड़ा। देवा का एक हाथ भी स्टेयरिंग व्हील पर जम गया था। दूसरे हाथ से वो ड्राइवर का गला दबाने की कोशिश करने लगा।

इस दौरान खुद देवा की कमर पर घूंसे बरसने लगे थे। मगर वो उनकी परवाह किये बगैर अपनी कोशिश में व्यस्त रहा।

फिर कार के पिछले हिस्से में गोली का धमाका गूंजा। देवा को अपने कंधे में ऐसी तकलीफ महसूस हुई जैसे कोई दहकता अंगारा उसके कंधे से रगड़ खाता हुआ गुजर गया हो। उसने दांत भींच लिये थे और कार का स्टेयरिंग घुमाने की कोशिश जारी रखी थी। फिर ऐसा लगा जैसे कार किसी गड्ढे में गिर गई हो। अगले ही क्षण कार जोर से उछली थी। उसके बाद कलाबाजी खाती चली गई और एक जगह वो पहलू के बल टिक गई थी। कार के पहिये अभी तक घूम रहे थे।

देवा उन दोनों आदमियों के ऊपर गिरा था, जो पिछली सीट पर उसके साथ बैठे हुए थे। उसका सिर बुरी तरह चकरा रहा था। उसने सिर को कई झटके दिये थे। उसके शरीर के हर हिस्से में दर्द की लहरें उठ रही थीं। लेकिन गमीनत यह थी कि वो अभी तक होश में था। उसने महसूस किया कि गाड़ी में मौजूद चार आदमियों में से किसी ने हरकत नहीं की थी, न ही उसे कोई आवाज सुनाई दी थी।

देवा की एक बांह बड़े अजीबो-गरीब तरीके से उसके अपने ही शरीर के नीचे दबी हुई थी। उसने उसे खींचने की कोशिश की तो उसके शरीर में दर्द की एक असहनीय लहर दौड़ गई थी। उसने दायें हाथ से निहायत सावधानी से अपने नीचे दबे हुए आदमियों को टटोला। एक आदमी के साईड होलस्टर में उसे रिवॉल्वर मिल गया। उसके बेहोश होने के बाद उसके दृश्मनों ने उसे निहत्था कर दिया था। लेकिन अब उसके पास एक बार फिर गन आ चुकी थी। इस अहसास से जैसे उसके शरीर में नई जिन्दगी की लहर दौड़ गई थी। उसने कांपते हुए गाड़ी में से बाहर निकलने की कोशिश की। उसी दौरान उसने कदमों की आहट सुनी और एक साया-सा पास आते देखा।

"सुनो!" देवा ने उसे पुकारा और उसे बड़ा आश्चर्य हुआ कि उसकी आवाज कांप रही थी--- "जरा मेरी मदद करो और मुझे गाड़ी में से निकालो।"

“जरूर...जरूर।" आने वाले ने कहा जो हाथ में टॉर्च लेकर आया था। यह आदमी उस कार में से उतरकर आया था। जिसे सामने से आते देखकर देवा ने एक्शन में आने का फैसला किया था। उस आदमी ने टॉर्च की रोशनी कार में डाली और फिर देवा के चेहरे पर। वो चीख उठा--- "हे भगवान...! आखिर इस गाड़ी को हुआ क्या था, यह इस बुरी तरह लहरा क्यों गई थी ?"

उस आदमी ने जोर लगाकर कार का पिचका हुआ दरवाजा खोला था और सहारा देकर देवा को कार से बाहर निकाला था।

अगली सीटों पर बैठे दोनों आदमी यकीनन मर चुके थे। उनके चेहरे भी टूटे हुए शीशों से बुरी तरह कट गए थे। पिछली सीट वाले दोनों आदमी शायद जिन्दा थे। वो सिर्फ बेहोश हो गए लगते थे।

"चलो... चलें ।” देवा ने अपनी मदद करने वाले से कहा।

“ल....लेकिन... इन दूसरों का क्या होगा ?" अजनबी ने पूछा।

“भाड़ में जाएं यह...। ये सारे खतरनाक गुण्डे, बदमाश हैं...सब एक बड़े खतरनाक गैंग के आदमी हैं। ये लोग मुझे कत्ल करने के लिये ले जा रहे थे। सब मर गए हों, तो अच्छा है।"

अजनबी की कार की पिछली सीट पर पसरकर देवा ने बलराम गैंग से प्रतिशोध लेने के तरीकों पर सोचना शुरू कर दिया था। लेकिन जल्दी ही उसे पता चल गया था कि उसकी शारीरिक कमजोरी उसकी सोचने की राह में रुकावट बन रही है। उसकी एक बांह का जोड़ उखड़ चुका था और शरीर के दूसरे हिस्सों पर भी चोटें आई थीं। तकलीफ इतनी ज्यादा थी कि उसकी सोचों का आपस में ही कोई सम्पर्क नहीं हो पा रहा था। कंधे में गोली का जख्म भी तकलीफ पहुंचा रहा था। टूटे शीशों की कुछ किरचियां देवा के चेहरे पर भी लगी थीं।

वो अजनबी, जो इस वक्त देवा का मददगार बना हुआ था, शायद देवा से बहुत कुछ पूछना चाहता था। मगर देवा का मूड देखकर उसकी हिम्मत नहीं पड़ रही थी कि वो कुछ पूछे। फिर उसने देवा को उसके हैडक्वार्टर पहुंचा दिया।

गाड़ी से उतरकर देवा ने अपना पर्स निकालकर अपने पैसों का जायजा लिया। इस वक्त भी करीब बीस हजार रुपये नकद मौजूद थे। उसने सारे नोट निकालकर अजनबी की तरफ बढ़ाते हुए कहा---

"तुम्हारे सहयोग का धन्यवाद ! यह लो, कार में पैट्रोल डलवा लेना । लेकिन जुबान बन्द रखना। वर्ना तुम्हारा अंजाम भी इन बदमाशों जैसा होगा।"

हालांकि रात का पिछला पहर था, लेकिन होटल के ग्राऊंड फ्लोर पर मौजूद तम्बाकू-स्टोर में इस वक्त भी देवा के कुछ आदमी मौजूद थे। उसके कारिन्दे उसको उस हालत में देखकर तेजी से उसकी तरफ लपके थे। उनके चेहरों पर हैरत और चिंता थी।

"मेरी कार का एक्सीडेंट हो गया था।" देवा ने उनके कुछ पूछने से पहले ही स्पष्टीकरण दे दिया था। फिर वो लिफ्ट के जरिये होटल के टॉप फ्लोर पर स्थित अपने ऑफिस के कमरे में जा पहुंचा। वहां पहुंचकर उसने तुरन्त उस डॉक्टर को फोन किया, जो इस तरह के एक्सीडेंटों को संभाला करता था।

एक घण्टे बाद उसकी अच्छी तरह मरहम-पट्टी हो चुकी थी और बांह का जोड़ भी ठीक से बिठा दिया गया था। डॉक्टर ने उसे नींद की दवा भी दी थी, वो सोने की उम्मीद में लेट गया। उसे आशंका थी कि वो सो नहीं पाएगा। लेकिन वो सो गया था।

दोपहर बाद उसकी आंख खुली थी, नींद कुछ ज्यादा बढ़िया नहीं आई थी। उसने गार्ड अन्ना की सहायता से अपना हुलिया दुरूस्त किया था। उसके कुछ कपड़े ऑफिस में भी थे। देवा ने कपड़े भी बदल लिये थे। उसके बाद हैवी नाश्ता करने के बाद देवा ने खालिद को बुलाया था। उसने सोचा था कि अब खालिद से जवाब मांग लेना चाहिये। खालिद बड़ी लापरवाही से चलता हुआ देवा के ऑफिस में दाखिल हुआ था। लेकिन उसकी आंखों में चिंता के भाव स्पष्ट झांक रहे थे। वो जैसे लापरवाह नजर आने की एक्टिंग कर रहा था।

"यह सुनकर बड़ा अफसोस हुआ कि तुम्हारी गाड़ी का एक्सीडेंट हो गया है। पुलिस वालों ने फोन करके बताया है कि तुम्हारी कार पूर्वी साईड के इलाके में कहीं बेकार हो गई है। बहुत से लोग तुम्हारा हाल मालूम करने के लिये यहां चक्कर लगा चुके हैं। उन्हें पता चला है कि गाड़ी के टायर गोलियों से बर्स्ट हुए हैं। मैंने उन सबको टाल दिया है।"

"वाकई, तुम मेरे बहुत बड़े मददगार हो।" देवा ने जहरीले लहजे।में कहा। फिर अचानक देवा की आवाज ऊंची हो गई--- “मुझे बताओ, बलराम तुम्हारे हमले से कैसे बच गया?"

“बस...किस्मत ने साथ नहीं दिया।" खालिद ने कंधे उचकाए।

"गोलियां जिस दिशा में चलाई जाएं, उसी दिशा में जाती हैं। क्या किस्मत ने गोलियों की दिशा बदल दी थी?" देवा ने व्यंग्य से पूछा।

“मैंने दो गनमैन अपने साथ लिये थे।" खालिद बताने लगा--- "मुझे पता चला था कि बलराम एक जगह मौजूद है और किस दरवाजे से वहां से निकलेगा। हम तीनों सड़क की दूसरी तरफ कार में बैठकर उसका इंतजार करने लगे थे। जैसे ही वो बाहर आया था, हमने उस पर फायरिंग शुरू करने के लिये गनें निकाल ली थीं। लेकिन उसी वक्त एक कार जाती हुई बीच में आ गई थी। जब तक वो गाड़ी सामने से हटी थी, वो अपनी कार तक पहुंच चुका था। हम लोगों ने उस पर गोलियों की बौछार शुरू कर दी थी और फौरन ही वहां से गाड़ी भगाकर ले गए थे। क्योंकि हम कुछ सेकेण्ड भी वहां और रुकते, तो बलराम के बॉडीगार्ड भी फायरिंग शुरू कर देते और वहां बाकायदा एक बड़ा मुकाबला शुरू हो जाता। उसमें बहुत ज्यादा खतरे थे।"

“तुम...तीनों ने उस पर फायरिंग की... और उसको एक गोली भी नहीं लगी?" देवा ने आश्चर्य से पूछा।

"शायद...ऐसा ही...हुआ। आज सुबह के अखबारों में लिखा है कि इस रहस्यमय हमले में बलराम सुरक्षित रहा है।" खालिद ने कहा।

"मान गए, तुम्हें, तुम बड़े जबर्दस्त निशानची हो।" देवा के लहजे में व्यंग्य का जहर बढ़ गया। फिर वो जैसे अन्दर ही अन्दर तिलमिलाता हुआ बोला--- "मुझे सबसे ज्यादा नफरत उन लोगों से है जो उन्हें सौंपा गया काम पूरा न कर सकें। क्या तुम्हें मालूम नहीं था कि अगर बलराम इस हमले से बच गया, तो उसे फौरन अन्दाजा हो जाएगा कि इस हमले के पीछे किसका हाथ है? फिर वो पूरी ताकत से कार्रवाई करेगा यानि मुझे निशाना बनाने की कोशिश करेगा?"

खालिद ने कोई जवाब नहीं दिया, तो एक-दो क्षण बाद देवा ही बोला---

"सुनो खालिद ! इस गैंग में दो तरह के आदमियों के लिये कोई जगह नहीं है---एक तो वो लोग जो कोई काम नहीं कर सकते। दूसरे वो, जो कोई काम करना नहीं चाहते। मेरा ख्याल है कि तुम्हारी गिनती दोनों किस्म के आदमियों में होती है।"

खालिद का चेहरा गुस्से से लाल हो गया था और आंखों में चिंगारियां-सी सुलगने लगी थीं।

"मैं तुम्हारा... मतलब नहीं समझा।" उसने घुटी-घुटी आवाज में कहा था और होंठ सख्ती से भींच लिये थे।

“अच्छा, क्या वाकई नहीं समझे?" देवा का लहजा कंटीला था और जवाब का इन्तजार करते हुए कहा था--- "तो मैं सीधे ढंग से बात करने की कोशिश करता हूं। इतने सीधे-सादे ढंग से कि तुम जैसा बेवकूफ आदमी भी समझ ले । तुम और तुम्हारे साथ जाने वाले दोनों आदमी इतने नालायक और नकाबिल आदमी थे कि बलराम को कत्ल कर देना, तुम दोनों के बस बात ही नहीं थी या फिर तुम दुश्मन के हाथों बिक गए थे। तुम लोगों ने जान-बूझकर बलराम को निशाना बनाने की कोशिश की ही नहीं थी।"

"लानत है तुम... तुमने यह बात कहने की जुर्रत कैसे कर डाली, छोकरे।” कहते हुए खालिद उठ खड़ा हुआ और उसने बिजली की सी फुर्ती से कोट की जेब की तरफ हाथ बढ़ाया था। लेकिन देवा उसके हिलने से पहले ही मेज पर से अपना रिवॉल्वर उठा चुका था। उसकी नाल का रुख खालिद की तरफ कर चुका था। खालिद का हाथ कोट की जेब तक पहुंचने ही नहीं दिया था।

"कोई बेवकूफी न करना बेवकूफ गधे कहीं के।" देवा फुंफकारा--- "मेरी सिर्फ बाई बांह का जोड़ उखड़ा था, दायां हाथ बिल्कुल ठीक है। आईन्दा मेरे सामने गन की तरफ हाथ ले जाने की कोशिश न करना, भूनकर रख दूंगा।"

खालिद ने गन निकालने का इरादा कैंसिल कर दिया और मेज पर से सिगरेट का पैकेट और लाईटर उठाकर सिगरेट सुलगाने लगा था।

"जब से अफजल गया है और मुझे उत्तराधिकारी बनाकर गया है, तब से मैं महसूस कर रहा हूं कि तुम्हारे दिल में एक आग सी भड़क रही है।" देवा बोला--- "शायद तुम खुद यह कुर्सी प्राप्त करना चाहते थे और तुम उन बदमाशों में से हो, जो मनचाही चीज प्राप्त करने के लिये बुरे से बुरा तरीका अपना सकते हैं। अगर मैं मर जाता, तो तुम्हारा रास्ता साफ हो जाता। इसका बेहतरीन तरीका यही था कि तुम बलराम पर नाकाम हमला करते, जिसके जवाब में वो तो मेरी मौत का सामान कर देता। ऐसा ही हुआ भी...लेकिन...तुम देख रहे हो कि मैं तुम्हारे सामने जिन्दा बैठा हुआ हूं। मेरी कोशिश यही होगी कि मैं काफी अर्से तक जिन्दा ही रहूं। तुम मेरे मरने की उम्मीद पर जिन्दा रहना छोड़ दो।" फिर देवा के लहजे में बला की क्रूरता आ गई--- “तुम और तुम्हारे साथ जाने वाले दोनों आदमी अभी से इस गैंग से, देवा गैंग से अलग समझो। मैं तुम तीनों को गैंग से निकाल रहा हूं।"

“फिजूल बातें मत करो।” खालिद गुस्सैले लहजे में बोला--- “तुम अफजल से पूछे बगैर मुझे गैंग से बाहर नहीं निकाल सकते।”

"अफजल जा चुका है और वो मुझे बॉस बनाकर गया था। सारे अधिकार सौंपकर गया था और मैं अपने अधिकारों का प्रयोग कर रहा हूं। अधिकार प्रयोग करने की मेरे पास अपनी ताकत भी है और वो यह है ।" देवा ने रिवॉल्वर को एक बार फिर हल्का-सा लहराया--- “आज के बाद तुम्हें इस गैंग से कोई पैसा नहीं मिलेगा। इसके बाद अगर तुम यहां नजर आए, तो इसे अपने लिये मौत का पैगाम समझना। तुम चाहो तो यहां से अपने पैरों पर चलकर भी जा सकते हो, चाहो तो यहां से तुम्हारी लाश भी जा सकती है। दोनों में से तुम्हें जो स्थिति पसन्द हो, चुन लेना।"

खालिद कहर भरी नजरों से देवा की तरफ देखता रहा था, देवा भी पलकें झपकाए बगैर उसे घूरता रहा था। आखिरकार खालिद को देवा के चेहरे से नजरें हटानी पड़ी थीं। वो मुड़ा था और लम्बे-लम्बे डग भरता कमरे से निकल गया था।

देवा ने गहरी सांस ली। फिलहाल तो उसे ऐसा ही लग रहा था कि उसे इस सिरदर्दी से हमेशा के लिये छुटकारा मिल गया था। उसके बाद देवा ने अपने लिये कुछ नए बॉडीगार्डों का इन्तजाम किया था और सुरक्षा इन्तजाम पुख्ता कर लिये थे।

उस दिन देवा घर पहुंचा था, तो उसकी आंख गुस्से से सुलग रही थीं। वो करीना से बहुत कुछ पूछना चाहता था। उसके दिमाग में कुछ सन्देह सिर उठा रहे थे। करीना आराम से बैठी एक उपन्यास पढ़ रही थी और चॉकलेट चबा रही थी। देवा का हुलिया देखकर वो बुरी तरह चौंक उठी थी।

"यह क्या हुआ देवा, सब कुशल तो है?"

"तुम्हें, वाकई मेरी बड़ी फिक्र है? तभी तुम्हें अब चिंता प्रकट करने की याद आई है।" देवा ने जहरीले स्वर में कहा--- "तुम्हें गाड़ी से उतारकर मैं जरा घर से दूर गैरेज में गाड़ी खड़ी करने गया था और मैं दूसरे दिन वापस आया हूं...मगर तुम इस तरह आराम से बैठी हो जैसे कुछ हुआ ही नहीं हो। अब मुझे देखकर तुमने परेशानी प्रकट करनी शुरू कर दी है?"

"शायद तुम्हें नहीं मालूम कि इस बात से मैं कितनी परेशानी थी देवा! लेकिन तुम्हें मेरा अपनी टोह में रहना थोड़ा बुरा न लगे, इसलिये मैं खामोश बैठ गई थी।" करीना ने स्पष्टीकरण दिया।

“बलराम के गैंग के लोगों ने मुझे पिछली रात मौत की यात्रा पर ले जाने की कोशिश की थी और मेरा ख्याल है...तुम्हें यह बात पहले से मालूम थी करीना।” देवा ने उसे घूरते हुए कहा था।

“मुझे...नहीं मालूम।”

"तुम्हें सब कुछ मालूम है।” देवा ने उसके पास आकर उसकी कलाई अपनी मजबूत पकड़ में लेकर मरोड़ते हुए कहा--- "उसकी तरफ मैंने तुम्हारा ध्यान आकर्षित किया था और यह अन्दाजा लगाया था कि तुम उसे जानती हो । बताओ... कौन थी वो....?"

तकलीफ से करीना की सांसें तेज-तेज चलने लगी थीं। उसे जुबान खोलनी ही पड़ी, वो हांफते हुए बोली---

"वो भी मेरी तरह एक गनगर्ल है... और बलराम की प्रेमिका है ।"

“ओह....!” देवा ने गहरी सांस ली और करीना की कलाई छोड़ दी थी। फिर वो उसे घूरते हुए सोचपूर्ण मुद्रा में सिर हिलाकर बोला--- “इसका मतलब है, उसके साथ जो आदमी होगा, वही बलराम होगा ?” देवा ने आज तक बलराम का नाम ही सुना था, वो बलराम को पहचानता न था।

"हां।" करीना ने उसके अनुमान की पुष्टि कर दी।

"हे भगवान... काश मुझे उस समय यह बात मालूम होती, जब वो मेरे सामने थे।" देवा ने पछताते हुए कहा--- "तुम्हें यह बात मालूम थी, मगर तुमने मुझे बताया नहीं।"

"मैंने इसलिये नहीं बताया कि क्योंकि मुझे मालूम है कि तुम्हारा गुस्सा कितना खतरनाक है, तुम्हें अपने गुस्से पर कण्ट्रोल नहीं है। अगर तुम्हें मालूम हो जाता कि वो कौन है, तो तुम उसी वक्त उसे मार डालने की कोशिश करते। तब संभव था कि तुम खुद उसके बॉडीगार्डों के हाथों मारे जाते। उसके बॉडीगार्ड उसके आसपास ही कहीं होते हैं। अगर तुम उसके हाथों से बच भी जाते, तब भी रंगे हाथों गिरफ्तार हो जाते। फिर फांसी पर जा चढ़ते ।"

“ऐसी भी बात नहीं है।" देवा इस बार थोड़े नर्म लहजे में बोला था--- "इस शहर में किसकी हिम्मत है जो मुझ पर कोई जुर्म साबित कर सके।"

“इतने विश्वास से मत कहो।" करीना बोली--- “नाजायज धन्धों की बात और है। लेकिन कत्ल एक अत्यंत गम्भीर अपराध माना जाता है।"

देवा कुछ देर खामोश रहा, फिर बोला---

"तुमने उन दोनों को देखकर फौरन ही वहां से निकलने की कोशिश क्यों की थी ?"

"मुझे उनकी तरफ से भी डर था कि तुम्हें देखकर वो भी कोई गलत हरकत की कोशिश न कर बैठें। मैंने उन लोगों की नजरों से दूर हो जाना बेहतर समझा था।"

"हूं।" देवा सोचते हुए हुंकार भरकर बोला--- “लगता है, मेरी जान से ज्यादा तुम्हें अपनी जान की फिक्र थी।"

"अपनी जान की फिक्र करना भी कोई ऐसी बुरी बात नहीं होती।” करीना का आत्मविश्वास अब लौट आया था--- "और तुम यकीन करो या न करो मुझे तुम्हारी भी फिक्र थी। याद है कि मैंने ही तुम्हें बॉडीगार्ड का बन्दोबस्त करने के लिये कहा था।"

देवा को मन ही मन स्वीकार करना पड़ा था कि करीना की बातों में कहीं-न-कहीं सच्चाई जरूर थी। बॉडीगार्डो के लिये तो वो हफ्ते भर से कह रही थी। देवा इस ख्याल से टालता रहा था कि अगर वो खुद बॉडीगार्ड रखेगा तो यह उसकी बुजदिली समझी जाएगी। माना जाएगा कि वो खुद अपनी जान की हिफाजल करने के काबिल नहीं रहा।

“देवा... मुझे तुमसे प्यार है और मैंने हमेशा तुम्हारी भलाई ही सोची है।" करीना ने भावुक स्वर में कहा।

"लेकिन मुझे तुम्हारी निष्ठा पर सन्देह हो चुका है।" देवा ने साफगोई से काम लिया। एक-दो पल की खामोशी के बाद वो बोला--- "अगर तुम मेरे साथ इतनी ही सच्ची और निष्ठावान हो, तो मैं तुम्हें यह सिद्ध करने का एक मौका देता हूं। तुम बलराम को कल्ल कर दो। मुझे तुम्हारी निष्ठा पर यकीन आ जाएगा।"

करीना फटी-फटी आंखों से देवा की तरफ देखने लगी थी।

“बस..! हिम्मत जवाब दे गई ?” देवा मजाक उड़ाने वाले ढंग से बोला ।

“मैं बुजदिल नहीं हूं।” करीना भड़क उठी--- "मैं भी...तुम्हारे जितनी ही दिलेर हूं। मैं तो हैरान हूं कि तुम पर ऐसा वक्त आ गया है कि अपने सबसे बड़े प्रतिद्वन्द्वी और शहर के दूसरे सबसे बड़े गैंग के लीडर को खत्म करने की फरमाईश तुम एक लड़की से कर रहे हो। तुम्हें मालूम है कि मैंने आज तक किसी को कत्ल नहीं किया है। सिर्फ कत्ल करने के लिये मदद की है। मैं अब भी बलराम के कत्ल में तुम्हारी मदद करूंगी। अब मैं खबर रखूंगी कि उसे किस वक्त और कहां निशाना बनाया जा सकता है? फिर मैं तुम्हें बुलाऊंगी और हम दोनों मिलकर यह काम करेंगे।"

“ठीक है।" देवा ठण्डा पड़ गया वो अब नर्मी से उसकी नर्म, नाजुक बांह थामकर बोला--- “लेकिन एक बात याद रखना कि अगर कभी तुमने मुझे धोखा देने की कोशिश की या मेरी मुखबरी करने की कोशिश की, तो वो दिन तुम्हारी जिन्दगी का आखिरी दिन होगा।" देवा को अब न जाने क्यों करीना पर पहले जैसा भरोसा नहीं रहा था। उसे करीना पर सन्देह हो गया था। उनके सम्बन्धों में भी दरार-सी आ गई थी।