जिस ट्रक को ड्राइव करने की देवा की ड्यूटी लगी थी वो अफजल सुल्तान के हुकूमत वाले इलाकों में उसके द्वारा तैयार की गई नाजायज शराब सप्लाई किया करता था।
शहर के बाहरी इलाकों में कई जगह अफजल की शराब खींचने की कई भट्ठियां भी लगी हुई थीं और एक जगह अच्छी व्हिस्की तैयार करने का प्लांट भी था। मजे की बात यह थी कि कोई भी पुलिस ऑफिसर अफजल सुल्तान को परेशान नहीं करता था, न ही प्रशासनिक स्टाफ उसे तंग करता था। सबके महीने बंधे हुए थे। अफजल को खतरा सिर्फ हाईजैकर्स की तरफ से रहता था। वो माल से लदे ट्रकों को रास्ते में रोककर लूट लिया करते थे।
हाईजैर्क्स ड्राइवर को जरा धमकाकर मारपीटकर या गन दिखाकर कहीं फेंक-फूंक देते थे। ट्रक को कहीं ले जाते थे, एकाध दिन बाद खाली ट्रक कहीं खड़ा मिल जाता था। देवा का असली काम उन लुटेरों से 'माल' को बचाना था।
इस बारे में देवा ने अफजल से यही कहा था कि अब उसे इस सिलसिले में फिक्र करने की कोई जरूरत नहीं थी ।
देवा एक गन ट्रक में और दूसरी अपने पास रखता था। अभी तक उसका लुटेरों से वास्ता नहीं पड़ा, लेकिन उनका उसे ख्याल आता तो उसके दांत भिंच जाते थे। देवा के जेहन में एक आईडिया आया। उसने देखा था कि माल से भरे ट्रक इसलिये भी आसानी से लूट लिये जाते थे क्योंकि माल तो सुरक्षित होता था, लेकिन जिस हिस्से में ड्राइवर बैठता था, वो हिस्सा सुरक्षित नहीं होता था। माल लोहे की एक बन्द बोगी जैसे कन्टेनर में होता था। जिसके दरवाजे पर मोटे मजबूत बोल्ट में ताला लगा हुआ होता था। लेकिन जिस हिस्से में ड्राइवर बैठता था और जिसे 'कैब' कहा जाता था वो ट्रकों का परम्परागत आम-सा हिस्सा ही होता था । उसका दरवाजा आसानी से खुल जाता था और आम शीश वाली खिड़कियां भी सुरक्षित नहीं थीं।
देवा ने अफजल के सामने प्रस्ताव रखा था कि ट्रकों की बनावट में कुछ तब्दीलियां की जाएं। उनके कैब पूरी तरह बुलेटप्रूफ किये जाएं। उनमें शीशे का इस्तेमाल कम और फौलादी चादर का इस्तेमाल ज्यादा किया जाए। ड्राइविंग के लिये कम-से-कम जितने भी शीशे की जरूरत हो, वो भी बुलेटप्रूफ लगाया जाए। इस तरह थोड़ा-सा खर्चा करके आईन्दा बड़े नुकसानों से बचा जा सकता था।
“बहुत खूब...।” अफजल ने उसका सुझाव सुनते ही बुलन्द आवाज में कहा। उसके लहजे में प्रशंसा थी---खुशी थी। देवा को हैरत थी कि इतनी मामूली-सी बात भी इतने बड़े गैंग लीडर के दिमाग में पहले क्यों नहीं आई थी? अफजल बात जारी रखते हुए बोला--- "मैं अभी इन बार्तों पर अमल का हुक्म देता हूं और हां, इस बढ़िया सलाह के लिये तुम्हें बोनस जरूर मिलना चाहिये।" उसने मेज की दराज में से सौ रुपयों के नोटों की एक गड्डी निकालकर देवा की तरफ बढ़ाई और मुस्कराकर बोला--- “मेरा ख्याल है, तुमने काफी दिन ट्रक चला लिया है। तुम आज रात नौ बजे मेरे पास आओ। मैं तुम्हारे जिम्मे एक और काम लगाना चाहता हूं।"
देवा निहायत जिम्मेदारी का प्रदर्शन करते हुए रात को ठीक नौ बजे अफजल सुल्तान के पास पहुंच गया। वो काफी खुश था। उसे उम्मीद थी कि उसे गैंग में आगे बढ़ने का रास्ता मिलने वाला है।
“पूरवी इलाके का गैंग हमारे इलाके में दखलअन्दाजी कर रहा है।" अफजल ने बात शुरू की--- "वो ज्यादा कमीशन का लालच देकर मेरे ग्राहकों को माल सप्लाई करने की कोशिश कर रहे हैं। मैं बड़े पैमाने पर लड़ाई-झगड़ा, खून-खराबा नहीं चाहता। मैं इन सबसे बचने की कोशिश करूंगा। लड़ाई-झगड़ा, खून-खराबा मैं उसी सूरत में चाहूंगा जब इसके सिवा कोई चारा ही न रहे। लेकिन मैं चाहता हूं कि उसकी नौबत न आए। यह करना है कि मेरे इलाके में शराब बेचने वालों में किसी तरह खौफ की लहर दौड़ा दी जाए कि अगर उन्होंने उन लोगों का माल खरीदने की जुर्रत की तो अंजाम क्या होगा। मैं तुम्हें बताता हूं कि तुम्हें क्या और कैसे करना है।"
देवा बड़े शांत भाव से उसकी हिदायतें सुनने लगा।
कुछ देर बाद वो अफजल के ऑफिस से निकला था तो उसकी जेबें काफी फूली हुई नजर आ रही थीं। पन्द्रह मिनट बाद देवा एक बार में पहुंचा, जो वहां से ज्यादा दूर नहीं थी, वो छोटे इलाके का बार था। जहां ज्यादातर निचले तबके के लोग, मजदूर वगैरह आते थे।
देवा ने काउंटर के सामने बैठकर एक ड्रिंक ली और उसका बिल चुका दिया। फिर वो लापरवाही से चलता हुआ काउंटर के एक सिरे तक पहुंचा, जहां से वो बारटेण्डर पर भी नजर रख सकता था और बार में बैठे हुए तमाम लोगों पर भी। यहां अगर वो गन निकालकर खड़ा हो जाता, तो पूरे बार को कवर कर सकता था। इस वक्त जो शख्स बारटेण्डर का काम कर रहा था, वो खुद ही इस बार का मालिक भी था।
इस वक्त बार में उसके समेत करीब चालीस ग्राहक मौजूद थे। वो सभी इस किस्म के लोग थे जो इस तरह के निचले दर्जे के बॉर में पाए जा सकते थे।
देवा ने लापरवाही से सिगरेट सुलगाकर होंठों में दबा ली।
फिर अचानक उसने बिजली की सी तेजी के साथ दो रिवाल्वर निकाल लिये। एक का रुख बारटेण्डर की तरफ और दूसरे का ग्राहकों की तरफ था। उस रिवाल्वर को वो धीरे-धीरे इधर-उधर घुमाता भी जा रहा था।
"सब लोग काउंटर पर आएं और अपने लिये एक-एक ड्रिंक लेकर दोबारा अपनी मेजों पर जा बैठें।" देवा ने ऊंची आवाज में कहा--- "किसी को पैसे देने की जरूरत नहीं है। ड्रिंक्स मेरी तरफ से होगी। आराम से आते जाईये।"
पहले तो वो सब हैरत से उसकी तरफ देखते रहे थे। फिर रिवाल्वरों को देखकर कुछ खौफ में नजर आए थे। लेकिन फिर वो देवा के हुक्म की तामील में बारी-बारी काउंटर पर आने लगे थे। बारटेण्डर तेजी से ड्रिंक्स तैयार कर-करके उन्हें देने लगा था। कभी-कभी उसकी खौफभरी नजरें उस रिवाल्वर की तरफ भी उठ जाती थीं, जिसका रुख उसकी तरफ था।
लोग जब एक-एक ड्रिंक खत्म कर चुके, तो देवा ने उन्हें दूसरी, फिर तीसरी और उसके बाद चौथी ड्रिंक की भी दावत दी। व्हिस्की, जिन, वाईन, बियर सब ड्रिंक को लोग धड़ा-धड़ गले से उतारे जा रहे थे। हर एक अब बेधड़क अपनी पसन्द की ड्रिंक ले रहा था। यह उन सबकी जिन्दगी का पहला तजुर्बा था कि उन्हें जबर्दस्ती मुफ्त की दारू पिलाई जा रही थी। जल्दी ही बॉर में मौजूद तमाम स्टॉक खत्म हो गया। तब देवा ने रिवाल्वर लहराकर बारटेण्डर को करीब आने का इशारा किया। जब बारटेण्डर करीब पहुंचा तो देवा ने पैसा देने के बजाय उसकी तरफ झुकते हुए नीची आवाज में कहा---
"इस बार तो बॉर सिर्फ शराब से खाली हुआ है, अगर आईन्दा तुमने पूरब वालों की किसी पार्टी ये माल खरीदा तो ग्राहकों से भी खाली हो जाएगा। तब ये रिवाल्वर गोलियां भी उगलेंगी। समझ गए मेरी बात...?"
बारटेण्डर खामोशी से उसकी तरफ देखता रहा। उसकी आंखों में खौफ था।
देवा ने अब कुछ नर्म और समझाने वाले लहजे में कहा--- “तुमने जब बॉर खोला था तो अफजल सुल्तान से माल लेना शुरू किया था। तब से लेकर अब तक तुम उसी से माल लेते आ रहे थे और तुम्हारे बॉर ने उस दौरान काफी तरक्की भी की थी। इन्सान को इतनी जल्दी वफादारियां नहीं बदलनी चाहियें। पुराने सम्बन्ध इस तरह नहीं तोड़ने चाहिये। मामले जिस तरह चल रहे थे, उसी तरह चलते रहने दो। इसी में तुम्हारा भला है। तुम्हारे कारोबार का भला है। गुड नाईट!" कहता हुआ देवा बाहर निकला और दोनों रिवाल्वर जेबों में डालता हुआ एक पतली गली की तरफ तेज-तेज कदमों से बढ़ता चला गया। अन्धेरे में गली पार करके वो तेजी से काफी दूर निकल गया। फिर उसने हाथ देकर एक टैक्सी रोकी और उसमें बैठकर रवाना हो गया। कोई अगर उसके पीछे बार से निकला भी होगा तो वो नहीं बता सकता था कि वो अजीबो-गरीब नौजवान कहां से आया था और कहां चला गया था?
अगले दिन अफजल ने देवा की रिपोर्ट सुनने के बाद खुश होकर कहा था---
“तुमने बहुत उम्दा काम दिखाया देवा। तुमने खूब मजाक किया कि बारटेण्डर से कह दिया कि सारी ड्रिंक्स का बिल तुम अदा करोगे।” अफजल सुल्तान ने जोरदार कहकहा लगाया।
मगर देवा उसकी प्रशंसा पर खुश होने के बजाय आंख सिकोड़कर बोला---
"यह बात तो मैंने तुम्हें बताई ही नहीं थी ?"
"लेकिन...मुझे मालूम हो चुकी है।" अफजल इत्मीनान से बोला--- "क्योंकि बार में मेरे दो आदमी पहले से मौजूद थे। उन्हें मैंने सावधानी के तौर पर भेज दिया था कि शायद तुम्हें किसी किस्म की मदद की जरूरत पड़े।"
देवा इस स्पष्टीकरण से बेवकूफ बनने वाला नहीं था। वो समझ गया कि उन दो आदमियों को अफजल ने इसलिये भेजा था कि वो उस पर नजर रखें। यह देखें कि काफी लोगों की मौजूदगी में वो किस तरह अपना काम करता है। वापस आकर खामखाह अपने काम को बढ़ा-चढ़ाकर तो पेश नहीं करता। देवा को दिल ही दिल में मानना पड़ा कि अफजल सुल्तान उससे ज्यादा होशियार था जितना कि वो उसे समझता था।
"तुमने अपना काम बहुत उम्दा तरीके से अंजाम दिया सुरेन्द्र पाल ।” अफजल ने संजीदा होते हुए कहा--- “जल्दी ही मैं तुम्हें इसी तरह के कुछ और छोटे-मोटे काम बताऊंगा। और हां, आज से तुम्हारी तनख्वाह दस हजार रुपये हफ्ता होगी।" आईन्दा के लिये यह काम स्थाई रूप से अफजल ने सुरेन्द्र पाल (देवराज चौहान) को ही सौंप दिया था। उन शराबखानों के मालिक, जो अब तक अफजल सुल्तान का माल खरीदते रहे थे, उनकी वफादारी को बनाए रखने के लिये बीच-बीच में कुछ कदम उठाते रहने का काम जो लोग दूसरों से माल खरीदने की तरफ ध्यान दे रहे थे, उन्हें सीधा करते रहना।
यह एक खतरनाक काम था, लेकिन देवा को इस किस्म के खतरे बहुत पसन्द थे। वो बड़ी कामयाबी से यह जिम्मेदारी निभा रहा था। एक दिन वो अपने इसी किस्म के दौरे पर निकला हुआ था और एक फुटपाथ पर जा रहा था कि एक कार ब्रेकों की तेज आवाज के साथ उससे कुछ कदम आगे जाकर रुक गई।
अपनी छठी इन्द्री के खबरदार करने पर देवा भी रुक गया।
“ऐ... इधर आ ।” किसी ने गुर्राते हुए पुकारा था। आवाज में धमकी का पुट था।
देवा ने देखा, कार में चार आदमी थे, जो अपनी शक्लों और हुलियों से ही छंटे हुए बदमाश नजर आ रहे थे। गाड़ी की खिड़की में से एक गन झांक रही थी। वो इस किस्म की गन थी जिसकी नाल और दस्ते को काटकर छोटा कर लिया जाता है। गन का रुख देवा की तरफ ही था।
दो क्षण के लिये देवा ने खुद को चूहेदान में फंसा हुआ महसूस किया था। उसे यों लगा था जैसे उसका आखिरी वक्त आन पहुंचा हो। देवा को खुद पर अफसोस हुआ कि क्या उसकी मौत इतनी जल्दी और इस किस्म के घटिया बदमाशों के हाथों लिखी हुई थी? अगर वो गन निकालने की कोशिश करता तब भी यकीनन मारा जाता। अगर भागने की कोशिश करता तब भी ज्यादा संभावना मरने की ही थी। इसलिये देवा ने यही बेहतर समझा कि उनके निर्देश कापालन किया जाए। इसके सिवा कोई चारा भी नहीं था। वो कार के करीब पहुंच गया।
"क्या बात है ?” उसने यथासंभव निडरता से पूछा।
"जो कुछ तुमसे कहा जा रहा है, उसे कान खोलकर सुन लो।" एक बदमाश गुर्राया । वो उनका लीडर लग रहा था। उसकी नाक चपटी और कुछ टेढ़ी-सी थी। आंखें छोटी-छोटी और बटनों जैसी थीं। लेकिन उनमें गजब की क्रूरता थी--- "तुम शराबखानों में जाकर पूर्व साईड वालों का कारोबार खराब करने की कोशिश कर रहे हो। बार-मालिकों को डरा-धमकाकर हमारा माल खरीदने से रोकने की कोशिश कर रहे हो। उन्हें जबर्दस्ती हमसे तोड़कर अफजल सुल्तान का माल खरीदने पर मजबूर कर रहे हो। ये हरकतें फौरन बंद कर दो। फिलहाल हम तुम्हें सिर्फ वार्निंग दे रहे हैं, अगर इस पर भी तुमने अक्लमंदी से काम नहीं लिया, तो हम तुम्हें गाड़ी में डालकर लम्बी सैर के लिये ले जाएंगे...जिन्दगी की आखिरी सैर के लिये...।"
उसके बाद वो गाड़ी तेजी से आगे बढ़ गई थी।
देवा अपनी जगह स्तब्ध-सा खड़ा जाती हुई कार को तब तक देखता रह गया था, जब तक कि कार नजरों से ओझल न हो गई।
'सैर' के लिये ले जाना अण्डरवर्ल्ड का एक खौफनाक कोड था, जिसकी कल्पना से बड़े-बड़े शेरदिल भी कांप जाते थे। लम्बी सैर पर ले जाए जाने वाले की लाश अक्सर किसी वीरान और दूर-दराज के इलाके में पाई जाती थी।
लेकिन...मरने से पहले उस पर क्या गुजरी थी, यह अन्दाजा लगाने वालों के रोंगटे खड़े कर दिया करता था।
"किसी लाश के नाक, कान और अन्य अंग गायब होते थे। किसी की तमाम हड्डियां टूटी होती थीं। इन लाशों को देखकर यह अन्दाजा लगाना मुश्किल नहीं होता था कि मरने वालों को मरने से पहले कितनी यातनाएं बर्दाश्त करनी पड़ी होंगी। न जाने कितनी बार उन्होंने मौत की दुआएं मांगी होंगी, तब कहीं जाकर किसी गोली ने उनका खात्मा किया होगा। आखिरी सांस ने उनके मुंह से निकलकर जैसे उन पर अहसान ही किया होगा।
माफियाओं का किसी को इस तरह मार देना, अपने इन्तकाम लेने से भी ज्यादा दूसरों को वार्निंग देने का बड़ा प्रभावशाली तरीका था। मगर यह देवा की फितरत के खिलाफ था कि वो इस किस्म की धमकियों से खौफ खाकर अपनी सरगर्मियां छोड़ देता। अफजल ने देवा के सुपुर्द जो काम किया था, उसने वो जारी रखा। अलबत्ता, अब उसने अपने पास एक और गन रखनी शुरू कर दी थी।
इसके अलावा उसने पहले की तरह ही अपने साथ अपना एक बॉडीगार्ड रख लिया था। वो देवा के साथ नहीं रहता था बल्कि थोड़ा फासला रखकर देवा पर नजर रखता था कि दूसरों को इसका अहसास तक न हो सके।
देवा ने बहुत ज्यादा सावधानी भी बरतनी शुरू कर दी थी। वो आसपास के माहौल पर कड़ी नजर रखने लगा था।
एक दिन तीसरे पहर के करीब देवा को अफजल सुल्तान का मैसेज मिला कि सुरेन्द्र पाल फौरन उसके ऑफिस में पहुंचे।
देवा जब वहां पहुंचा तो उसने अफजल सुल्तान को अपनी बिलियर्ड टेबल जैसी मेज के पीछे अपनी ऊंची पुश्त वाली रिवाल्विंग-चेयर पर निश्चल बैठे पाया था। उसका चेहरा कुछ जर्द था, मगर आंखें सुलग रही थीं। उसे देखकर देवा के जेहन में उस सांप का ख्याल उभरा था जो किसी पर हमला करने से पहले फन फैलाए निश्चल खड़ा हुआ हो ।
“बैठ जाओ ।" अफजल सुल्तान ने कोई रस्मी बात किये बगैर सीधे हुक्म दिया। उसके होंठों पर मुस्कराहट का निशान तक नहीं था ।
देवा को यकीन हो गया कि कोई बहुत बड़ी घटना घट चुकी थी....या फिर घटने वाली थी। वो सावधान हो गया।
"चार्ली को लम्बी सैर के लिये ले जाया गया था।" अफजल ने देवा के बैठ जाने के बाद कहा।
देवा के मुंह से प्रेशर कुकर की सीटी जैसी सांस निकल गई। दो क्षण के लिये उसने खून को अपनी रगों में सर्द पड़ते हुए महसूस किया था ।
चार्ली अफजल के बेहतरीन आदमियों में से एक था, वो भी इन दिनों इसी किस्म के काम कर रहा था, जैसे कि देवा को सौंपे गए थे। उसके शिकार हो जाने का मतलब था कि पूर्वी गैंग वालों ने अपनी धमकी पर अमल कर दिखाया था।
“उसकी लाश रोज पार्क की दूसरी तरफ पड़ी पाई गई है।" अफजल ने जहरीले लहजे में बात जारी रखते हुए कहा--- "उसके हाथ-पांव तारों से बंधे हुए थे और उसके जिस्म में बारह गोलियां धंसी पड़ी थीं। यह बताने की जरूरत नहीं कि उसके जिस्म में गोलियां उतारने से पहले उसको बांधा गया होगा। जेब में मौजूद कुछ कागजात से उसकी शिनाख्त मुमकिन हो सकी। अभी कुछ मिनट पहले ही मुझे इत्तला मिली है।"
"यह यकीनन पूर्वी गैंग वालों का काम है।" देवा ने कहा और फिर अफजल को उस वार्निंग के बारे में बताया जो कुछ दिन पहले उसे दी गई थी। उसने अभी तक अफजल सुल्तान से उसका जिक्र नहीं किया था।
अफजल कुछ क्षण सोचने के बाद बोला---
"इसका मतलब है....सैर पर ले जाए जाने वाला उनका अगला शिकार तुम होगे।” उसके लहजे में दबा-दबा सा गुस्सा था--- "लेकिन वो तुम्हें नहीं ले जा सकेंगे। उनकी यह कोशिश कामयाब नहीं हो सकेगी। वो मेरे किसी भी और आदमी को नहीं ले जा सकेंगे। मैं उन्हें ऐसा सबक सिखाने वाला हूं जो उनके दिलों पर हमारे गैंग की दहशत बिठाने वाला होगा कि वो आईन्दा ऐसी जुर्रत न करें। क्या तुम इस काम में मेरा साथ देने के लिये तैयार हो ?"
“बिल्कुल।” देवा ने मुस्कराते हुए कहा--- "मैं आजमाईश के वक्त पीछे हटने वाला नहीं हूं।"
“बहुत खूब। अगर तुमने बढ़िया काम कर दिखाया, तो तुम्हें एक लाख रुपया इनाम मिलेगा। तुम आज रात आठ बजे डिनर सूट पहनकर वहां पहुंच जाओ। तुम्हारे पास कोई बढ़िया-सा डिनर सूट है ?"
"नहीं।" देवा ने इंकार में सिर हिला दिया।
"तो फिर.... मेरे हिसाब में दो-एक डिनर सूट खरीद लो। तुम्हें आईन्दा भी उसकी जरूरत पड़ सकती है।" अफजल ने कहा--- "मैं जिस मुहिम की मंसूबाबंदी कर रहा हूं और उसमें तुम्हारा जो काम है, उसके लिये तुम्हें अपना हुलिया बड़ा शरीफ और फैशनेबल रखना होगा। ठीक आठ बजे यहां पहुंच जाओ, उस वक्त तक बाकी बातें भी तय हो चुकी होंगी। यहां एक गनगर्ल भी मौजूद होगी, जो तुम्हारे साथ जाएगी।"
देवा वहां से रवाना हुआ था तो वो खौफजदा नहीं बल्कि जोश में था। उसे अन्दाजा हो गया था कि उस रात किसी को उसके हाथों कत्ल होना है। पेशेवर मुजरिम आमतौर से इस किस्म के कामों पर गौर नहीं करते बल्कि इस अहसास से उनकी रगों में एक उत्तेजना-सी भर जाया करती है कि वो किसी को सबक सिखाने... किसी पर धाक जमाने... और एक अहम काम निपटाने जा रहा है।
उसे याद आया। अफजल ने कहा था कि एक गनगर्ल भी उसके साथ जाएगी। वो सोचने लगा कि क्या यह वही गनगर्ल होगी जिसे उसने फौज में जाने से पहले एक बार देखा था। हालांकि उस वक्त लीना उसके साथ थी, मगर वो उस गनगर्ल को एक नजर देखकर ही उसकी शख्सियत के आकर्षण का गुलाम होकर रह गया था। उसका प्रभाव आज तक देवा के जेहन से मिट नहीं सका था, आज भी गनगर्ल के शब्द सुनकर उसके जेहन में उसी का रूप उभर आया था। देवा को अहसास था कि अफजल ने जिस गनगर्ल का जिक्र किया था, वो कोई और भी हो सकती थी। जरूरी नहीं था कि वो करीना कोहली ही होती। मगर एक संभावना तो मौजूद थी ही। वो करीना कोहली भी हो सकती थी, और यह उम्मीद देवा के दिल की धड़कनें तेज कर रही थी। उसकी उत्तेजना में इजाफा कर दिया था।
रात को जब वो तैयार होकर अफजल के ऑफिस में पहुंचा था तब भी इस ख्याल से उसकी धड़कनें बेतरतीब थीं। वो नहाकर, शेब बनाकर, सलीके से बाल संवारकर और बढ़िया डिनर सूट पहनकर आया था। चेहरे पर जख्म के लम्बे निशान के बावजूद उसके चेहरे पर बहरहाल शालीनता, रौब और आकर्षण मौजूद था। उसकी सूरत निखर आई थी। वो जब अफजल के कमरे में पहुंचा था तो वो बिल्कुल उसी अन्दाज में बैठा हुआ था जिस तरह देवा उसे कई घंटे पहले छोड़कर गया था।
उसके दाएं हाथ पर 'गनगर्ल' मौजूद थी। वही गनगर्ल जिसके ख्याल से ही देवा के दिल की धड़कनें तेज हो रही थीं। और अब...उसे सामने देखकर जैसे उसका दिल धड़कना ही भूल गया था। वो करीना कोहली ही थी।
निसन्देह वो पहले से भी ज्यादा हसीन हो गई थी। उसके आकर्षण में अगर पहले कोई क्षीण-सी कमी थी भी तो अब वो भी दूर हो गई थी। करीना का जिस्म भर गया था और वो पहले से ज्यादा कयामत ढा रही थी। उसने ऐसा लिबास पहन रखा था, जिसने उसके सुडौल जिस्म को और स्पष्ट कर दिया था। खुले गले का काला गाऊन उसके केसर मिले दूध जैसे बदन की कशिश को बहुत ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर देखने वालों की आंखों के सामने पेश कर रहा था। उसके बाल गहरे स्याह थे। मगर वो स्याही कुछ अजीब-सी थी। उसमें नीलाहट की झलक, झलक रही थी और उसके होंठ दहकते दिखाई दे रहे थे । निसन्देह वो एक जिन्दा कयामत थी ।
"यह करीना है... और यह सुरेन्द्र पाल है...।" अफजल सुल्तान ने परिचय की रस्म भी पूरी की फिर देवा उर्फ सुरेन्द्र पाल से कहा--- "बैठो, आज तुम बड़े जबर्दस्त लग रहे हो। एकदम मशीनगन की तरह ।"
देवा बैठ गया। करीना ने अपनी खूबसूरत गर्दन को जरा-सा झुकाते हुए गहरी निगाहों से उसका सिर से पैर तक जायजा लिया।
देवा की नसों में दौड़ रही उत्तेजना में कुछ और इजाफा हो गया।
"सुरेन्द्र पाल, आज रात मैं जो काम तुम्हें सौंप रहा हूं, वो वैसे तो बहुत बड़ा है। लेकिन तुम्हारी वफादारी और तुम्हारी योग्यताओं का अन्दाजा लगाते हुए मैं महसूस कर रहा हूं कि तुम्हीं इस काम के लिये सबसे उपयुक्त आदमी हो।"
"तुम्हारा मतलब... शरद शिरके को...!” देवा ने हैरत से कहा--- हैरत तो यकीनन करीना को भी हुई होगी, लेकिन उसने वो प्रकट नहीं होने दी थी।
“हां, शरद शिरके.... पूर्वी गैंग का लीडर ।” अफजल ने तस्दीक की--- "इस वक्त उस गैंग में ऐसा कोई आदमी नहीं है जो शिरके के खात्मे के बाद उसकी जगह ले सके। इसलिये इस बात की प्रबल संभावना है कि उसकी मौत के बाद उसका गिरोह तबाह हो जाएगा... बिखर जाएगा। मैंने हर रोज के खून-खराबे के बजाय एक बड़ा और निर्णायक कदम उठाने का फैसला किया है। उन्हें यह तो मालूम हो जाएगा कि यह हमारे गैंग के किसी आदमी का काम है। लेकिन यह नहीं मालूम हो सकेगा कि वो आदमी कौन है। मुझे तुमसे और करीना से उम्मीद है कि तुम दोनों उन लोगों को यह बात मालूम नहीं होने दोगे ।" उसने खामोश होकर बारी-बारी देवा और करीना कोहली की तरफ देखा । वो दोनों खामोश रहे। तब अफजल ने बात आगे बढ़ाई--- "गैंग के लीडर की अचानक मौत पूरे गैंग को बदहवास और दहशतजदा कर देगी। मुझे उम्मीद है कि उसके बाद वो काफी अर्से तक हमें छेड़ने की जुर्रत नहीं कर सकेंगे। काम तो वाकई काफी खतरनाक है। लेकिन इसके नतीजे भी काफी तसल्लीबख्श होंगे ।"
“ठीक है... मैं तैयार हूं।" देवा ने बेहिचक कहा--- “काम किस तरह करना है?"
“मुझे मालूम हुआ है कि शिरके आज रात अपने खास-खास आदमियों को रॉक्सी क्लब में पार्टी देने जा रहा है।" अफजल सुल्तान ने बताया ।
"शरद शिरके, रॉक्सी क्लब में पार्टी दे रहा है?" करीना हैरत से बोल उठी थी। इस दौरान वो पहली बार बोली थी।
उसकी आवाज सुनकर देवा के कानों में गुदगुदी सी होने लगी थी। जैसे किसी ने उसके कानों में शहद उड़ेल दिया हो। करीना के बदन की तरह उसकी आवाज भी दिल के तारों को झनझना देने वाली थी, मधुर...सुरीली आवाज। उसके चेहरे पर हैरत के भाव भी बड़े भले लग रहे थे। अपनी हैरत से फैली आंखों के साथ करीना और भी ज्यादा खूबसूरत लग रही थी।
उसके अन्दाज पर देवा मुस्करा दिया। वो समझ गया था कि शायद करीना कहना चाहती है---
“उस जैसा घटिया आदमी... ऐसी जगह पर पार्टी दे रहा है।"
लेकिन करीना ने शब्दों की मदद लिये बगैर ही अपना मकसद पूरा कर लिया था।
अफजल सुल्तान भी उसकी तरफ देखकर सिर हिलाता हुआ बोला---
"इंसान के पास दौलत होनी चाहिये, हर जगह उसकी पहुंच हो जाती है। दौलत के सहारे बड़े-बड़े घटिया लोग बड़ी-बड़ी ऊंची और बढ़िया जगहों पर पहुंच जाते हैं। तुम्हें तो फिर यह सुनकर भी हैरत होगी कि कैसे-कैसे लोग शिरके की पार्टी में आ रहे हैं। पार्टी बहुत थोड़े-से लोगों के सम्मान में है। लेकिन वो सब अमीर और जाने-माने लोग हैं। सरकारी वकील, यानि डिस्ट्रिक्ट अटार्नी, कई सरकारी महकमों के चीफ । बस, ऐसे ही लोग हैं।" फिर वो खासतौर पर देवा से मुखातिब हुआ--- "शरद शिरके सोच भी नहीं सकता कि रॉकसी क्लब जैसी ऊंची जगह पर और ऊंचे-ऊंचे लोगों की मौजूदगी में भी उसके ऊपर हमला हो सकता है। इसलिये उसके बॉडीगार्ड वहां नहीं मौजूद होंगे। यह इत्तला भी मुझे मिल चुकी है। और चूंकि... वो तुम दोनों को चेहरे से नहीं पहचानता, इसलिये तुम्हें देखकर न तो वो शक में पड़ेगा, न ही चौकन्ना होगा। उसे ठिकाने लगाना तुम्हारे लिये ज्यादा मुश्किल नहीं होगा। असल काम से पहले तुम्हारे लिये कोई परेशानी नहीं पैदा होगी। मैं इस सिलसिले में तुम्हें हिदायत नहीं दूंगा कि यह काम कैसे करना है। इसका फैसला तुम्हें देखकर मौके पर ही करना होगा। तुम्हारी नजर में जो तरीका भी बेहतरीन हो, वो अपना लेना। बस उस हरामजादे को बचना नहीं चाहिये। तुम्हारे पास कोई गन मौजूद है ?"
"बिल्कुल है।” देवा ने जवाब दिया।
"वो मुझे दे दो। आज तुम्हें अपने पास गन रखने की जरूरत नहीं है। गन रखने का फर्ज आज रात करीना बेवी निभाएगी। इसके पास गन मौजूद है, जरूरत पड़ते ही यह सबकी आंख बचाकर तुम्हें दे देगी। गन इस्तेमाल करके तुम भी बगैर किसी के देखे, इसे वापस दे देना। बाद में अगर किसी को तुम पर शक भी हुआ और तुम्हारी तलाशी ले भी ली गई, तो तुम्हारे पास से गन बरामद नहीं हो सकेगी।"
देवा ने कुछ हिचकिचाहट के साथ अपनी गन निकालकर अफजल सुल्तान के हवाले कर दी। उसने उसे दराज में रख दिया। फिर अफजल सुल्तान एक कार्ड देवा की तरफ बढ़ाते हुए व्यंग्य से हँसता हुआ बोला---
"रॉक्सी क्लब में दाखिला सिर्फ मेम्बरशिप कार्ड से होता है। लेकिन यह कार्ड हम जैसे लोग भी हासिल कर लेते हैं। यह तुम्हारा मेम्बरशिप कार्ड है।"
"देवा ने वो कार्ड ले लिया और अफजल का इशारा पाकर उठ खड़ा हुआ। करीना भी उठ गई। वो दोनों साथ-साथ बाहर आए। नीचे एक शानदार कार उनकी प्रतीक्षक थी। इस कार का इन्तजाम भी अफजल ने किया था। देवा और करीना एक बड़े प्रतिष्ठित और दौलतमंद नौजवान जोड़े की तरह रॉकसी क्लब की तरफ रवाना हो रहे थे। इस वक्त उन्हें देखकर कोई सोच भी नहीं सकता था कि उनकी असल हैसियत और असल मकसद क्या है?
क्लब के बड़े हॉले तक एक वेटर ने निहायत ही आदर के साथ उनका मार्गदर्शन किया था। गेट पर सरसरी ढंग से देवा का मेम्बरशिप कार्ड चेक किया गया था। उन्हें किसी ने रोका नहीं। बड़े हॉल में पहुंचते ही देवा को वो मेज नजर आ गई जिसे यकीनन शरद शिरके की आज की पार्टी के लिये सजाया गया था। उसके आसपास बारह-चौदह आदमियों के बैठने की गुंजाईश थी। मेज पर छोटा-सा बोर्ड रखा हुआ था जिस पर "रिजर्व” लिखा हुआ था।
देवा ने उस वक्त दिल ही दिल में भगवान का शुक्र मनाया, जब हैड वेटर ने उनकी फरमाईश के बगैर ही एक ऐसी मेज पर बिठा दिया, जो देवा के मकसद के लिये बेहतरीन थी। वैसे तो देवा की मेज शिरके की बड़ी मेज से पच्चीस-तीस फुट के फासले पर थी और दोनों मेजों के दरम्यान दो-तीन दूसरी मेजें भी आती थीं। लेकिन उन बीच वाली मेजों पर कोई बैठा भी होता तो कोण कुछ ऐसा बनता था कि देवा को अपना हाथ नीचा रखते हुए भी बिल्कुल सीध मिल सकती थी, फायर करने के लिये ।
शरद शिरके चूंकि इस पार्टी का होस्ट था, इसलिये देवा का अन्दाजा था कि वो मेज के एक सिरे पर ही बैठेगा। और वो देवा की "लाईन ऑफ फायर" में था। इसके साथ ही दरवाजा भी उस मेज से ज्यादा दूर नहीं था। यानि अपना काम करते ही वो जल्द से जल्द वहां से निकल सकता था। ये तमाम बातें देवा के लिये उल्लास का कारण थीं। इसके बावजूद वो वहां बैठने के बाद काफी देर तक अन्दर ही अन्दर बेचैन रहा था। एक तो वो ऐसे शरीफों और दौलतमंदों वाले हुलिये में पहली बार ऐसी ऊंची जगह आया था, वो भी महज तफरीह के लिये नहीं बल्कि एक खौफनाक और खतरनाक इरादे के साथ। दूसरे, उसके पास अपनी गन भी नहीं थी जिसे जरूरत पड़ने पर वो बिजली की सी फुर्ती से निकालने में माहिर हो चुका था।
लेकिन करीना बिल्कुल शांत नजर आ रही थी और इसी तरह इत्मीनान से बात कर रही थी। जैसे कोई खानदानी रईसजादी हो और एक ऐसी जगह खाने और तफरीह के लिये आई हो, जहां वो कई वर्षों से आ रही हो।
आखिर करीना की मौजूदगी उसके तौर-तरीकों से देवा के तनाव में भी धीरे-धीरे कमी आने लगी थी। वो भी आराम से करीना के साथ हल्की-फुल्की गप-शप करने लगा था और उसकी बला की सुन्दरता को अपनी आंखों के रास्ते अपने वजूद में उतारने लगा था। अब वो करीना की मौजूदगी से लुत्फ उठा रहा था। उससे बातें करते हुए उसकी आवाज सुनते हुए देवा के दिल में जल तरंगें बज रही थीं। पीने-पिलाने का दौर चल रहा था । हल्के से सुरूर के आलम में देवा ने एक ख्वाहिश को एक कोंपल की तरह दिल में फूलते हुए महसूस किया। लेकिन वो ख्वाहिश उसके लिये चिंताजनक भी थी। उसका दिल बड़ी शिद्दत से इस लड़की को हासिल करने को चाहने लगा था। देवा ने महसूस किया कि करीना को अपनी बनाने के लिये वो कुछ भी कर सकता है। अपनी इस तलब पर वो खुद भी हैरान था। तभी अचानक बाहर से कुछ आवाजें सुनाई दीं। क्लब के अन्दर भी कुछ हलचल सी मच गई थी। क्लब का मैनेजर और हैड-वेटर दरवाजे की तरफ लपकते दिखाई दिये।
कुछ देर बाद देवा को अन्दाजा हो गया कि क्लब का स्टाफ और खास-खास लोग 'अहम' मेहमानों के स्वागत के लिये दौड़े जा रहे थे। शरद शिरके और उसके मेहमान आ पहुंचे थे। मेजबान और मेहमान, सभी साथ आए थे। देवा ने शरद शिरके को फौरन पहचान लिया था।
उन तमाम लोगों को निहायत ही आदर और सम्मान के साथ बिठाया गया था । प्रबन्धक उनके सामने बिछा जा रहा था। जाहिर है कि इस वक्त उनके सामने दौलत, ताकत, बदमाशी, राजनीति और सरकारी ऑफिसरों की ताकत का गठजोड़ मौजूद था।
देवा ने तलखी से सोचा था-- 'यह दशा है आजकल देश की। सब घालमेल हो गया है।'
हॉल में अब दूसरी मेजों पर भी काफी लोगों का इजाफा हो गया था। सभी मेजें लगभग भर चुकी थीं। देवा ने सबका जायजा लिया। उसे यकीन हो गया कि कम-से-कम हॉल में शिरके का कोई गनमैन या गार्ड मौजूद नहीं है। शरद शिरके इस वक्त जिन लोगों के साथ था, यकीनन उनकी मौजूदगी में खुद को बहुत सुरक्षित महसूस कर रहा था।
देवा को अन्दाजा था कि उसकी कामयाबी का सारा दारोमदार इसी बात पर था कि वो अपना काम मुनासिब वक्त पर कर डाले। करीना कामयाबी से अपना रोल निभा रही थी। वो इधर-उधर की बातें करते हुए बीच-बीच में खामखह खुशदिली से हँसे जा रही थी। वो यह जाहिर करने की कोशिश कर रही थी कि उसे और देवा को आसपास से कोई सरोकार नहीं है। वो एक प्रेमी जोड़ा था और एक-दूसरे में मग्न थे। फिर भी यह प्रभाव जगाने में देवा उसका ज्यादा साथ नहीं दे पा रहा था।
देवा सिगरेट सुलगाए, खोए-खोए-से अन्दाज में धीरे-धीरे कश ले रहा था और अनचाहे ही बार-बार उस शख्स का जायजा ले रहा था, जिसे मौत के घाट उतारने की जिम्मेदारी उसे सौंपी गई थी।
फिर खास मेहमानों की लम्बी-सी मेज पर शैम्पेन की बोतलों के कार्क खोले जाने लगे थे । कहकहों की आवाजें सुनाई देने लगी थीं।
देवा और करीना इस वक्त तक खाना खा चुके थे, देवा ने बिल भी चुका दिया था।
तभी हॉल की सभी लाईटें बुझा दी गईं और एक छोटी-सी स्पॉट लाईट हॉल में बने छोटे-से डांसिंग फ्लोर पर घूमने लगी थी। उसकी वजह से हॉल में भी हल्की-सी रोशनी का अहसास हो रहा था। सूट पहने और हाथ में हल्की-सी छड़ी लिये एक नौजवान स्टेज पर प्रकट हुआ और उस शो के बारे में बताने लगा जो पेश किया जाने वाला था। बीच-बीच में वो छोटे-छोटे जोक भी सुना रहा था।
देवा ने फैसला किया कि यह उसके काम के लिये मुनासिब वक्त था। क्योंकि इस वक्त सबका ध्यान स्टेज की तरफ था। उसने करीना की तरफ देखकर सिर को हल्के से हिलाया। उसने भी सहमति के अन्दाज में गर्दन हिलाई और जैसे भावनाओं के वशीभूत होकर देवा का हाथ थाम लिया। फिर वो उसी तरह न मालूम अन्दाज में आहिस्ता से उसके हाथ को मेज के नीचे ले गई थी और अपने घुटने पर टिका दिया था। कुछ ही क्षण बाद देवा ने करीना के नर्म और नाजुक हाथ और घुटने की बजाय लोहे का सख्त और सर्द स्पर्श महसूस किया था। उसे मालूम था कि उसके हाथ में क्या चीज आ गई है। देवा ने यह गिरफ्त मजबूत करते हुए सेफ्टी पिन हटा दिया। वो एक रिवाल्वर था। वो रिवाल्वर मजबूती से थामकर मुनासिब लम्हे का इन्तजार करने लगा।
उस दौरान स्टेज पर एक औरत प्रकट हो चुकी थी और कुछ गाने जैसी चीज गा रही थी। परिस्थिति के तनाव और अपनी हालत के बावजूद देवा को उस औरत के गाने का अन्दाज बड़ा हास्यप्रद-सा लगा था। वो अनायास ही हँस दिया था।
तभी लम्बी, सुडौल टांगों वाली और आकर्षक बदन वाली कुछ लड़कियां भी बदन पर कपड़े की दो छोटी-छोटी धज्जियां लपेटे स्टेज पर आ धमकी थीं, वो फेफड़ों से पूरा जोर लगाकर गाने लगीं। वो जिस तरह कशिश के अन्दाज में गा रही थी, उसी तरह डांस भी कर रही थीं उनके गाने और उछलकूद से ही काफी शोरो-गुल होने लगा था।
दर्शकों ने भी जिन्दादिली का सबूत देते हुए अपनी-अपनी मेजों पर थाप देनी शुरू कर दी थी। सिर्फ यही नहीं, इधर-उधर से आवाजें भी आ रही थीं और ठहाके भी लगाए जा । यह शोर-शराबा देवा के हक में निहायत ही फायदेमंद था। उसने रिवाल्वर अपने हाथ में सीधा किया। लेकिन वो उसे टेबल-टॉप से ऊपर नहीं लाया। किसी का ध्यान भी उसकी तरफ नहीं था और उसके निशाने की राह में कोई रुकावट नहीं थी।
देवा ने इतनी तेजी से तीन फायर किये कि तीनों धमाके एक-दूसरे में मिक्स होकर रह गए थे।
उसने शरद शिरके को झटके से आगे झुकते और फिर उसका सिर मेज पर टिकते देखा। वो कुर्सी से नहीं गिरा। उसका सिर मेज पर ही टिककर रह गया था।
देवा ने मेज के नीचे से ही रिवॉल्वर जल्दी से करीना की तरफ बढ़ा दिया था। करीना ने फुर्ती से उसके हाथ से रिवॉल्वर ले लिया था। फायरों के धमाके बहरहाल, उस सारे शोर-शराबे पर हावी रहे थे जो उस वक्त हॉल में हो रहा था। वहां कुछ अफरा-तफरी सी फैली और शोर का तरीका बदल गया था।
अचानक हॉल की लाईटें ऑन कर दी गई थीं। बहुत-से लोग भयभीत से अपनी मेजों से उठ खड़े हुए थे। वो सहमे हुए से शरद शिरके की तरफ देख रहे थे। वो कुर्सी और मेज के दरम्यान फंसा नजर आ रहा था और निर्जीव लग रहा था।
घबराहट और अफरा-तफरी की हालत में लोगों ने वहां से रुख्सत होना शुरू कर दिया था। किसी को भी इस किस्म के मामले में लिप्त होकर मीडिया और पुलिस के सवालों का जवाब देना पसन्द नहीं था। न ही कोई पुलिस स्टेशनों या अदालतों के चक्कर लगाने का इच्छुक था।
देवा और करीना भी उन्हीं घबराए हुए लोगों के रेले में शामिल हो गए। दो मिनट बाद ही वो शानदार कार में बैठे मोका-ए-वारदात से दूर जा रहे थे।
"चलो, यह काम भी निपट गया।" देवा ने इत्मीनान से गहरी सांस लेकर कहा। यह अभियान पूरा कर लेने के बाद वाकई वो बड़ा सन्तुष्ट और हल्का-फुल्का महसूस कर रहा था, खुद को।
करीना उसकी तरफ देखकर मुस्करा दी। वो बिल्कुल शांत नजर आ रही थी। देवा ने प्रशंसनीय अन्दाज में उससे कहा---“तुमने भी अपना काम बड़ी खूबी से कर दिखाया। तुम एक योग्य लड़की हो। उम्मीद है अफजल हमारे इस कारनामे को हमेशा याद रखेगा।"
"जिस तरह की जिन्दगी हम गुजार रहे हैं, उसमें योग्यताओं के बगैर गुजारा ही कहां होता है।" एक ठण्डी सांस लेकर बोली थी।
देवा ने एक बाजू उसके गिर्द लपेटकर उसको अपने साथ लगा लिया, उसने कोई ऐतराज नहीं किया। उसके गुदाज बदन के स्पर्श से देवा के जिस्म में सनसनी दौड़ गई थी।
"आज के बाद हम इकट्ठे ही काम किया करेंगे।" देवा ने जज्बात से बोझिल स्वर में कहा--- "मुझे उम्मीद है, हमारी जोड़ी बहुत कामयाब रहेगी। क्या हम अच्छे दोस्त नहीं बन सकते ?"
"शायद...बन सकते हैं।" करीना ने धीमे लहजे में जवाब दिया।
देवा ने उसकी कमर में अपना बाजू और ज्यादा कस दिया।
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