कला की परीक्षा में असफल
सन् 1905 में सोलह साल की उम्र में हाई स्कूल त्याग देने के बाद एडोल्फ ने अगले कुछ साल खाली बैठकर सोच-विचार करने में गुजार दिए। उसकी दयामयी माँ ने उससे कोई काम-धंधा सीखने या कोई नौकरी तलाशने की सलाह दी। युवा एडोल्फ को रोजाना काम पर जाने और किसी के हुक्म के अधीन काम करने के विचार से ही नफरत थी।
उसके पिता की मृत्यु के बाद कोई ऐसा नहीं था, जो उसे बता सके कि क्या करना चाहिए। अत: उसने वही किया, जो उसे ठीक लगा। उसने अपना समय ऑस्ट्रिया के लिंज शहर में इधर-उधर घूमने, संग्रहालयों को देखने, आवेश में जाकर मन-बहलाव करने, डेन्यूबे नदी के किनारे बैठकर एक महान् कलाकार बनने का स्वप्न देखने में बिताया।
हिटलर को देर तक सोने की आदत थी। फिर वह दोपहर बाद बाहर जाता था—एक तनावमुक्त युवा भद्र पुरुष की तरह कपड़े पहनकर। वह एक आकर्षक, हाथी दाँत की बनी हुई छोटी सी छड़ी भी हाथ में रखता था। घर वापस आकर वह देर आधी रात तक पढ़ता रहता और चित्रकारी करता रहता था।
बाद में उसका कहना था कि किशोरावस्था के वे साल उसके जीवन का सबसे खुशनुमा समय था। तब न कोई चिंता थी और न कोई जिम्मेदारी।
उसका एकमात्र दोस्त दूसरा युवा स्वप्नद्रष्टा था। उसका नाम अगस्त कुबिजेक था, जो एक महान् संगीतज्ञ बनना चाहता था। उनकी मुलाकात लिंज में ओपेरा में हुई थी। कुबिजेक को हिटलर बहुत ही लुभावना लगा और दोनों में जल्दी ही दोस्ती पनपने लगी। कुबिजेक एक धैर्यशील श्रोता था। हिटलर घंटों तक उसे अपनी आशाओं एवं सपनों के बारे में सुनाता रहता और वह सुनता रहता। कभी-कभी हिटलर भाषण भी दिया करता था—पूरे हाव-भाव के साथ, हाथ हिला-हिलाकर। सुननेवाला केवल एक होता था, उसका दोस्त।
कुबिजेक ने बाद में हिटलर के व्यक्तित्व को ‘प्रचंड और अति-संवेदनशील’ बताया। हिटलर केवल अपने दोस्त की बात मानता था और कोई उसे सुधारने का प्रयास करे, यह उसे पसंद नहीं था। हाई स्कूल में रहते हुए और एक बड़े लड़के के रूप में भी उसका व्यवहार ऐसा ही था।
युवा हिटलर की कोई प्रेमिका नहीं थी। पर स्टीफेनी नाम की सुनहरे बालोंवाली एक जवान गोरी लड़की में उसकी अत्यधिक दिलचस्पी थी। जब वह चलती, हिटलर उसे ताकता रहता और कभी-कभी उसका पीछा भी करता। उसके लिए हिटलर ने अनेक प्रेम गीत लिखे। लेकिन उसने वे कविताएँ उसे कभी नहीं सौंपीं और न ही इतनी हिम्मत जुटा पाया कि उसे अपना परिचय दे। उसने उस लड़की के खयालों में खोए रहना ही अधिक पसंद किया। उसने अपने मित्र कुबिजेक को बताया कि उसने अपने अंतर्ज्ञान के माध्यम से उस लड़की से बात की है, और यह कि वह लड़की भी उसके विचारोें से अवगत है तथा उसकी बड़ी प्रशंसा करती है। हिटलर ने यह भी कहा कि उसे बड़ी जलन होती है, जब वह किसी दूसरे युवा पुरुष पर जरा भी ध्यान देती है।
वास्तव में, उस युवती को भनक तक नहीं थी कि हिटलर को उसमें कोई दिलचस्पी है। वर्षों बाद, जब उसे बताया गया कि उसका गुप्त प्रशंसक अब एक मशहूर व्यक्ति है, तो उसने बड़ा आश्चर्य व्यक्त किया। उसे यह जरूर याद था कि कभी उसे एक अनोखा पत्र मिला था, जिस पर लिखनेवाले के हस्ताक्षर नहीं थे।
दुनिया के बारे में भी हिटलर के विचार उसकी कल्पना की उपज थे और उसने उन्हें मूर्त रूप देना शुरू कर दिया। उसने जर्मनी के इतिहास और नार्डिक (उत्तरी जाति संबंधी) पुराण के बारे में लाइब्रेरी से अनेक पुस्तकें उधार लीं। वह रिचर्ड वाग्नेर के ओपेरा यानी संगीत-नाट्यों और उनके विधर्मी व घृणित शत्रुओं के विरुद्ध मनगढ़ंत किस्से-कहानियों से बहुत प्रेरित था। उसके मित्र कुबिजेक ने बताया कि वाग्नेर का ओपेरा ‘रिएंजी’ देखने के बाद हिटलर ने इस तरह बरताव किया मानो उस पर प्रेतात्मा सवार हो! हिटलर अपने दोस्त को एक खड़ी पहाड़ी की चोटी पर ले गया, जहाँ उसने एक विचित्र आवाज में अपने उस लक्ष्य के बारे में बताया, जो लोगों को आजादी तक ले जाएगा। उसका कथन कुछ-कुछ उस ओपेरा की कहानी जैसा ही था, जो उसने अभी-अभी देखा था।
उस समय तक हिटलर में जर्मन जाति और सबकुछ जो जर्मन में है, उसके प्रति प्रबल गर्व की भावना पैदा हो गई थी और हैप्सबर्ग राजतंत्र तथा बहु-सांस्कृतिक ऑस्ट्रो-हंगेरियन साम्राज्य में उन गैर-जर्मन जातियों से उसे बहुत घृणा हो गई थी, जिन्होंने ऑस्ट्रिया तथा आस-पास के देशों पर सदियों तक शासन किया था।
वर्ष 1906 की वसंत ऋतु में सत्रह वर्षीय हिटलर पहली बार वियना की यात्रा पर गया, जो उस साम्राज्य की राजधानी थी और जिसे कला, संगीत एवं प्राचीन यूरोपियन संस्कृति का विश्व के सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण केंद्रों में से एक माना जाता था। खर्च के लिए अपनी माँ से पैसे लेकर वह ओपेरा प्रस्तुतियों को देखने और ‘कोर्ट म्यूजियम’ में प्रसिद्ध चित्र दीर्घा का अध्ययन करने के इरादे से वहाँ गया था। उसके बजाय शहर की भव्य वास्तुकला ने उसे सम्मोहित कर दिया।
हिटलर को वास्तुशिल्प में गहरी रुचि थी। वह किसी भी भवन को एक बार देखकर ही अपनी स्मृति से उसका पूरा खाका खींच सकता था। वह मौजूदा इमारतों में सुधार करने, उनको और भव्यता प्रदान करने तथा शहर के विन्यास का आधुनिकीकरण करने के तरीकों पर सोच-विचार करता रहता था। वियना में वह ओपेरा हाउस, संसद् भवन जैसी विशाल इमारतों को टकटकी लगाकर घंटों निहारता रहता था और रिंग बुलेवर्ड पर नजरें गड़ाए रहता था।
उसमें छुटपन से ही चित्रकारी के प्रति स्वाभाविक प्रतिभा थी। उसके हाई स्कूल के शिक्षक भी समझ गए थे कि उसमें चित्रकारी करने की विशेष प्रतिभा है। लेकिन हाई स्कूल में उसका रिकॉर्ड ठीक नहीं रहा। वह एक आलसी और असहयोगी छात्र था, जिसे विद्यालय से निकाल देना जरूरी हो गया था। उस विफलता की असलियत से बचने और अपना वजूद बनाए रखने के लिए एक-एक दिन मेहनत-मजदूरी की भयावह वास्तविकता का विचार मन से दूर करने के लिए हिटलर ने अपनी सारी उम्मीद एक कलाकार के रूप में महानता प्राप्त करने के सपने में सँजो रखी थी।
उसने वियना ललित कला अकादमी में प्रवेश पाने का फैसला कर लिया। अक्तूबर 1907 में, अठारह साल की उम्र में, उसने बैंक से अपनी विरासत रकम निकाल ली और वियना में रहकर पढ़ाई करने के लिए चला गया। हिटलर की माँ उस समय स्तन-कैंसर से पीड़ित थी और जनवरी में उसका ऑपरेशन हुआ, जो सफल नहीं रहा। लेकिन हिटलर की एक महान् कलाकार बनने की आकांक्षा इतनी उत्कट थी कि वह न चाहते हुए भी अपनी माँ को छोड़कर चला गया।
उसने अकादमी के चित्रकला विद्यालय की दो दिवसीय प्रवेश-परीक्षा दी। उसने पूरी उम्मीद और विश्वास के साथ परिणाम आने की प्रतीक्षा की। उसे पक्का भरोसा था कि उसे ले लिया जाएगा। लेकिन परीक्षा में सफल न होना उस पर गाज गिरने जैसा साबित हुआ। प्रवेश-परीक्षा में उसके चित्रों को असंतोषजनक माना गया और उसे दाखिला नहीं मिला। उस नकारात्मक नतीजे ने हिटलर को झकझोरकर रख दिया। वह वापस अकादमी गया और उसने अनुत्तीर्ण किए जाने का कारण पूछा। उसे जवाब मिला कि उसके चित्रों में कलात्मक चित्रकला संबंधी प्रतिभा की कमी है, विशेषकर मानव शरीर-रचना के स्वरूप को समझने का अभाव है। उसे बताया गया कि फिर भी, उसमें वास्तुकला के क्षेत्र में कुछ योग्यता अवश्य दिखती है।
लेकिन हाई स्कूल के आवश्यक डिप्लोमा के बिना भवन-निर्माण विद्यालय में जाना और उसके बाद अकादमी के वास्तुकला विद्यालय में प्रवेश पाना दूर की बात लगती थी। हिटलर ने चित्रकला विद्यालय की प्रवेश-परीक्षा में अगले वर्ष दुबारा बैठने का निश्चय किया। तत्पश्चात् उसने अत्यंत खिन्न एवं उदास होकर वियना छोड़ दिया और घर वापस चला आया, जहाँ उसकी माँ कैंसर से दम तोड़ रही थी। हालात और भी खराब हो गए।
0 Comments