कार रिवीरा अपार्टमेंट्स के सामने आकर रुक गई ।
"गुड नाइट, योर हाईनेस।" - प्रमोद अपनी ओर का कार का दरवाजा खोलता हुआ बोला ।
"गुड मॉर्निंग ।" - ड्राइविंग सीट पर बैठी युवती बोली ।
प्रमोद ने घड़ी देखी और मुस्कराकर बोला- “ओह, यस । गुड मॉर्निंग एण्ड थैंक्स फॉर दि लिफ्ट । "
युवती ने इग्नीशन बन्द कर दिया और कार से बाहर निकलकर प्रमोद की बगल में आ खड़ी हुई ।
"हवा बहुत ठन्डी है, राजकुमारी जी।" - प्रमोद बोला ।
"हां।" - युवती बोली - "मुझे भी महसूस हो रहा है । फिर कब मुलाकात होगी ?"
"जब आप चाहेंगी, राजकुमारी जी ।"
" प्रमोद !" - युवती झुंझलाये स्वर में बोली- "भगवान के लिये मुझे मेरा नाम लेकर पुकारा करो । मुझे राजकुमारी मत कहा करो । राजा-महाराजाओं के जमाने तो हिन्दुस्तान से लदे हुये भी बीस साल हो गये और तुम मुझे अमेरिका में राजकुमारी पुकारते हो । कभी-कभी तो ऐसा लगता है कि तुम मेरा मजाक उड़ा रहे हो । "
"हिन्दुस्तान की एक बड़ी रियासत चमनगढ की राजकुमारी का भला मैं मजाक उड़ा सकता हूं !"
"प्रमोद !" - राजकुमारी झल्ला पड़ी ।
- “ओ.के. | ओ.के. । जैसा तुम चाहो राजकुमारी - आई एम सारी - मिस रत्ना ।"
“यस, दैट्स बैटर । अब बोलो, क्या ख्याल है, एक राउन्ड और हो जाये ।"
"बहुत रात हो गई है, राजकुमारी जी... आई मीन रत्ना ।"
“अपनी कंजूसी छुपाने के लिये बहाना अच्छा तलाश किया है |"
"ओह नो । लेकिन..."
"ओह कम ऑन । इनवाइट बी फॉर ए ड्रिंक इन योर अर्पाटमेंट ।"
"ओ.के. I" - प्रमोद झिझकता हुआ बोला- "माई प्लेजर, मैडम | "
प्रमोद ने अपनी बांह आगे बढा दी । रत्ना ने उसकी बांह में अपनी बांह डाल दी और उसके साथ चलने लगी ।
इमारत के अन्दर दोनों लिफ्ट में दाखिल हो गये । प्रमोद ने चौबीसवीं मन्जिल का बटन दबा दिया । लिफ्ट का दरवाजा अपने आप बन्द हो गया और लिफ्ट ऊपर बढ़ने लगी ।
एकाएक रत्ना प्रमोद की ओर घूमी, उसने उसके गले में बांहे डालकर नेत्र बन्द कर लिये और अपना चेहरा ऊपर की ओर उठाती हुई स्वप्निल स्वर में बोली- "प्रमोद, किस मी ।"
प्रमोद ने अपने होंठों से उसके होंठ छू दिये ।
रत्ना ने नेत्र खोले और प्रमोद की ओर देखती हुई शिकायत भरे स्वर में बोली- "प्रमोद, आर यू श्योर दैट वाज ए किस ?" -
प्रमोद चुप रहा ।
"प्रमोद, क्या मेरा रूप और यौवन तुम्हारे मन को आकर्षित करने में कभी भी सफल नहीं होगा ?"
"रत्ना प्लीज..."
"मैं तुमसे मुहब्बत करती हूं।"
"लेकिन मैं...
"लेकिन तुम मुझसे मुहब्बत नहीं करते ।" प्रमोद फिर भी चुप रहा । "तुम किसी और से मुहब्बत करते हो ?"
प्रमोद चुप रहा ।
उसी क्षण लिफ्ट रुक गई और उसका स्वचलित दरवाजा खुल गया । रत्ना प्रमोद से अलग हट गई । उसने लिफ्ट से बाहर निकलने का उपक्रम नहीं किया ।
"आओ।" - प्रमोद उसकी बांह थामता हुआ बोला ।
रत्ना लिफ्ट से बाहर निकल तो गई लेकिन आगे बढ़ने के बजाय दीवार के साथ पीठ लगाकर खड़ी हो गई ।
"प्रमोद ।" - वह बोली ।
"हूं ।" - प्रमोद बोला ।
"क्या टाइम हुआ है ?"
"दो बजने को हैं।" - प्रमोद दोबारा घड़ी पर नजर डालता हुआ बोला ।
" और मैं तुम्हारे साथ तुम्हारे अपार्टमेंट में जा रही हूं।"
"हां, यह मेरा सौभाग्य है । "
"क्यों ?"
" ड्रिंक के लिये ।"
"प्रमोद ।" - रत्ना गहरी सांस लेकर बोली- "क्या वाकई तुम्हारी मुझ में कतई कोई दिलचस्पी नहीं है?"
"तुम बहुत अच्छी लड़की हो। मैं तुम्हें बहुत पसंद करता हूं।"
“केवल पसन्द करते हो, मुहब्बत नहीं करते । मुहब्बत शायद किसी और से करते हो ।”
"रत्ना मैं..." - प्रमोद कहते-कहते रुक गया ।
" मैं समझ गई । तुम किसी और लड़की से मुहब्बत करते हो |"
प्रमोद दूसरी ओर देखने लगा ।
"मगर आज तुम्हें उसके बारे में बताना ही होगा ।"
"रत्ना, प्लीज..."
"आज मैं तुम्हारी इस बेरुखी की वजह जाने बिना नहीं जाऊंगी ।”
"रत्ना, यह बेरुखी नहीं है। मैं तुम्हें एक बहुत अच्छा मित्र मानता हूं ।”
"लेकिन मैं मित्र के अतिरिक्त भी कुछ बनना चाहती हूं।"
“यह सम्भव नहीं ।" - प्रमोद शान्त किन्तु दृढ स्वर में बोला । "क्यों ?"
प्रमोद ने उत्तर न दिया ।
"मैं आज वजह जाने बिना यहां से नहीं हिलूंगी।"
"आओ, अपार्टमेन्ट में चलते हैं।" - प्रमोद उसकी बांह थामकर बोला ।
"नहीं।" - रत्ना बोली, उसने अपनी बांह छुड़ाने का उपक्रम नहीं किया और न अपने स्थान से हिली - "यहीं ठीक है । "
"लेकिन... अपार्टमेन्ट में एकान्त होगा।"
"बातों के लिये यहां भी एकान्त है । अपार्टमेन्ट में तुम्हारे चीनी नौकर यांग टो की मौजूदगी में मुझे एकान्त नहीं महसूस होता । ऐसा लगता है जैसे वह सब कुछ सुन रहा है।"
"यह तुम्हारा वहम है । यांग टो बहुत वफादार नौकर है । वह कुछ नहीं सुनता । न कुछ देखता है।"
"फिर भी यहीं ठीक है । "
"एक राजकुमारी को यूं गलियारे में खड़ा रहना शोभा नहीं देता ।”
"ओह, फारगेट इट । आज मैं हकीकत जाने बिना यहां से नहीं हिलूंगी ।"
प्रमोद ने कुछ क्षण सोचा फिर गम्भीर स्वर में बोला - "तुम क्या जानना चाहती हो ?"
"वह लड़की कौन है ?" - रत्ना ने पूछा ।
प्रमोद चुप रहा ।
रत्ना फिर बोली - “अब यह मत कहना कि दूसरी लड़की है ही नहीं । "
"नहीं कहूंगा ।" - प्रमोद सहज भाव से बोला ।
"मगर वह है कौन ?"
प्रमोद ने तत्काल उत्तर नहीं दिया। उसने गलियारे के दोनों ओर दृष्टि दौड़ाई । गलियारा खाली था ।
"रत्ना ।" - वह धीरे से बोला- "दरअसल सुनाने को कुछ भी नहीं है । कहानी उतनी दिलचस्प नहीं है जितनी कि तुम अपेक्षा कर रही हो । सुन चुकने के बाद शायद तुम यही कहो कि खोदा पहाड़ और निकला चूहा । "
"फिर मजाक !"
"मैं एकदम गम्भीर हूं।"
"होगे मगर मुझे नहीं लगते । "
“अच्छा तो सुनो । उसका नाम कविता ओबेराय है । नाम तो सुना ही होगा तुमने ।"
"हां" - रत्ना सिर हिलाती हुई बोली- "कविता का नाम किसने नहीं सुना होगा ! वह एक अन्तर्राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त चित्रकार है ।”
“हां । जब मेरी उस से पहली बार मुलाकात हुई थी तब मैं इक्कीस साल का था । वह मुझसे तीन साल बड़ी थी और मेरे एक बड़े घनिष्ट मित्र की पत्नी थी। हालांकि मैं उस से प्यार करता था लेकिन उसे मेरी मनोभावनाओं की जानकारी नहीं थी । फिर भी मैं एकतरफा प्यार से पूर्णतया सन्तुष्ट था । मैं समझता था कि अपने अभिन्न मित्र की पत्नी के बारे में कुछ सोचना भी पाप था । लेकिन दिल के हाथों मजबूर था । न जाने कैसे एक दिन मेरा राज खुल गया । रत्ना, वह रात... वह रात मुझे आज तक नहीं भूलती जब कविता को मेरा राज मालूम हुआ । मैं उस से अपने मन की बात छुपा न सका । उसी रात मुझे पहली बार मालूम हुआ कि कविता भी मुझे मन ही मन प्यार करती है । और... उस रात एक अनर्थ होते-होते बचा । उस रात के बाद कविता के सामीप्य से भी मुझे डर लगने लगा । मेरा अपने आप पर से विश्वास उठ गया । मैं अपने मित्र के साथ विश्वासघात नहीं करना चाहता था । मुझे अपनी, अपने मित्र की और कविता की भलाई इसी में दिखाई दी कि मैं उनकी जिन्दगी से दूर हो जाऊं और मैं उनसे बहुत दूर चला गया ।"
"कहां ?" - रत्ना ने मंत्रमुग्ध स्वर में पूछा ।
"मैं सीधा चीन भाग गया। वहां सात वर्ष मैंने निर्वासितों की तरह गुजार दिये । वहां के बौद्ध मठों में कन्सेन्ट्रेशन का अभ्यास करता रहा । केवल इसलिये कि मैं अपने पिछले जीवन को भूल जाऊं ।”
"तुम सफल हुए ?"
"बिल्कुल नहीं ।"
"फिर ?"
"फिर मालूम हुआ कि कविता के पति की मृत्यु हो गई।"
" और तुम भारत वापिस लौट गये ?"
"हां"
"कविता तब भी तुम से मुहब्बत करती थी ?"
"हां । "
“फिर तुमने उससे शादी क्यों न कर ली ? अब तो कोई रुकावट नहीं रह गई थी ।"
"वह नहीं मानी । "
"क्यों ?"
"बहुत सी बातें कहती थी। कभी कहती थी कि वह मेरे योग्य नहीं थी। कभी कहती थी कि शादी के योग्य उम्र नहीं रही थी। हालांकि उस समय उसकी उम्र केवल तेंतीस साल थी । कभी कहती थी कि उसकी भावनायें मर चुकी थीं, अब वह पूरी ईमानदारी से शादी जैसे गम्भीर विषय में दिलचस्पी नहीं ले सकती थी । कहती थी उससे शादी मेरे जीवन में कोई प्रसन्नता नहीं ला सकती थी । उसका ख्याल था कि शादी के बाद वह मेरे लिये एक समस्या बन जायेगी । कभी कहती कि अपनी मित्रता में सैक्स की भावना नहीं लाना चाहती । इससे एक अच्छी मित्रता में दरार आ जाने का खतरा है ।"
"बट दिस इज शियर नानसैन्स ।" - रत्ना तनिक उत्तेजित स्वर में बोली- "बुरा मत मानना लेकिन लगता है अधिक प्रसिद्ध हो जाने के कारण कविता का दिमाग खराब हो गया है। "
" यही बात तुमसे पहले इस मूड में कोई और भी कह चुका है
"कौन ?”
"सुषमा ओबेराय । कविता की छोटी बहन । "
"वह भी तो आर्टिस्ट है ?"
"हां लेकिन अपनी बड़ी बहन जैसी नहीं।"
"तुमने उसको समझाया नहीं कि जो कुछ वह सोच रही थी, वह ठीक नहीं था । "
“ मैंने पूरी कोशिश की और काफी हद तक शादी के बारे में उसकी पस्ती को हटाने में सफल भी हो गया । लेकिन फिर एक गड़बड़ हो गई।"
"क्या ?"
"उसे मालूम हो गया कि सुषमा मुझ से मुहब्बत करने लगी थी । बस, उसी झोंक में उस पर फिल्मी बड़ी दीदी बनने का जुनून सवार हो गया और लगी जिद करने कि मैं सुषमा से शादी कर लूं, सुषमा ही मेरे योग्य पत्नी है और उसकी खुशी इसी में है कि मैं सुषमा को पत्नी बना लूं । "
"क्या तुम भी सुषमा से मुहब्बत करते थे ?"
"मैं कविता के अतिरिक्त किसी भी औरत से मुहब्बत न करता था, न कर सकता हूं। सुषमा को तो मैं एक नासमझ बच्ची समझा करता था जो जीवन के किसी भी पहलू पर गम्भीरता से विचार नहीं कर सकती ।"
"बहरहाल, सुषमा तो तुमसे मुहब्बत करती ही थी ?"
"हां, करती तो थी लेकिन उसकी बाकी बातों की तरह इस बात को भी मैंने कभी गम्भीरता से नहीं लिया था । वह कहा करती थी कि या तो मैं फौरन दीदी से शादी कर लूं या दीदी नहीं मानती तो उससे शादी कर लूं जो मानती है।"
"अर्थात् सुषमा ?”
"हां"
"फिर ?"
"फिर जब कविता की इस विषय में जिद बढ़ती गई और सुषमा भी इस सम्भावित सम्बन्ध के बारे में गम्भीरता से सोचने लगी तो मैं घबरा गया । और घबराहट में अपना वही दस साल पहले वाला एक्शन दोहरा दिया।"
" अर्थात् तुम फिर भाग खड़े हुए ।"
"हां । मैं भारत से भागा और यहां आ गया।”
"आई सी ।" - रत्ना गम्भीरता भरे स्वर में बोली- " आई सी ।”
प्रमोद चुप रहा । उसने जेब से सिगरेट का पैकेट निकाल कर एक सिगरेट सुलगा दिया ।
रत्ना का हाथ मशीन की तरह खुद ही उसकी ओर बढ़ गया । प्रमोद ने एक लम्बा कश लगाकर सिगरेट उसके हाथ में दे दिया ।
रत्ना ने एक छोटा सा कश लगाया । वह कुछ क्षण सिगरेट को उंगलियों में नचाती रही और फिर उसने सिगरेट वापिस प्रमोद की ओर बढ़ा दिया ।
"अब क्या इरादा है ?" - थोड़ी देर बाद रत्ना ने पूछा ।
"वही जो हमेशा था ।" - प्रमोद बोला- "जल्दी ही मैं भारत लौट जाऊंगा और कविता से शादी कर लूंगा । वह शादी के लिये न भी मानेगी तो मुझे उसके समीप रहने का सुख तो प्राप्त होगा ही ।”
" और सुषमा ?"
"सुषमा कोई समस्या नहीं है। अगर कभी थी भी तो अब नहीं है । तुम सुषमा को नहीं जानतीं, रत्ना । वह एक बेहद चंचल स्वभाव की लड़की है । जीवन के किसी भी विषय के प्रति, चाहे वह कितना ही महत्वपूर्ण क्यों न हो, अधिक देर तक गम्भीर नहीं रह सकती। अगर मैं उसकी निगाहों में रहता तो उसका मेरे लिये इश्क का भूत कभी नहीं उतरता । मैं उसके स्वभाव को अच्छी तरह जानता । मैं जानता था कि मेरे निगाहों से दूर होते ही पहले वह बहुत उदास हो जायेगी, फिर मेरे व्यवहार के कारण मुझे हजार-हजार गालियां देगी और फिर धीरे-धीरे मुझे भूल जायेगी । और वास्तव में हुआ भी यही है । पिछले दिनों कविता की चिट्ठी आई थी । कविता ने लिखा था कि सुषमा किसी जोगेन्द्रपाल नाम के युवक में भारी दिलचस्पी लेने लगी है।"
"सुषमा जानती है कि तुम आज कल यहां हो ?"
"नहीं । अगर वह जानती होती तो अब तक जरूर यहां आ धमकी होती ।"
रत्ना कुछ क्षण चुप रही और फिर गहरी सांस लेकर बोली" और अब तुम भारत वापिस लौट जाओगे ?"
"हां ।" - प्रमोद धीरे से बोला ।
"प्रमोद" - रत्ना विषादपूर्ण स्वर से बोली- “सोच रही हूं कि हकीकत जानने की जिद करके मैंने अच्छा नहीं किया। काश ! कोई मुझसे भी उतना प्यार करता जितना तुम कविता से करते हो । काश, उसके प्रति तुम्हारी लगन का दसवां भाग भी मुझे प्राप्त होता ।"
"रत्ना, तुम मुझे..."
“आई विश यू गुड लक, प्रमोद ।" - वह तेजी से लिफ्ट की ओर बढी ।
"लेकिन सुनो तो" - वह रत्ना की बांह थामकर बोला - "जा कहां रही हो ?”
"पीछे। बहुत पीछे । गलती से मैं तुम्हारे रास्ते पर बहुत आगे बढ आई थी ।"
"लेकिन वह ड्रिंक ?”
"फिर कभी सही । इस समय मेरा मूड नहीं है।"
"तुम नाराज हो गई ?"
“बाई गॉड, कतई नहीं । शायद तुम्हें ऐसा लग रहा हो लेकिन वास्तव में ऐसी बात नहीं है। मुझे अपने सन्तुलन के लिये थोड़ा समय चाहिये । ड्रिंक का निमन्त्रण कल तक के लिये स्थगित कर दो ।”
"लेकिन...."
"इट्स आल राइट, मैन ।" - और रत्ना फिर लिफ्ट की ओर बढी ।
"चलो, तुम्हें नीचे तक छोड़ आऊं ।”
"नहीं । प्रमोद, प्लीज । तकल्लुफ मत करो ।”
"हर्ज क्या है ?"
"हर्ज कुछ नहीं है । लेकिन मेरी बात मानो । बाई-बाई ।”
रत्ना लिफ्ट में प्रविष्ट हो गई ।
लिफ्ट का स्वचालित दरवाजा बन्द हो गया ।
दरवाजा बन्द होने से पहले प्रमोद को रत्ना के चेहरे की आखिरी झलक मिली । उसे ऐसा लगा जैसे रत्ना के नेत्रों की कोरों पर आंसुओं की बून्दें झलक रही हों । उसने एक गहरी सांस ली और भारी कदमों से अपने अपार्टमेन्ट की ओर बढा । अपार्टमेन्ट पर पहुंच कर उसने कालबैल का बटन दबाया । दरवाजा खुला । उसे चौखट पर अपना वफादार चीनी नौकर यांग टो खड़ा दिखाई दिया ।
यांग टो प्रमोद का दस साल का साथी था । चीन में पूरे समय यांग टो उसके साथ था। बाद में हांगकांग और भारत में भी उसने साथ नहीं छोड़ा था । यांग टो की हैसियत एक नौकर की नहीं बल्कि एक अभिन्न मित्र की थी। कितनी ही बार उसने प्रमोद की जीवन रक्षा की थी। वह प्रमोद के जीवन का महत्वपूर्ण अंग था | कविता के अतिरिक्त अगर उस के मन में किसी के लिये अनुराग था तो वह यांग टो ही था । वह अपने लबादे की पीठ की ओर एक दस इन्च लम्बा छुरा छुपाये रहता था । जो आवश्यकता पड़ने पर पलक झपकते ही उसके हाथ में आ जाया करता था। उसकी पीठ का वह छुरा न जाने कितनी बार प्रमोद की जीवन रक्षा कर चुका था ।
यांग टो के नेत्रों में एक क्षीण सी चमक थी जिसे प्रमोद अच्छी तरह पहचानता था ।
“क्या बात है ?” - प्रमोद अन्दर कदम रखता हुआ बोला ।
यांग टो ने सावधानी से दरवाजा बन्द किया और भावहीन स्वर से बोला - "मिस्सी पेन्टर लेडी का भाई आया है ।"
"कौन ?” - प्रमोद चौंककर बोला- "युगल ओबेराय ?"
यांग टो ने सहमति से सिर हिलाया ।
"कब आया ?"
"कई घण्टे हो गये ।"
"इतनी रात तक भी वह मेरा इन्तजार करता रहा है तो जरूर कोई गम्भीर बात होगी । है कहां वह ?"
यांग टो ने एक कमरे की ओर संकेत कर दिया । प्रमोद कमरे की ओर बढा ।
यांग टो अपने स्थान पर खड़ा रहा ।
कमरे में बैठा युगल परेशानी में सिगरेट पर सिगरेट फूंके जा रहा था । उसके सामने रखी ऐश ट्रे सिगरेट के टुकड़ों से भरी पड़ी थी । प्रमोद पर दृष्टि पड़ते ही उसने सिगरेट ऐश ट्रे में मसल दिया और उछल कर खड़ा हो गया ।
"नमस्ते ।" - वह ऐसे बोला जैसे आवाज निकालने में दिक्कत हो रही हो ।
"नमस्ते ।" - प्रमोद बोला - "बैठो । "
युगल बैठ गया । वह बेहद नर्वस और परेशान दिखाई दे रहा था ।
"यांग टो!" - प्रमोद ने आवाज दी ।
यांग टो फौरन हाजिर हो गया ।
“मिस्सी पेंटर लेडी के भाई को कुछ पिलाओ।” - प्रमोद बोला ।
युगल जल्दी से बोला - "मुझे किसी चीज की जरूरत नहीं है ।"
यांग टो युगल का विरोध सुनने के लिये रुका नहीं ।
- “जो चीज यांग टो तुम्हारे लिये लाने वाला है" - प्रमोद बोला "उसे पीकर तुम अपनी बात ज्यादा सहूलियत से कह सकोगे ।" -
युगल चुप रहा ।
प्रमोद ने सिगरेट का पैकेट निकाल कर उसकी ओर बढा दिया ।
युगल ने हिचकते हुए एक सिगरेट ले लिया ।
प्रमोद ने पहले युगल का फिर अपना सिगरेट सुलगाया ।
उसी क्षण यांग टो ने युगल के सामने एक लम्बा गिलास रख दिया जो एक लाल रंग के तरल पदार्थ से भरा हुआ था । युगल ने एक ही सांस में गिलास खाली कर दिया । यांग टो खाली गिलास ले गया ।
"इतनी रात तक तुम मेरी प्रतीक्षा करते रहे हो तो जरूर कोई गम्भीर ही बात होगी ।" - प्रमोद बोला ।
“जी हां।" - युगल सिर हिलाता हुआ बोला- “मेरे लिये तो जिन्दगी-मौत का सवाल पैदा हो गया है । "
"क्या हो गया है ?"
"आपने ऐल्डन कोस्टरमैन की लड़की हेजल के अगवा की खबर तो सुन ली होगी ?"
"हां।" - प्रमोद बोला- "ईवनिंग न्यूज में पढ़ी थी । सुना उन लोगों ने कोस्टरमैन से बीस लाख डालर भी हथिया लिये और वादे के अनुसार उसकी लड़की को वापिस भी नहीं लौटाया ।”
“वो ‘लोग' मैं हूं।” - युगल धीरे से बोला ।
“क्या !” - प्रमोद चौंका- "तुमने हेजल का अगवा किया था ?"
"दरअसल अगवा तो नहीं किया गया था । अलबत्ता अगवा का ड्रामा किया गया था ।'
"किस्सा क्या है ?"
"मैं हेजल से मुहब्बत करता था और उससे शादी करना चाहता था । हेजल भी इसके लिये पूरी तरह से तैयार थी । लेकिन हम दोनों के बीच में कोस्टरमैन की दौलत बहुत बड़ी रुकावट थी । कोस्टरमैन करोड़पति था और उसके मुकाबले में मैं बहुत मामूली हैसियत का आदमी हूं । अल्मा कहती थी कि कोस्टरमैन इस शादी के लिये कभी इजाजत नहीं देगा ।”
" अल्मा कौन ?"
"कोस्टरमैन की युवा पत्नी और हेजल की सौतेली मां ।”
"फिर ?"
"हेजल अपने डैडी को बहुत प्यार करती थी । वह कोई ऐसा काम करने से डरती थी जो उस के डैडी को पसन्द न हो । ऐल्डन कोस्टरमैन हार्ट का मरीज था । हेजल कहती थी कि अगर उसने डैडी की मर्जी के खिलाफ शादी की तो डैडी के दिल पर इसका बहुत बुरा प्रभाव पड़ेगा । अल्मा ने हमें एक तरकीब सुझाई । तरीकब खतरनाक तो जरूर थी लेकिन अल्मा ने हमें पूरा विश्वास दिलाया कि वह हमें हर तरह का सहयोग ही नहीं देगी बल्कि कोई गड़बड़ भी नहीं होने देगी |"
"तरकीब क्या थी ?"
"पहले हेजल को चुपचाप न्यूयार्क भेज दिया गया । फिर मैंने कोस्टरमैन को फोन किया कि उसकी लड़की का अगवा कर लिया गया था । अगर उसने बीस लाख डालर की रकम हमें न दी तो हम हेजल की हत्या कर देंगे। अल्मा का काम था इस बात का ख्याल रखे कि कोस्टरमैन पुलिस को रिपोर्ट न करे, नोटों के नम्बर नोट करने या उन पर कोई गुप्त निशान लगाने की कोई चालाकी न करे और साथ ही कोस्टरमैन के दिमाग में यह बात भरती रहे कि रुपया दे देने में ही उसकी और हेजल की भलाई है । कोस्टरमैन को जहां रुपया पहुंचाने के लिये कहा गया था, उसने पहुंचा दिया था ।”
"फिर ?"
"फिर एक के बाद एक ऐसी भयंकर गड़बड़ें होती चली गई कि मेरा दिमाग भन्ना गया ।”
"क्या हुआ ?"
"नोटों से भरा अटैचीकेस लेकर जब मैं अपने बीच वाले केबिन पर पहुंचा तो मुझे हेजल की लाश मिली । अटैचीकेस में नोटों के बदले रद्दी अखबार निकले। मैंने सोचा कि अगर मेरे केबिन में हेजल की लाश पाई गई तो मैं फंस जाऊंगा । मैंने लाश को कहीं फेंक आने का इरादा किया । लाश को कार की डिकी में डालकर रवाना हुआ तो कार बिगड़ गई । मैंने एक दूसरी कार चुराकर लाश को उसमें डाला तो उस कार का एक्सीडेंट हो गया और कार की डिकी में रखी हेजल की लाश कई लोगों के सामने आ गई। बड़ी मुश्किल से मैं वहां से भागा । मैं सहायता की आशा में अल्मा के पास पहुंचा । उसने मुझे पहचानने तक से इन्कार कर दिया । सहायता करना तो दूर, उल्टा उसने मुझ पर यह इलजाम लगाया कि मैंने ही दौलत के लालच में हेजल का गला घोंट दिया था । अब अगर मैं पुलिस के हाथों पड़ गया तो सीधा गैस चैम्बर..."
"ओह !"
"भाई साहब । किसी भी तरह मुझे बचाइये ।”
"युगल" - प्रमोद आश्वासनपूर्ण स्वर में बोला- “धीरज से काम लो ।"
"लेकिन, भाई साहब..."
"पहले मुझे सारी कहानी तफसील से सुनाओ।"
युगल कुछ क्षण चुप रहा फिर शुरू हो गया । प्रमोद बड़े ध्यान से एक-एक शब्द सुनता रहा ।
युगल के चुप होने पर वह बोला- "अब बहुत सोच-समझकर मेरे एक-दो सवालों का जवाब भी दे डालो।”
"पूछिये ।”
"तुम्हारे ख्याल से अल्मा एकाएक सारे बखेड़े से किनारा क्यों कर गई ?”
"या तो वह घबरा गई या बखेड़ा उसकी आशा से बहुत ज्यादा बड़ा हो गया। साथ ही अब वह स्वतंत्र रूप से एक बेहद रईस औरत बनने वाली है। हो सकता है इसी वजह से वह हर प्रकार के स्कैण्डल से बचना चाहती हो ।”
"अल्मा ने तुम पर इल्जाम लगाया कि तुम्हीं ने हेजल का गला घोंट दिया ?"
“जी हां । "
"लेकिन तुमने अल्मा से केवल यह कहा था कि जब तुम केबिन में पहुंचे तो तुम्हें हेजल की लाश मिली। किसी ने हेजल की हत्या कर दी ?"
"जी हां । "
"मगर यह नहीं बताया था कि हत्या कैसे हुई थी ?"
“आप कहना क्या चाहते हैं ?"
"अगर तुम अपने सही होशोहवास में होते तो जो मैं कहना चाहता हूं, वह तुम्हारी समझ में आ गया होता । फिर सोचो, तुमने नहीं बताया तो अल्मा को कैसे मालूम हुआ कि हेजल की हत्या गला घोंटे जाने से हुई थी ?"
प्रमोद का प्रश्न हजार मन के पत्थर की तरह युगल की चेतना से टकराया । वह भौंचक्का सा प्रमोद का मुंह देखने लगा ।
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