हिटलर का जन्म

हिटलर का जन्म 20 अप्रैल, 1889 को शाम 6.30 बजे ऑस्ट्रिया के एक छोटे से गाँव ब्रानउ एम इन में हुआ था, जो जर्मन बवरिया से सीमा के उस पार है।

शायद उसकी नियति में लिखा था कि एक दिन वह ऐसे आंदोलन का नेतृत्व करेगा, जो किसी भी व्यक्ति के वंश-वृक्ष को न केवल सर्वोच्च महत्त्व दिला सकता है बल्कि उसके लिए जीवन एवं मृत्यु का विषय भी बन सकता है। हालाँकि उसका अपना वंश-वृक्ष काफी उलझा हुआ था और उसके लिए आजीवन लज्जा एवं चिंता का विषय बना रहा।

उसके पिता एलोइस का जन्म सन् 1837 में हुआ था। वह मारिया ऐना शिक्लग्रूबर और उसके अज्ञात प्रेमी का नाजायज पुत्र था। वह व्यक्ति या तो कोई पड़ोसी रहा होगा या कोई गरीब मिल-मजदूर, जिसका नाम जोहन जॉर्ज हाइडलर था। किसी हद तक यह भी संभव है कि एडोल्फ हिटलर का दादा यहूदी रहा हो।

मारिया शिक्लग्रूबर को फैंकिनबर्गर नाम के एक धनाढ्य यहूदी परिवार में खाना बनाने का काम मिल गया था। ऐसा संदेह है कि उस परिवार के उन्नीस वर्षीय पुत्र ने उसे गर्भवती बनाया और एलोइस के जन्म के बाद वह उसे बराबर पैसा भेजता रहता था।

एडोल्फ हिटलर कभी नहीं जान पाया कि उसका दादा कौन था।

उसे बस यह पता था कि जब उसका पिता करीब पाँच साल का था, मारिया शिक्लग्रूबर ने जोहन जॉर्ज हाइडलर से विवाह कर लिया। विवाहित जीवन के केवल पाँच वसंत देखने के बाद उसकी मृत्यु हो गई। उसके बाद एलोइस अपने अंकल के पास रहने चला गया, जिसके पास एक छोटा सा खेत था।

तेरह साल की उम्र में किशोर एलोइस ने कृषक जीवन से तौबा कर ली और वह जीवन-यापन की तलाश में वियना शहर की ओर चल पड़ा। वहाँ उसने एक मोची के पास रहकर काम सीखा और बाद में वह ऑस्ट्रिया की प्रशासनिक सेवा में भरती होकर एक कनिष्ठ सीमा शुल्क अधिकारी बन गया। उसने सिविल कर्मचारी के रूप में काफी मेहनत की और आखिरकार एक सुपरवाइजर बन गया। वर्ष 1875 तक उसने वरिष्ठ सहायक निरीक्षक का दर्जा हासिल कर लिया था, जो अल्प औपचारिक शिक्षा प्राप्त एक गरीब किसान युवक के लिए बड़ी उपलब्धि थी।

उस समय एक ऐसी घटना घटी, जिसके कारण उसे भावी जीवन में बड़ी उलझनों का सामना करना पड़ा।

एलोइस हमेशा अपनी माँ के अंतिम नाम शिक्लग्रूबर का प्रयोग किया करता था और इसी कारण उससे हमेशा एलोइस शिक्लग्रूबर कहा जाता था। उसने कभी यह बात छिपाने की कोशिश नहीं की कि वह अवैध संतान है, क्योंकि ग्रामीण ऑस्ट्रिया में यह साधारण बात थी।

लेकिन सिविल सेवा में अपनी सफलता के बाद छोटी किसानी करनेवाले उसके गर्वीले चाचा ने उसे अपना अंतिम नाम बदलकर ‘हाइडलर’ करने के लिए राजी कर लिया, ताकि उसके अपने कुलनाम से मेल खाए और परिवार का नाम आगे चलता रहे। तथापि रिकॉर्ड बुक में नाम दर्ज किए जाते समय ‘हिटलर’ लिखा गया।

इस प्रकार सन् 1876 में 39 साल की उम्र में एलोइस शिक्लग्रूबर का नाम एलोइस हिटलर हो गया। यह बात अहमियत रखती है, क्योंकि यह कल्पना करना मुश्किल है कि हजारों-लाखों जर्मनवासी ‘सलाम हिटलर’ के बजाय ‘सलाम शिक्लग्रूबर’ पुकारते सुने जाएँ।

सन् 1885 में कई प्रेम-संबंधों और दो असफल विवाहों के बाद 48 वर्षीय विधुर एलोइस हिटलर ने चाचा हाउलर की गर्भवती पौत्री 24 वर्षीय क्लारा पॉल्जल से विवाह कर लिया। तकनीकी रूप से वह उसकी अपनी भतीजी थी, क्योंकि उसने अपना नाम बदल लिया था और इसी कारण उसे कैथोलिक चर्च से विशेष अनुमति लेनी पड़ी थी।

उसकी पिछली शादी से उत्पन्न उसके बच्चे एलोइस हिटलर जूनियर और एंजेला शादी में शामिल हुए और बाद में उनके साथ रहे। क्लारा पॉल्जल ने अंतत: दो लड़कों एवं एक लड़की को जन्म दिया, लेकिन उनमें से कोई भी नहीं बचा। 20 अप्रैल, 1889 को उसकी चौथी संतान एडोल्फ का जन्म हुआ। वह एक तंदुरुस्त बच्चा था और उसका नामकरण-संस्कार एक रोमन कैथोलिक के रूप में किया गया। उस समय हिटलर के पिता की उम्र 52 साल थी।

उसके बचपन के दौरान छोटे एडोल्फ की माँ को हर समय उसके जीवन की चिंता लगी रहती थी और इसीलिए वह उसका बहुत ध्यान रखती थी और हरदम अपना प्यार उस पर उड़ेलती रहती थी। उसके पिता अधिकतर व्यस्त रहते थे। उन्हें ‘मधुमक्खी-पालन’ का बहुत शौक था और वह काम करने के अलावा अपने इस शौक पर बहुत समय बिताते थे।

नन्हे एडोल्फ का पुकारने का संक्षिप्त नाम एडि था। सन् 1893 में, जब वह करीब पाँच साल का था, उसकी माँ ने एक और लड़के को जन्म दिया, जिसका नाम एडमंड रखा गया। सन् 1896 में उसकी एक बहन पौला का जन्म हुआ।

सन् 1895 में, जब वह छह साल का था, एडोल्फ हिटलर ने लिंज, ऑस्ट्रिया के निकट फिचहैम नामक गाँव में स्थित पब्लिक स्कूल में पहले दर्जे में दाखिला लिया।