तीन घण्टे के अन्दर-अन्दर पूरे डिपार्टमेंट को मालूम हो गया कि इमरान ने इस्तीफा दे दिया है....इस ख़बर पर सबसे ज़्यादा ख़ुशी कैप्टन फ़ैयाज़ को हुई....वह इमरान का दोस्त ज़रूर था, लेकिन उसी हद तक जहाँ ख़ुद उसके फ़ायदे को ठेस न लगती हो....इमरान के बाक़ायदा नौकरी में आ जाने के बाद से उसकी इज़्ज़त खतरे में पड़ गयी थी।

नौकरी में आ जाने से पहले इमरान ने कुछ केसों के सिलसिले में उसकी जो मदद की थी उसकी बिना पर उसकी साख बन गयी थी, लेकिन इमरान के नौकरी में आते ही अमली तौर पर फ़ैयाज़ की हैसियत ज़ीरो के बराबर भी नहीं रह गयी थी।

‘‘इमरान डियर!’’ फ़ैयाज़ उससे कह रहा था। ‘‘मुझे अफसोस है कि तुम्हारा साथ छूट रहा है।’’

‘‘किसी दुश्मन ने उड़ायी होगी!’’ इमरान ने लापरवाही से कहा....फिर फ़ैयाज़ का कन्धा थपकता हुआ बोला। ‘‘नहीं दोस्त! मैं क़ब्र में भी तुम्हारा साथ नहीं छो़ड़ूँगा! फ़िलहाल अपने बँगले के दो कमरे मेरे लिए ख़ाली करा दो।’’

‘‘क्या मतलब?’’

‘‘वालिद साहब कहते हैं कि मैं अब उनकी कोठी में क़दम भी नहीं रख सकता, हालाँकि मुझे यक़ीन है कि मैं रख सकता हूँ।’’

‘‘ओह....अब मैं समझा....शायद इसकी वजह वह औरत है!’’ फ़ैयाज़ हँसने लगा।

‘‘हाँ, वह औरत!’’ इमरान आँखें फाड़ कर बोला। ‘‘तुम मेरे बाप को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हो....शट अप यू फ़ूल!’’

‘‘मेरा मतलब यह था....!’’

‘‘नहीं! बिलकुल शट अप! ख़बरदार, होशियार....तुम मेरी बात का जवाब दो! कमरे ख़ाली कर रहे हो....या नहीं?’’

‘‘यार, बात दरअसल यह है कि मेरी बीवी....क्या वह औरत भी तुम्हारे साथ ही रहेगी।’’

‘‘उसका नाम रूशी है।’’

‘‘ख़ैर, कुछ हो! हाँ, तो मेरी बीवी कुछ और समझेगी।’’

‘‘क्या समझेगी।’’

‘‘यही कि वह तुम्हारी नौकरानी है।’’

‘‘लाहौल विला क़ूवत....मैं तुम्हारी बीवी की बहुत इज़्ज़त करता हूँ।’’

‘‘मैं उस औरत के बारे में कह रहा था।’’ फ़ैयाज़ झेंपा भी और झल्ला भी गया।

‘‘ओह तो ऐसे बोलो ना! अच्छा ख़ैर....अगर तुम बँगले में जगह नहीं देना चाहते तो वह फ़्लैट ही मुझे दे दो जिसे तुम पगड़ी पर उठाने वाले हो।’’

‘‘कैसा फ़्लैट?’’ फ़ैयाज़ चौंक कर उसे घूरने लगा।

‘‘छोड़ो यार! अब क्या मुझे यह भी बताना पड़ेगा कि तुमने चार-पाँच फ़्लैटों पर नाजायज़ तौर पर क़ब्ज़ा कर रखा है!’’

‘‘ज़रा धीरे से बोलो! गधे कहीं के!’’ फ़ैयाज़ चारों तरफ़ देखता हुआ बोला।

‘‘फ़रमान बिल्डिंग वाले फ़्लैट की चाभी मेरे हवाले करो। समझे!’’

‘‘ख़ुदा तुम्हें ग़ारत करे!’’ फ़ैयाज़ उसे घूँसा दिखाता हुआ दाँत पीस कर बोला।