एडोल्फ हिटलर की अंतिम इच्छा
चूँकि मैं, संघर्षशील वर्षों के दौरान, स्वयं को विवाह की जिम्मेदारी उठाने योग्य नहीं समझता था, इसलिए मैंने संसार में अपने जीवन के दिन समाप्त होने से पहले उस लड़की से विवाह रचाने का निश्चय किया है, जो अनेक वर्षों की सच्ची दोस्ती के बाद मेरे साथ अपना भाग्य बाँटने के लिए अपनी स्वतंत्र इच्छा से इस शहर में आ गई है, जिस पर वास्तव में चारों ओर से घेरा पड़ा हुआ है। मेरी मृत्यु को निकट देखकर भी वह स्वेच्छा से मेरी पत्नी बनना चाहती है। हम दोनों ने लोगों की सेवा में कार्य करते हुए जो कुछ खोया है, यह विवाह उसकी भरपाई कर देगा।
मेरे पास जो कुछ भी है, वह सब पार्टी का है, भले ही उसकी कीमत कुछ भी न हो। यदि यह वसीयत नष्ट हो जाती है तो मेरी सारी संपत्ति राज्य की होगी और अगर राज्य भी नष्ट कर दिया जाता है, तब तो मेरे किसी निर्णय की जरूरत ही नहीं होगी।
अनेक वर्षों के दौरान मैंने खरीदकर चित्रों का जो संग्रह किया है, उसमें मेरे बनाए चित्र भी हैं और इन चित्रों का संग्रहण निजी प्रयोजनों के लिए नहीं किया गया है, बल्कि इसका उद्देश्य दोनाउ पर बसे मेरे गृह-नगर लिंज में एक गैलरी का विस्तार करना था।
मेरी यह हार्दिक इच्छा है कि इस वसीयत को विधिवत् लागू किया जाए।
मैं अपने अत्यंत विश्वसनीय पार्टी कामरेड मार्टिन बोर्मैन को अपने निष्पादक की हैसियत से नामजद करता हूँ।
उसे कोई भी निर्णय लेने का पूरा कानूनी अधिकार दिया जाता है।
उसे अनुमति है कि जिस किसी चीज का भी कोई भावनात्मक मूल्य है या जो कुछ भी ऐसा है, जिसे वह मेरे भाइयों तथा बहनों और मेरी पत्नी की माँ और मेरे उन वफादार सह-कर्मियों, जिन्हें वह भली-भाँति जानता है और जिन्होंने वर्षों तक अपने काम से मेरी मदद की है, मुख्य रूप से मेरे पुराने सचिव फ्राउविंटर आदि के लिए सीधा-सादा जीवन बनाए रखने की दृष्टि से आवश्यक समझता है, उसे वह बाहर ले जा सकता है।
स्वयं मैंने और मेरी पत्नी ने सत्ता से वंचित होने या आत्मसमर्पण के अपमान से बचने के लिए मृत्यु को चुना। हमारी यह इच्छा है कि जहाँ रहकर मैंने लोगों की सेवा में बारह वर्षों तक रोजाना जी-जान से अपने कर्तव्य का निर्वाह किया है, हमारी मृत्यु के बाद हमें तत्काल उसी स्थान पर जला दिया जाए।
29 अप्रेल, 1945 को सुबह 4.00 बजे बर्लिन में प्रदत्त
(हस्ताक्षरित) ए. हिटलर
(साक्षी)
डॉ. जोसेफ गॉबेल्स
मार्टिन बोर्मैन
कर्नल निकोलस वॉन बिलो
राजनीतिक वसीयतनामे का पहला भाग
वर्ष 1914 में जब मैंने जर्मन साम्राज्य पर थोपे गए प्रथम विश्व युद्ध में एक स्वयंसेवक के रूप में अपना मामूली सा योगदान किया, उस समय से अब तक तीस वर्ष से अधिक बीत चुके हैं।
इन तीन दशकों में मेरे देश के लोगों के प्रति प्रेम एवं निष्ठा ने ही मेरे सभी विचारों, कार्यों एवं जीवन में प्रेरणा प्रदान की है। उन्होंने मुझे ऐसे-ऐसे अत्यंत कठिन निर्णय लेने की सामर्थ्य दी, जिनका सामना नश्वर प्राणी को शायद ही कभी करना पड़ा हो। मैंने इन तीन दशकों में न केवल अपना समय बल्कि अपनी काम करने की क्षमता भी खर्च की है।
यह कहना गलत है कि मैं या जर्मनी में कोई भी अन्य व्यक्ति वर्ष 1939 में युद्ध चाहता था। युद्ध की इच्छा उन अंतरराष्ट्रीय राजनेताओं की थी और उन्होंने ही युद्ध को भड़काया था, जो या तो यहूदी वंश के थे या यहूदी हितों के लिए काम करते थे। मैंने सशस्त्रीकरण को नियंत्रित एवं सीमित करने हेतु अनेक प्रस्ताव प्रस्तुत किए हैं और उन्हें देखकर भावी पीढ़ी इस युद्ध के भड़कने की जिम्मेदारी का दोष कभी मेरे ऊपर नहीं डालेगी। इसके अलावा मैंने कभी यह नहीं चाहा कि पहले विनाशकारी विश्व युद्ध के बाद इंग्लैंड या फिर अमेरिका के विरुद्ध कोई दूसरा युद्ध भड़क उठे। भले ही सदियाँ बीत जाएँ, फिर भी हमारे शहरों एवं स्मारकों के खंडहरों से उनके खिलाफ नफरत का ज्वार उठता रहेगा, जो इसके लिए वस्तुत: जिम्मेदार हैं और जिन्हें हम हर विपत्ति का कारण मानते हैं—अंतरराष्ट्रीय यहूदी समुदाय और उनके मददगार।
जर्मनी-पोलैंड युद्ध शुरू होने के तीन दिन पहले मैंने बर्लिन में ब्रिटेन के राजदूत के सामने जर्मन-पोलैंड समस्या के लिए कोई समाधान तलाशने का पुन: प्रस्ताव रखा—यह समाधान कुछ उसी तरह का हो सकता था जैसा सार जिले के मामले में अंतरराष्ट्रीय नियंत्रण के तहत किया गया था। इस प्रस्ताव से भी इनकार नहीं किया जा सकता था। इस प्रस्ताव को इसलिए अस्वीकार किया गया, क्योंकि इंग्लैंड की राजनीति में प्रमुख सूत्रधार युद्ध चाहते थे। इससे एक तो उनको व्यवसाय में तेजी आने की उम्मीद थी और दूसरे अंतरराष्ट्रीय यहूदी समुदाय ने शोर-शराबा मचाकर युद्ध का माहौल बना दिया था।
मैंने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि अगर यूरोप के देशों की यही इच्छा है कि उन्हें रुपया-पैसा और राजधन में इन अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्रकारियों द्वारा खरीदे और बेचे जानेवाले मात्र शेयरों के रूप में देखा जाए तो उस जाति, यहूदी संप्रदाय, जो इस विनाशकारी युद्ध का असली अपराधी है, पर जिम्मेदारी का बोझ आ जाएगा। मैंने फिर किसी को भी इस संदेह में नहीं छोड़ा कि इस बार न केवल यूरोप की आर्य जाति के लोगों के लाखों बच्चे भूख से मरेंगे, न केवल लाखों वृद्ध लोगों को मौत का सामना करना पड़ेगा और न केवल हजारों-लाखों औरतों एवं बच्चों को शहरों में जला दिया जाएगा तथा बमबारी में मार दिया जाएगा, बल्कि असली अपराधी को इस अपराध के लिए प्रायश्चित्त भी नहीं करना पड़ेगा, अधिक मानवोचित उपायों द्वारा भी नहीं।
इतिहास में एक दिन ऐसा भी होगा, जब छह साल तक चले इस युद्ध को सारी बाधाओं, रुकावटों के बावजूद एक राष्ट्र के जीवन भर के उद्देश्य को पूरा करने की दिशा में अत्यंत गौरवशाली एवं पराक्रम-प्रदर्शन के रूप में देखा जाएगा। लेकिन इन छह वर्षों के बाद मैं उस शहर को नहीं त्याग सकता, जो इस राइक की राजधानी है। क्योंकि हमारा सैन्य बल इतना कम है कि इस स्थान पर शत्रु के आक्रमण का मुकाबला करना उसके लिए संभव नहीं होगा और चूँकि हमारी प्रतिरोधक शक्ति उन लोगों के कारण धीरे-धीरे कमजोर होती जा रही है, जो उतने ही बहके हुए हैं जितनी उनकी पहल-शक्ति जवाब दे रही है, मैं इस शहर में ही रहकर अपना भाग्य उन लाखों दूसरे लोगों के साथ बाँटना चाहूँगा, जिन्होंने ऐसा ही करने का बीड़ा उठाया है। इसके अलावा, मैं किसी ऐसे शत्रु के हाथों में नहीं पड़ना चाहता हूँ, जो अपने उन्मत्त जनसमूह के मनोरंजन हेतु यहूदियों द्वारा एक नए तमाशे का आयोजन करने की इच्छा रखते हैं।
अत: मैंने बर्लिन में बने रहने का निश्चय किया है और उसके बाद जिस क्षण मुझे ऐसा महसूस होगा कि मैं फ्यूहरर और चांसलर की पदवी व प्रतिष्ठा को अधिक देर तक कायम नहीं रख सकता, मैं स्वेच्छा से मृत्यु का वरण कर लूँगा।
मैं हर्षित हृदय के साथ मृत्यु को गले लगाऊँगा, क्योंकि मुझे इस बात की खुशी है कि हमारे सैनिकों ने मोरचे पर अनगिनत उपलब्धियाँ हासिल की हैं। हमारी महिलाओं ने घर पर रहकर उल्लेखनीय कार्य किया है। हमारे किसानों और मजदूरों ने अथक परिश्रम किया है और मेरा नाम लेकर चलनेवाले हमारे युवकों ने जो शानदार काम किया है, वह इतिहास के पन्नों में अद्वितीय रहेगा।
यह सच्चाई कि मैं अपने अंत:करण से आपके प्रति धन्यवाद प्रकट कर रहा हूँ, ठीक उसी तरह स्वत: स्पष्ट है जितनी मेरी यह इच्छा कि उसके कारण आपको किसी भी हालत में संघर्ष छोड़ना नहीं होगा, बल्कि उस संघर्ष को पितृभूमि के शत्रुओं के खिलाफ जारी रखना होगा। संघर्ष कहीं भी हो, आपको महान् ब्लाजविट्ज का वंशज होने का सही परिचय देना होगा। हमारे सैनिकों के बलिदान और मृत्यु-पर्यंत उनके साथ मेरी एकता से जर्मनी के इतिहास में निश्चय ही राष्ट्रीय समाजवादी आंदोलन की नवचेतना का तेजस्वी बीज उत्पन्न होगा और इस प्रकार राष्ट्रों के सच्चे समुदाय अर्थात् लोक-समाज का उदय होगा।
अत्यधिक साहसी पुरुषों और स्त्रियों में से बहुतों ने अपना जीवन आखिरी दम तक मेरे जीवन के साथ जोड़ दिया है। मैंने उनसे निवेदन किया है और अंतत: आज्ञा दी है कि वे ऐसा न करें, बल्कि देश के आगे के संघर्ष में भाग लें। मैं अपनी सेनाओं, नौसेना और वायु सेना के प्रमुखों से निवेदन करता हूँ कि वे राष्ट्रीय समाजवाद के हित में हमारे सैनिकों की प्रतिरोधक शक्ति को मजबूत करें और इस बात का विशेष उल्लेख करें कि इस आंदोलन के संस्थापक और निर्माता के रूप में स्वयं मैंने भी कायरों की तरह राज्य-त्याग या आत्मसमर्पण करने के बजाय मर जाना बेहतर समझा है। मैं कामना करता हूँ कि यह भावना आगे चलकर किसी समय जर्मन सेना अधिकारियों के लिए गौरव का प्रतीक अवश्य बने—जैसा कि हमारी नौसेना में पहले से होता आया है—कि किसी जिला या शहर का समर्पण असंभव है और जिसकी मुख्य शिक्षा यह है कि कमांडरों को ज्वलंत मिसाल पेश करते हुए ईमानदारी से मृत्यु-पर्यंत अपना कर्तव्य पूरा करने की भावना के साथ निश्चयपूर्वक आगे बढ़ते रहना चाहिए।
राजनीतिक वसीयतनामे का दूसरा भाग
अपनी मृत्यु से पहले मैं पूर्व राइक मार्शल हरमैन गोरिंग को पार्टी से निष्कासित करता हूँ और उसे उन सभी अधिकारों से वंचित करता हूँ, जिनका प्रयोग वह 29 जून, 1941 के आदेश के तहत और 1 सितंबर, 1939 को राइचस्टैग में मेरे वक्तव्य के आधार पर भी कर सकता है। मैं उसके स्थान पर ग्रोस एडमिरल डोनिट्ज को राइक का राष्ट्रपति और सशस्त्र सेनाओं का सर्वोच्च कमांडर नियुक्त करता हूँ।
अपनी मृत्यु से पहले मैं पूर्व राइक फ्यूहरर एस.एस. और गृह मंत्री हेनरिक हिमलर को पार्टी से और राज्य के सभी पदों से हटाता हूँ। उसके स्थान पर मैं ग्राउलाइटर कार्ल हैंक को राइक फ्यूहरर एस.एस. तथा जर्मन पुलिस प्रमुख नियुक्त करता हूँ और गाउलाइटर पॉल गिस्लर को राइक का गृह मंत्री।
गोरिंग और हिमलर ने मेरे प्रति विश्वासघात करने के अलावा शत्रु के साथ गुप्त सौदेबाजी करके देश और समस्त राष्ट्र को अत्यधिक नुकसान पहुँचाया है। उन्होंने उस बारे में मुझे न तो कोई जानकारी दी और न ही मेरी इच्छा जानने की कोशिश की। उन्होंने राज्य में अवैध रूप से सत्ता हथियाने का भी प्रयास किया है (इसके पश्चात् हिटलर ने कई सरकार के सदस्यों के नाम दिए हैं)।
यद्यपि कई व्यक्ति जैसे कि मार्टिन बोर्मैन, डॉ. गॉबेहल्स आदि अपनी पत्नियों सहित अपनी स्वेच्छा से मेरा साथ देने चले आए हैं और वे किसी भी स्थिति में राइक की राजधानी छोड़ना नहीं चाहते, बल्कि वे यहीं मेरे साथ मर जाने के लिए तैयार हैं, फिर भी मैं चाहूँगा कि वे मेरा अनुरोध मानें और इस मामले में देश के हितों को अपनी निजी भावनाओं से ऊपर रखें। कामरेड के रूप में अपने कार्य एवं वफादारी के कारण मेरी मृत्यु के बाद भी वे मेरे इतने ही करीब रहेंगे, जैसी कि मैं आशा करता हूँ कि मेरी आत्मा हमेशा उनके बीच एवं उनके साथ रहेगी। भले ही वे कठोर बनें, लेकिन कभी अन्याय न करें और सबसे महत्त्वपूर्ण यह होगा कि वे भयभीत होकर कोई कार्य या निर्णय न करें और राष्ट्र के सम्मान को सबसे ऊपर रखें। अंतत: मैं चाहूँगा कि वे इस बात का हमेशा ध्यान रखें कि हमें राष्ट्रीय समाजवादी राज्य का निर्माण करने का काम जारी रखना है। यह काम आने वाली सदियों के लिए उदाहरण बनेगा। यह ऐसा कार्य है, जो हर व्यक्ति को यह जिम्मेदारी सौंपता है कि वह हमेशा लोकहित में काम करे और इसी में अपना लाभ देखे। सभी जर्मन लोगों, सभी राष्ट्रीय समाजवादी, पुरुषों एवं स्त्रियों और सशस्त्र सेनाओं के समस्त सदस्यों से मेरी यह अपेक्षा है कि वे नई सरकार और उसके अध्यक्ष के प्रति मृत्युपर्यंत वफादार एवं आज्ञाकारी बने रहें।
इन सारी बातों के अतिरिक्त मैं देश के नेताओं तथा उनके अनुयायियों को यह उत्तरदायित्व सौंपता हूँ कि वे जाति की परंपराओं एवं नियमों का ईमानदारी से पालन करें और उस जाति का निष्ठुर होकर विरोध करें, जो दुनिया भर के लोगों में विष का संचार करती है—अंतरराष्ट्रीय यहूदी समुदाय।
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