हिटलर की मौत

अप्रेल 1945 में हिटलर बर्लिन में स्थित चांसलरी की इमारत के 50 फीट नीचे बने फ्यूहरर बंकर में चला गया। इस भूमिगत कॉम्पलेक्स में दो अलग-अलग तलों पर करीब 32 कमरे थे। हिटलर वहाँ अपने सैनिक अधिकारियों के साथ रोजाना बैठक करके बाहर के हालात का जायजा लिया करता था। उसे खबरें मिल रही थीं कि रूस की सेनाएँ बर्लिन की ओर बढ़ रही हैं और उन्हें रोकना मुमकिन नहीं है। उसने क्रोध में उन्मत्त होकर अपनी सेनाओं को आदेश जारी किए कि किसी भी तरह बर्लिन को बचाया जाए; लेकिन असलियत यह थी कि उसकी काफी फौज का पहले ही सफाया हो चुका था या बची हुई फौज अमेरिकियों के आगे समर्पण करने के लिए तेजी से पश्‍चिम की ओर पीछे हट रही थी।

22 अप्रेल को बंकर में सैनिक अधिकारियों के साथ तीन घंटे तक चली बैठक के दौरान हिटलर ने पागलपन के दौरे में चीखते-चिल्लाते हुए सेना की तीखी आलोचना की और उन सभी लोगों पर ‘सार्वत्रिक विश्‍वासघात, भ्रष्टाचार, झूठ और विफलताओं’ का आरोप लगाया, जो उसका साथ छोड़कर भाग गए थे। हिटलर ने चिल्लाकर कहा कि अंत आ गया है। उसका साम्राज्य (राइक) विफल हुआ और अब उसके पास बर्लिन में टिके रहकर आखिरी दम तक लड़ने के सिवा कोई चारा नहीं बचा है।

हिटलर के स्टाफ ने उसे बहुत समझाने-बुझाने की कोशिश की कि वह बर्शतिस्गेडन के आस-पास की पहाड़ियों से बचकर निकल जाए और वहाँ से अपने बाकी सैनिकों का निर्देशन करे, ताकि राइक को अधिक समय तक बचाए रखा जा सके, पर हिटलर ने उनकी बात नहीं सुनी। हिटलर ने उन्हें कह दिया कि उसका निर्णय अंतिम है। बल्कि उसने यह भी कह दिया कि उसके निर्णय की सार्वजनिक घोषणा कर दी जाए।

इसके बाद प्रचार मंत्री जोसेफ गॉबेल्स अपने पूरे परिवार को ले आया, ताकि उसका परिवार और उसके छह युवा बच्चे भी हिटलर के साथ बंकर में रह सकें। हिटलर ने अपने कागज-पत्रों को छाँटना शुरू कर दिया और उन दस्तावेजों को अलग किया, जिन्हें जलाकर नष्ट किया जाना था।

बंकर में जितने भी कर्मचारी थे, हिटलर ने उन्हें जाने की आज्ञा दे दी। उनमें से अधिकतर लोग ट्रकों और विमानों के संरक्षण में बर्शतिस्गडेन के निकट दक्षिणी इलाके की ओर चले गए। हिटलर के कुछ थोड़े से वैयक्तिक कर्मचारी रह गए, जिनमें उसका सर्वोच्च सहायक अधिकारी मार्टिन बोर्मेन, गॉबेल्स परिवार, एस.एस. तथा सैनिक परिसहायक, हिटलर के दो सचिवों के अलावा उसकी लंबे समय की संगिनी ईवा ब्रॉन भी शामिल थी।

23 अप्रेल को हिटलर का मित्र और शस्त्रीकरण मंत्री अलबर्ट स्पीयर फ्यूहरर से आखिरी मुलाकात करने के लिए आया। इस भेंट में स्पीयर ने हिटलर को साफ तौर पर बता दिया कि उसने फ्यूहरर की ‘घर-फूँक नीति’ को नहीं माना और जर्मन कारखानों एवं उद्योग को युद्धोपरांत समय के लिए बचाकर रखा। हिटलर ने खामोशी से उसकी बात सुनी और कोई तर्क भी नहीं किया। स्पीयर के लिए यह अचंभे की बात थी।

उसी दिन दोपहर बाद हिटलर को गोरिंग से अचानक एक तार मिला। हालाँकि गोरिंग सही-सलामत बर्शतिस्गडेन पहुँच गया था—

मेरे फ्यूहरर!

आपके इस फैसले को ध्यान में रखते हुए कि आप बर्लिन के किले के अंदर ही रहेंगे, क्या आप इस बात से सहमत हैं कि मुझे आपके डिप्टी की हैसियत से घर और विदेश में काररवाई की पूरी स्वतंत्रता के साथ राइक का समस्त नेतृत्व तुरंत अपने हाथ में ले लेना चाहिए, जिसकी व्यवस्था 29 जून, 1941 के आपके आदेश में की गई है? अगर आज रात 10 बजे तक कोई उत्तर प्राप्त नहीं हुआ तो मैं यह समझ लूँगा कि आपने कार्य करने की अपनी आजादी खो दी है और मैं आपके आदेश की सभी शर्तों को पूरा हुआ मान लूँगा तथा अपने देश और अपने लोगों के सर्वोत्तम हित में काम करूँगा। आप जानते हैं कि मेरे जीवन की इस गंभीरतम परिस्थिति में आपके बारे में सोचकर मुझे क्या महसूस हो रहा होगा। अपनी बात व्यक्त करने के लिए मेरे पास शब्द कम पड़ गए हैं। ईश्‍वर आपकी रक्षा करे और आपको जल्दी यहाँ पहुँचाने का रास्ता खोले। आपका विश्‍वासभाजन, 

हरमैन गोरिंग

गुस्साए हिटलर ने बोर्मेन द्वारा उकसाए जाने पर गोरिंग को एक जवाबी संदेश भेजकर सूचित किया कि उसने ‘घोर विश्‍वासघात’ किया है। यद्यपि इस अपराध की सजा मौत है, फिर भी अगर वह तत्काल अपने सभी पदों से इस्तीफा दे दे तो गोरिंग को उसकी लंबी सेवा का लिहाज करते हुए बख्श दिया जाएगा। तत्पश्‍चात् बोर्मैन ने बर्शतिस्गडेन के निकट एस.एस. को एक आदेश भेजा कि गोरिंग और उसके कर्मचारियों को तुरंत गिरफ्तार कर लिया जाए। 25 अप्रेल को सुबह से पहले ही गोरिंग जेल की सलाखों के पीछे था।

अगले दिन 26 अप्रेल को रूस की तोपों ने पहली बार चांसलरी की इमारत और फ्यूहरर बंकर के ऊपर के हाते को निशाना बनाकर गोले दागे। उस शाम एक दिलेरी भरी लड़ाई के बाद एक छोटा विमान, जिसमें महिला टेस्ट पायलट हाना राइट्स तथा लुफ्ट वॉफ (जर्मन वायुसेना) जनरल रिटर वॉन ग्राइम थे, बंकर के निकट सड़क पर उतर गया। उस लड़ाई में सोवियत सेना द्वारा जमीन से की गई गोलीबारी में ग्राइम का पाँव जख्मी हो गया था।

घायल ग्राइम जब फ्यूहरर बंकर के अंदर पहुँचा, हिटलर ने उसे बताया कि उसे गोरिंग का उत्तराधिकारी बनाया जा रहा है, अर्थात् उसे पदोन्नति देकर लुफ्ट वॉफ का फील्ड-मार्शल-इन-कमांड नियुक्त किया जा रहा है।

हालाँकि यह सूचना तार द्वारा भी दी जा सकती थी, फिर भी हिटलर का आग्रह था कि ग्राइम यह नियुक्ति-पत्र लेने के लिए स्वयं उसके पास आए। लेकिन अब, पैर में चोट के कारण, ग्राइम के लिए तीन दिन तक बंकर में बिस्तर पर पड़े रहना जरूरी हो गया था।

27 अप्रैल की रात को चांसलरी की इमारतों को निशाना बनाकर रूस की बमबारी चरम सीमा पर पहुँच गई और कई बम तो सीधे उन भवनों पर ही जाकर पड़े। हिटलर ने काइटेल को एक के बाद एक कई तार भेजकर बर्लिन को सेना से मुक्त (सेना अब वहाँ थी ही कहाँ) करने की माँग की। अंतिम आघात 28 तारीख को लगा, जब हिटलर को गॉबेल्स के प्रचार मंत्रालय के जरिए यह सूचना प्राप्त हुई कि ब्रिटेन की समाचार-सेवा यह खबर दे रही है कि एस.एस. राइक फ्यूहरर हेनरिक हिमलर ने मित्र राष्ट्रों के साथ बातचीत की पेशकश की है और यह प्रस्ताव भी किया है कि पश्‍चिम में जर्मन सेनाएँ आइजनहावर के समक्ष आत्मसमर्पण करने के लिए तैयार हैं।

बंकर में चश्मदीद गवाहों के अनुसार, हिटलर ‘गुस्से से पागल हो गया’। उसके क्रोध की ऐसी प्रचंडता पहले कभी नहीं देखी गई थी। हिमलर शुरू से ही हिटलर का साथ देता रहा था और उसके इसी गुण की वजह से उसका दूसरा नाम ‘स्वाभिभक्त हिमलर’ पड़ गया था। हिमलर ने वर्षों तक अपने फ्यूहरर के हर पागलपन, दुष्कृत्यों में उसका साथ दिया था। उसी फ्यूहरर ने आज हिमलर की गिरफ्तारी का हुक्म जारी कर दिया।

तत्काल प्रतिशोध की भावना से उत्तेजित होकर हिटलर ने आदेश दिया कि बंकर में मौजूद हिमलर के वैयक्तिक प्रतिनिधि एस.एस. ले. जनरल हरमैन फेजलाइन, जो ईवा ब्रॉन की बहन का पति भी था, को बंकर के ऊपर चांसलरी उद्यान में लाकर गोली से उड़ा दिया जाए।

हिटलर ने जब यह देख लिया कि गोरिंग और हिमलर उसका साथ छोड़ गए हैं तथा सोवियत सेना बर्लिन में अंदर तक कूच कर गई है, तब उसने अपनी मौत की तैयारी शुरू कर दी।

28 तारीख को देर रात गए उसने अपनी अंतिम इच्छा लिखवाई और दो भागों का एक राजनीतिक वसीयतनामा भी लिखवाया, जिसमें उसने बहुत सी उन्हीं भावनाओं को व्यक्त किया, जो भावनाएँ उसने वर्ष 1923-24 में ‘मैन कैंफ’ में प्रकट की थीं। उसने द्वितीय विश्‍व युद्ध समेत हर बात के लिए यहूदियों को दोष दिया। उसने यहूदियों के विरुद्ध सन् 1939 में दी गई अपनी धमकी का भी जिक्र किया और उसके साथ ही बाद में गैस कोठरियों का भी अस्पष्ट-सा उल्लेख किया।

‘‘इसके अलावा मैंने किसी को भी संदेह में नहीं रखा कि इस बार न केवल यूरोप की आर्य जाति के लोगों के लाखों-करोड़ों बच्चे भूख से मरेंगे, न केवल लाखों लोग काल का ग्रास बनेंगे और न केवल हजारों-लाखों औरतों व बच्चों को जला दिया जाएगा एवं शहरों में बमबारी करके मार दिया जाएगा, बल्कि वास्तविक अपराधी को इस अपराध के लिए मानवीय आधार पर भी प्रायश्‍चित्त करने का अवसर नहीं मिलेगा।’’

मध्य रात्रि से पहले ही उसने एक छोटे से समारोह में ईवा ब्रान से विवाह कर लिया। फिर उसके बाद हिटलर के निजी कमरों में एकत्र होकर प्रियजनों के साथ शादी की खुशी मनाई गई। शैंपेन निकाली गई और जो लोग बंकर में रह गए थे, उन्होंने हिटलर को अच्छे दिनों की याद करते हुए सुना। वे दिन जो अब बीत चुके थे। पर हिटलर ने यादों के सिलसिले के अंत में कहा कि उसके सबसे पुराने दोस्तों और समर्थकों की दगाबाजी के बाद मृत्यु में ही उसको सुकून मिलेगा।

29 अप्रेल की दोपहर तक सोवियत सेनाएँ फ्यूहरर बंकर से करीब 1 मील की दूरी पर थीं। बंकर के अंदर बाहर की दुनिया से यह खबर मिली कि मुसोलिनी मारा जा चुका है। इटली के हिमायतियों ने उसे पकड़कर मार डाला, फिर उसे उलटा लटका दिया और नाले में फेंक दिया गया।

हिटलर को अब महसूस हुआ कि उसका अंत कैसा हो सकता है! यही सोचकर उसने अपने विष का परीक्षण अपने प्रिय कुत्ते ब्लौंडी पर किया। उसने अपनी महिला सचिवों को भी जहर के कैप्सूल दिए और क्षमा माँगी कि उसके पास विदा होने से पहले देने के लिए इससे बेहतर कोई उपहार नहीं है। अगर सोवियत सैनिक बंकर में घुस आएँ तो वे इन कैप्सूलों का प्रयोग कर सकती हैं।

30 अप्रेल की सुबह लगभग 2.30 बजे हिटलर अपने निजी कमरों से निकलकर भोजन-कक्ष में अपने स्टाफ सदस्यों से विदा लेने के लिए आया। चमकदार आँखों के साथ उसने खामोशी से हर एक से हाथ मिलाया और फिर अपने कमरों में चला गया। हिटलर के जाने के बाद उन अधिकारियों एवं स्टाफ सदस्यों ने इस बात पर सोच-विचार किया कि उन्होंने जो अभी देखा, उसका क्या मतलब है? पिछले दिनों का भीषण तनाव यह सोचकर अचानक काफूर हो गया कि हिटलर का अंत अब निकट है। लगता था जैसे सबका मन हलका हो गया है। उनके चेहरों पर खुशी चमकने लगी और वे गाकर, नाचने-झूमने लगे।

दोपहर में हिटलर ने अपनी आखिरी बैठक में भाग लिया, जिसमें सामरिक स्थिति की समीक्षा की गई और उसे बताया गया कि सोवियत फौज अब केवल एक ब्लॉक दूर है। रात 2 बजे हिटलर ने अपना आखिरी भोजन किया, शाकाहारी भोजन। फिर उसने, अपने शोफर को चांसलरी के उद्यान में 200 लीटर पेट्रोल लाने के लिए कहा।

तत्पश्‍चात् हिटलर और उसकी पत्नी ईवा ने बोर्मैन, गॉबेल्स, जनरल क्रेब्स तथा बर्गडॉर्फ, अन्य शेष सैनिक, सहायक अधिकारियों तथा स्टाफ सदस्यों को अंतिम अभिवादन किया।

हिटलर और उसकी पत्नी फिर अपने निजी कमरों में वापस चले गए; जबकि बार्मैन और गॉबेल्स चुपचाप आस-पास ही बने रहे। कुछ क्षणों बाद एक गोली चलने की आवाज आई। कुछ पल इंतजार करने के बाद सायं 3.30 बजे बोर्मैन और गॉबेल्स अंदर गए, जहाँ उन्होंने हिटलर को सोफे पर पड़ा हुआ पाया और देखा कि उसकी दाईं कनपटी से खून बह रहा है। ईवा ब्रॉन जहर खाकर मर चुकी थी।

रूसी तोपों के गोले जब बहुत पास में आकर गिरे, उन दोनों के शवों को ऊपर चांसलरी उद्यान में ले जाया गया और उनपर पेट्रोल डालकर उन्हें जला दिया गया, जबकि बोर्मैन और गॉबेल्स ने वहाँ खड़े होकर मृतकों को अंतिम नाज़ी सलामी दी। अगले तीन घंटों तक शवों को पेट्रोल छिड़क-छिड़ककर जलाया जाता रहा। फिर जले अवशेषों को विलायती टाट में इकट्ठा करके तोप के गोले से बने गड्ढे में डालकर दफन कर दिया गया।

फ्यूहरर की विदाई के बाद बंकर में मौजूद सभी लोगों ने धूम्रपान करना शुरू कर दिया। हिटलर की आज्ञानुसार उसकी मौजूदगी में धूम्रपान करने पर पाबंदी थी। फिर उन्होंने बर्लिन से बच निकलने की दु:साहसपूर्ण (लेकिन व्यर्थ) योजना बनानी शुरू कर दी, ताकि वे सोवियत सैनिकों के हाथों न पकड़े जाएँ।

अगले दिन 1 मई को गॉबेल्स और उसकी पत्नी ने बंकर में जाकर अपने छहों बच्चों को जहर दे दिया और फिर ऊपर चांसलरी उद्यान में चले गए, जहाँ उन्होंने एक एस.एस. जवान से अनुरोध किया कि वह पीछे से उनकी खोपड़ी में गोली मार दे। फिर उनके शवों को जलाने की कोशिश की गई। लेकिन वे पूरी तरह नहीं जलाए जा सके और न ही उनको दफनाया जा सका। अगले दिन रूसी सैनिकों ने उन बीभत्स अवशेषों को देखा और उनकी फिल्म बनाई। गॉबेल्स का जला हुआ शव हिटलर के साम्राज्य की प्राय: देखी गई छवि की विरासत जैसा लग रहा था।

गुस्साए हिटलर ने बोर्मेन द्वारा उकसाए जाने पर गोरिंग को एक जवाबी संदेश भेजकर सूचित किया कि उसने ‘घोर विश्‍वासघात’ किया है। यद्यपि इस अपराध की सजा मौत है, फिर भी अगर वह तत्काल अपने सभी पदों से इस्तीफा दे दे तो गोरिंग को उसकी लंबी सेवा का लिहाज करते हुए बख्श दिया जाएगा। तत्पश्‍चात् बोर्मैन ने बर्शतिस्गडेन के निकट एस.एस. को एक आदेश भेजा कि गोरिंग और उसके कर्मचारियों को तुरंत गिरफ्तार कर लिया जाए। 25 अप्रेल को सुबह से पहले ही गोरिंग जेल की सलाखों के पीछे था।

अगले दिन 26 अप्रेल को रूस की तोपों ने पहली बार चांसलरी की इमारत और फ्यूहरर बंकर के ऊपर के हाते को निशाना बनाकर गोले दागे। उस शाम एक दिलेरी भरी लड़ाई के बाद एक छोटा विमान, जिसमें महिला टेस्ट पायलट हाना राइट्स तथा लुफ्ट वॉफ (जर्मन वायुसेना) जनरल रिटर वॉन ग्राइम थे, बंकर के निकट सड़क पर उतर गया। उस लड़ाई में सोवियत सेना द्वारा जमीन से की गई गोलीबारी में ग्राइम का पाँव जख्मी हो गया था।

घायल ग्राइम जब फ्यूहरर बंकर के अंदर पहुँचा, हिटलर ने उसे बताया कि उसे गोरिंग का उत्तराधिकारी बनाया जा रहा है, अर्थात् उसे पदोन्नति देकर लुफ्ट वॉफ का फील्ड-मार्शल-इन-कमांड नियुक्त किया जा रहा है।

हालाँकि यह सूचना तार द्वारा भी दी जा सकती थी, फिर भी हिटलर का आग्रह था कि ग्राइम यह नियुक्ति-पत्र लेने के लिए स्वयं उसके पास आए। लेकिन अब, पैर में चोट के कारण, ग्राइम के लिए तीन दिन तक बंकर में बिस्तर पर पड़े रहना जरूरी हो गया था।

27 अप्रैल की रात को चांसलरी की इमारतों को निशाना बनाकर रूस की बमबारी चरम सीमा पर पहुँच गई और कई बम तो सीधे उन भवनों पर ही जाकर पड़े। हिटलर ने काइटेल को एक के बाद एक कई तार भेजकर बर्लिन को सेना से मुक्त (सेना अब वहाँ थी ही कहाँ) करने की माँग की। अंतिम आघात 28 तारीख को लगा, जब हिटलर को गॉबेल्स के प्रचार मंत्रालय के जरिए यह सूचना प्राप्त हुई कि ब्रिटेन की समाचार-सेवा यह खबर दे रही है कि एस.एस. राइक फ्यूहरर हेनरिक हिमलर ने मित्र राष्ट्रों के साथ बातचीत की पेशकश की है और यह प्रस्ताव भी किया है कि पश्‍चिम में जर्मन सेनाएँ आइजनहावर के समक्ष आत्मसमर्पण करने के लिए तैयार हैं।

बंकर में चश्मदीद गवाहों के अनुसार, हिटलर ‘गुस्से से पागल हो गया’। उसके क्रोध की ऐसी प्रचंडता पहले कभी नहीं देखी गई थी। हिमलर शुरू से ही हिटलर का साथ देता रहा था और उसके इसी गुण की वजह से उसका दूसरा नाम ‘स्वाभिभक्त हिमलर’ पड़ गया था। हिमलर ने वर्षों तक अपने फ्यूहरर के हर पागलपन, दुष्कृत्यों में उसका साथ दिया था। उसी फ्यूहरर ने आज हिमलर की गिरफ्तारी का हुक्म जारी कर दिया।

तत्काल प्रतिशोध की भावना से उत्तेजित होकर हिटलर ने आदेश दिया कि बंकर में मौजूद हिमलर के वैयक्तिक प्रतिनिधि एस.एस. ले. जनरल हरमैन फेजलाइन, जो ईवा ब्रॉन की बहन का पति भी था, को बंकर के ऊपर चांसलरी उद्यान में लाकर गोली से उड़ा दिया जाए।

हिटलर ने जब यह देख लिया कि गोरिंग और हिमलर उसका साथ छोड़ गए हैं तथा सोवियत सेना बर्लिन में अंदर तक कूच कर गई है, तब उसने अपनी मौत की तैयारी शुरू कर दी।

28 तारीख को देर रात गए उसने अपनी अंतिम इच्छा लिखवाई और दो भागों का एक राजनीतिक वसीयतनामा भी लिखवाया, जिसमें उसने बहुत सी उन्हीं भावनाओं को व्यक्त किया, जो भावनाएँ उसने वर्ष 1923-24 में ‘मैन कैंफ’ में प्रकट की थीं। उसने द्वितीय विश्‍व युद्ध समेत हर बात के लिए यहूदियों को दोष दिया। उसने यहूदियों के विरुद्ध सन् 1939 में दी गई अपनी धमकी का भी जिक्र किया और उसके साथ ही बाद में गैस कोठरियों का भी अस्पष्ट-सा उल्लेख किया।

‘‘इसके अलावा मैंने किसी को भी संदेह में नहीं रखा कि इस बार न केवल यूरोप की आर्य जाति के लोगों के लाखों-करोड़ों बच्चे भूख से मरेंगे, न केवल लाखों लोग काल का ग्रास बनेंगे और न केवल हजारों-लाखों औरतों व बच्चों को जला दिया जाएगा एवं शहरों में बमबारी करके मार दिया जाएगा, बल्कि वास्तविक अपराधी को इस अपराध के लिए मानवीय आधार पर भी प्रायश्‍चित्त करने का अवसर नहीं मिलेगा।’’

मध्य रात्रि से पहले ही उसने एक छोटे से समारोह में ईवा ब्रान से विवाह कर लिया। फिर उसके बाद हिटलर के निजी कमरों में एकत्र होकर प्रियजनों के साथ शादी की खुशी मनाई गई। शैंपेन निकाली गई और जो लोग बंकर में रह गए थे, उन्होंने हिटलर को अच्छे दिनों की याद करते हुए सुना। वे दिन जो अब बीत चुके थे। पर हिटलर ने यादों के सिलसिले के अंत में कहा कि उसके सबसे पुराने दोस्तों और समर्थकों की दगाबाजी के बाद मृत्यु में ही उसको सुकून मिलेगा।

29 अप्रेल की दोपहर तक सोवियत सेनाएँ फ्यूहरर बंकर से करीब 1 मील की दूरी पर थीं। बंकर के अंदर बाहर की दुनिया से यह खबर मिली कि मुसोलिनी मारा जा चुका है। इटली के हिमायतियों ने उसे पकड़कर मार डाला, फिर उसे उलटा लटका दिया और नाले में फेंक दिया गया।

हिटलर को अब महसूस हुआ कि उसका अंत कैसा हो सकता है! यही सोचकर उसने अपने विष का परीक्षण अपने प्रिय कुत्ते ब्लौंडी पर किया। उसने अपनी महिला सचिवों को भी जहर के कैप्सूल दिए और क्षमा माँगी कि उसके पास विदा होने से पहले देने के लिए इससे बेहतर कोई उपहार नहीं है। अगर सोवियत सैनिक बंकर में घुस आएँ तो वे इन कैप्सूलों का प्रयोग कर सकती हैं।

30 अप्रेल की सुबह लगभग 2.30 बजे हिटलर अपने निजी कमरों से निकलकर भोजन-कक्ष में अपने स्टाफ सदस्यों से विदा लेने के लिए आया। चमकदार आँखों के साथ उसने खामोशी से हर एक से हाथ मिलाया और फिर अपने कमरों में चला गया। हिटलर के जाने के बाद उन अधिकारियों एवं स्टाफ सदस्यों ने इस बात पर सोच-विचार किया कि उन्होंने जो अभी देखा, उसका क्या मतलब है? पिछले दिनों का भीषण तनाव यह सोचकर अचानक काफूर हो गया कि हिटलर का अंत अब निकट है। लगता था जैसे सबका मन हलका हो गया है। उनके चेहरों पर खुशी चमकने लगी और वे गाकर, नाचने-झूमने लगे।

दोपहर में हिटलर ने अपनी आखिरी बैठक में भाग लिया, जिसमें सामरिक स्थिति की समीक्षा की गई और उसे बताया गया कि सोवियत फौज अब केवल एक ब्लॉक दूर है। रात 2 बजे हिटलर ने अपना आखिरी भोजन किया, शाकाहारी भोजन। फिर उसने, अपने शोफर को चांसलरी के उद्यान में 200 लीटर पेट्रोल लाने के लिए कहा।

तत्पश्‍चात् हिटलर और उसकी पत्नी ईवा ने बोर्मैन, गॉबेल्स, जनरल क्रेब्स तथा बर्गडॉर्फ, अन्य शेष सैनिक, सहायक अधिकारियों तथा स्टाफ सदस्यों को अंतिम अभिवादन किया।

हिटलर और उसकी पत्नी फिर अपने निजी कमरों में वापस चले गए; जबकि बार्मैन और गॉबेल्स चुपचाप आस-पास ही बने रहे। कुछ क्षणों बाद एक गोली चलने की आवाज आई। कुछ पल इंतजार करने के बाद सायं 3.30 बजे बोर्मैन और गॉबेल्स अंदर गए, जहाँ उन्होंने हिटलर को सोफे पर पड़ा हुआ पाया और देखा कि उसकी दाईं कनपटी से खून बह रहा है। ईवा ब्रॉन जहर खाकर मर चुकी थी।

रूसी तोपों के गोले जब बहुत पास में आकर गिरे, उन दोनों के शवों को ऊपर चांसलरी उद्यान में ले जाया गया और उनपर पेट्रोल डालकर उन्हें जला दिया गया, जबकि बोर्मैन और गॉबेल्स ने वहाँ खड़े होकर मृतकों को अंतिम नाज़ी सलामी दी। अगले तीन घंटों तक शवों को पेट्रोल छिड़क-छिड़ककर जलाया जाता रहा। फिर जले अवशेषों को विलायती टाट में इकट्ठा करके तोप के गोले से बने गड्ढे में डालकर दफन कर दिया गया।

फ्यूहरर की विदाई के बाद बंकर में मौजूद सभी लोगों ने धूम्रपान करना शुरू कर दिया। हिटलर की आज्ञानुसार उसकी मौजूदगी में धूम्रपान करने पर पाबंदी थी। फिर उन्होंने बर्लिन से बच निकलने की दु:साहसपूर्ण (लेकिन व्यर्थ) योजना बनानी शुरू कर दी, ताकि वे सोवियत सैनिकों के हाथों न पकड़े जाएँ।

अगले दिन 1 मई को गॉबेल्स और उसकी पत्नी ने बंकर में जाकर अपने छहों बच्चों को जहर दे दिया और फिर ऊपर चांसलरी उद्यान में चले गए, जहाँ उन्होंने एक एस.एस. जवान से अनुरोध किया कि वह पीछे से उनकी खोपड़ी में गोली मार दे। फिर उनके शवों को जलाने की कोशिश की गई। लेकिन वे पूरी तरह नहीं जलाए जा सके और न ही उनको दफनाया जा सका। अगले दिन रूसी सैनिकों ने उन बीभत्स अवशेषों को देखा और उनकी फिल्म बनाई। गॉबेल्स का जला हुआ शव हिटलर के साम्राज्य की प्राय: देखी गई छवि की विरासत जैसा लग रहा था।