मनमोहन सहगल को विभिन्न स्थानों से जो रकम भेजी जाती रही थी । उसे बड़ी ही होशियारी के साथ उसने इनवेस्ट किया था । जिन विभिन्न प्राजेक्ट्स में उसने पैसा लगाया था । उन्हीं में से एक था–शालीमार होटल । उसकी गिनती विशालगढ़ के आधुनिकतम होटलों में होती थी ।

अलाइड कारपोरेशन प्राइवेट लिमिटेड को उस होटल से दोहरा फायदा था । दो नंबर की काफी मोटी रकम एडस्ट हो जाने के साथ साथ होटल से मोटा मुनाफा भी मिलता था और कंपनी के डाइरेक्टर्स, चेअरमैन वगैरा जब चाहे वहां आकर रह सकते थे । वहां उन्हें न सिर्फ हर तरह की सहूलियात ही मुफ्त हासिल थीं बल्कि पूरी तरह महफूज भी वे रहते थे । उनके क्रिया कलापों पर किसी की नजर तक न पड़ने पाए । इसका बड़ा पूरा इंतजाम किया हुआ था । सिक्योरिटी वाले सभी लोग ट्रेंड और भरोसेमंद थे । वहां आकर ठहरने वाले विशिष्ट व्यक्तियों की प्राइवेसी और सुरक्षा की जिम्मेदारी उन्हीं आदमियों पर थी । जिसे वे बखूबी  निभाते चले आ रहे थे ।

कम्पनी का मैनेजिंग डाइरेक्टर होने के नाते शमशेर सिंह अति विशिष्ट की श्रेणी में आता था । इसलिए शालीमार पहुंचते ही उसे एक पूरा फ्लोर सौंप दिया गया । होटल का एक हिस्सा होते हुए भी उसका सारा प्रबंध शेष होटल से अलग था । उस तक पहुंचने के लिए एक प्राइवेट लिफ्ट थी । जो सीधी सिर्फ उसी फ्लोर तक जाती थी लिफ्ट रुकने के बाद भी सामने दीवार ही नजर आती थी । किसी दरवाजे का कोई चिन्ह तक वहां दिखाई नहीं देता था । लिफ्ट में ऐसा इंतजाम था कि वहां से सिक्योरिटी वाले को, जो परे कारी डोर में मौजूद रहता था, सिग्नल मिल जाता था । और वह गुप्त द्वार खोल देता था । उस फ्लोर का द्वार सिर्फ अन्दर से ही खोला जा सकता था ।

उस फ्लोर का सारा प्रबन्ध सिक्योरिटी वालों के हाथ में ही रहता था । होटल में ठहरने वाले कस्टमर्स को उस फ्लोर की जानकारी तक नहीं थी । उस फ्लोर पर ठहरने वालों और उनसे मिलने आने वालों की पूर्व जानकारी सिक्योरिटी इंचार्ज को होती थी । कोई अवांछनीय व्यक्ति वहां तक नहीं पहुंच सकता था ।

शानदार मेन सुइट के ड्राइंग रूम में ड्रेसिंग गाउन पहने शमशेर सिंह एक कुर्सी में फंसा सा बैठा था । उसकी निगाहें सामने मौजूद काले सूट वाले आदमी पर जमी थीं ।

–'तुम कहना चाहते हो बद्री हमारे आने से पहले से ही भाग गया ?' उसने पूछा ।

–'यस, सर ।' काले सूट वाला बोला ।

–'तुम्हारे विचार से क्या उसे किसी ने खबरदार कर दिया था कि हमें उसकी तलाश है ?'

काले सूट वाले ने सर हिलाकर इंकार कर दिया ।

–'मुझे आपका आदेश कल रात ही मिला था, सर । बद्री जिस इमारत में रहता है । उसके लिफ्टमैन का कहना है बद्री और उसका दोस्त दो रोज से वहां नहीं आए । उसने आखिरी दफा, दो रोज पहले, अकेले बॉक्सर को वहां देखा था । वह थोड़ी देर के लिए आया था फिर चला गया । तब से उन दोनों में से कोई भी वापस नहीं आया ।'

–'शमशेर सिंह की भौंहें तन गई ।'

–'हमारे आने से पहले ही उसके गायब हो जाने का सीधा सा मतलब है उसे पता चल गया था हम उसे ढूंढ़ रहे हैं । या फिर तुम समझते हो उसे हमारे बारे में इल्हाम हो गया था ?'

काले सूट वाले ने बेचैनी से पहलू बदला ।

–'मैं नहीं जानता सर । बद्री और उसके दोस्त के गायब हो जाने से इसका कोई ताल्लुक है या नहीं । वह बोला–'दो रात पहले उनकी इमारत के एक दम बाहर शूटिंग की एक वारदात हुई थी । उसमें मरा तो कोई नहीं । लेकिन किसने किसको शूट करने की कोशिश की थी । यह भी कोई नहीं देख पाया । पुलिस इसे रहजनी की नाकाम कोशिश समझ रही है । लेकिन बद्री इस घटना के बाद से दिखाई नहीं दिया ।'

–'तुम समझते हो, बद्री कहीं सैर करने चला गया ।'

–'लिफ्टमैन का कहना है वह अपने साथ सूटकेस या ऐसी ही कोई और चीज नहीं ले गया । रोजमर्रा की तरह एक रात बाहर गया और फिर वापस नहीं लौटा ।'

शमशेर सिंह के चेहरे पर विचार पूर्ण भाव उत्पन्न हो गए । उसने अपनी पीठ कुर्सी की पुश्त से सटा ली । हाथ अपनी तोंद पर रख लिए और आंखें बन्द कर लीं । ऐसा लगता था मानों वह सो गया था ।'

काले सूट वाला नर्वस भाव से उसे देखता रहा ।

अन्त में शमशेर सिंह ने अपनी आँखें खोली ।

–'तुमने अपने दायरे में यह बात पास कर दी है कि हमें बद्री की तलाश है ?'

–'यस सर । अगर वह पूरे शहर में कहीं भी दिखाई देता है तो फौरन हमें सूचना मिल जाएगी । मैं तमाम जुआ घरों और बार्स की निगरानी करा रहा हूँ । देर–सबेर वह नजर आ ही जाएगा ।'

–'मुझे वह देर से नहीं जल्दी चाहिए ।' शमशेर सिंह गुर्राकर बोला–'तुम उसके फ्लैट की भी निगरानी कर रहे हो ?'

–'यस सर, मेरे आदमियों की निगाहों से बचकर उस इमारत में वह दाखिल नहीं हो सकता ।'

–'अपने आदमियों को वहां से हटा लो । बद्री वहां जाने की कोशिश नहीं करेगा । तुम्हारे आदमियों की मौजूदगी को वह मील भर दूर से ही भांप लेगा । हो सकता है, उसने भी अपना कोई आदमी वहाँ लगा रखा हो । यह देखने के लिए कि इमारत की निगरानी तो नहीं की जा रही है ।'

काले सूट वाले ने प्रतिवाद करना चाहा तो शमशेर सिंह ने हाथ उठाकर रोक दिया और फिर हाथ हिलाकर उसे चले जाने का संकेत कर दिया ।

काले सूट वाला खड़ा हो गया ।

–'करतार !' शमशेर सिंह ने हांक लगाई ।

लगभग फौरन उसका बॉडीगार्ड अन्दर आ गया ।

–'यस, बॉस ?'

–'यह साहब जा रहे हैं ।'

काले सूट वाला आगे बढ़ गया ।

करतार ने बाहर निकल कर सिक्योरिटी वाले को संकेत कर दिया कि उस आदमी को चला जाने दिया जाए ।

फिर वह पुनः भीतर दाखिल हुआ और शमशेर सिंह के सामने जा खड़ा हुआ ।

–'एनीथिंग एल्स, बॉस ?'

–'ये स्थानीय लोग बिल्कुल नाकारा हैं ।' शमशेर सिंह क्षुब्ध स्वर में बोला–'इनके भरोसे हम नहीं बैठे रह सकते । इन लोगों ने उसे इस बुरी तरह डरा दिया है वह कहीं जा छुपा है । हमें उसे वहाँ से बाहर निकालना है । और यह काम जल्दी करना है ।'

–'अमरकुमार भी कई बार आपको कांटेक्ट करने की कोशिश कर चुका है, बॉस । उसका कहना है किसी जरूरी काम से मिलना चाहता है ।'

शमशेर सिंह ने अपने बॉडीगार्ड को को घूरा ।

–'उसे कैसे पता चला मैं इसी शहर में हूं ?'

–'उसने विराटनगर फोन किया था और आपकी सेक्रेटरी से कहा कि आपसे बेहद जरूरी काम है । सेक्रेटरी ने उसे बता दिया आप यहां हैं । और अब वह आपसे मिलने के लिए हाय–तौबा मचा रहा है ।' कहकर करतार तनिक रूका, फिर पूछा–'अगर आप कहें तो उसे ठंडा कर दूँ, बॉस ?'

–'अभी नहीं । जब ऐसा वक्त आएगा तो मैं तुम्हें बता दूंगा ।'

–'ओके, बॉस' करतार बोला–आप उससे मिलना चाहते हैं ?'

–'अभी नहीं । उससे कहो अभी मैं बहुत ज्यादा मसरूफ हूँ ।' आज रात में किसी वक्त मुलाकात हो सकती है । कब होगी ? यह तुम उसे फोन करके बता दोगे ।'

–'ओके, बॉस ।'

करतार पलटकर साथ वाले कमरे में चला गया ।

अमरकुमार अपने आप में एक समस्या है । एक ऐसी समस्या जो लगातार विकट होती जा रही है । शमशेर सिंह सोचने लगा । लेकिन उसके अपने हाथ भी बंधे हुए थे । क्योंकि अमर उन सबके बारे में इतना ज्यादा जानता है कि टैक्स चुराने के जुर्म में वे सब जेल जा सकते है । इसलिए अमरकुमार को फिलहाल न सिर्फ जिंदा बल्कि खुश रखना भी बेहद जरूरी है ।

शमशेर सिंह ने दोनों हाथ जोड़कर अपनी तोंद पर रख लिए । उसकी सोच जारी थी । वक्त तेजी से गुजर रहा था और किसी की दखलंदाजी ने स्थिति को बहुत ही ज्यादा पेचीदा बना दिया था ।

अचानक उसे याद आया, बद्री की इमारत के बाहर शूटिंग हुई थी । क्या उस शूटिंग का खुद बद्री से कोई ताल्लुक था ? उसने जितना ज्यादा इस बारे में सोचा । उतना ही उसे यकीन होता चला गया उस शूटिंग का असली मकसद बद्री को ठिकाने लगाना था ।

बद्री को ठिकाने लगाने की कोशिश किसने को हो सकती थी ?

इस सवाल का हालात को देखते हुए एक ही माकूल जवाब उसे सूझ सका । ऐसी कोशिश करने वाला वही हो सकता था, जिसने उससे फिरौती की रकम खरीदी थी । रकम का खरीदार इस तरह अपने खिलाफ इकलौते गवाह को, खत्म कर देना चाहता था । ताकि उसे कभी गुनहगार साबित न किया जा सके ।

अगर उसका यह अनुमान सही है तो बद्री ने आसानी से उसके बारे में बता देना था । जिसने उसे शूट करने की कोशिश की थी ।

शमशेर सिंह ने गहरी सांस लेकर कुर्सी में पहलू बदला । मौजूदा हालात में उसके सामने अकेले बद्री की ही समस्या नहीं थी । अमरकुमार की समस्या भी उतनी ही गम्भीर थी । सबसे बड़ी बात थी कि वक्त तेजी से गुजर रहा था । जबकि इन दोनों ही समस्याओं से जल्दी निपटना बेहद जरूरी था ।

उसने आंखें बन्द कर लीं और ऐसी कोई तरकीब सोचने लगा जिससे इन दोनों समस्याओं से एक ही साथ निपटा जा सके ।

जोड़–तोड़ बैठाने में माहिर शमशेर सिंह के दिमाग में विभिन्न तरकीबें आती जाती रहीं ।

अन्त में, उसके चेहरे पर कुटिलतापूर्ण मुस्कराहट तैर गई । जो इस बात की सूचक थी कि उसे सही तरकीब सूझ गई थी । जिससे एक तीर से दो शिकार किए जा सकते थे ।

तभी करतार कमरे में दाखिल हुआ ।

–'तुम्हारे लिए एक काम, करतार ।' शमशेर सिंह बोला–'लेकिन काम बताने से पहले मैं बता देना चाहता हूं कि तुम्हें अहतियात बरतनी पड़ेगी–बेहद अहतियात ।' अचानक लहजा सर्द हो गया–'अगर तुम जरा भी चूक गए, तो कल सुबह का सूरज नहीं देख सकोगे ।'

–'करतार से चूक नहीं होगी, बॉस ।'

–'तो फिर, सुनो ।'

करतार ध्यानपूर्वक सुनने लगा ।