15 सितम्बर, शनिवार

रणवीर सुबह अपनी शेव बनाने में व्यस्त था । आज का सारा दिन उसके लिए बहुत भाग-दौड़ वाला साबित होने वाला था । तभी सौम्या ने आकर उसकी तंद्रा भंग की ।

“अपना कोई नल खराब हो गया है क्या, जनाब ?” उसकी आवाज की हर ध्वनि में शोख़ी टपक रही थी ।

“नहीं तो ! तुम्हें ज्यादा पता होगा । आखिर इस घर की मालकिन तो तुम ही ठहरी ।”

“लो, फिर बाहर कोई ये क्यूँ कह रहा है कि वह प्लंबर है और आपने उसको बुलाया था ?”

“अरे, सीधे-सीधे क्यों नहीं कहती, बाहर कोई है !”

“बता तो दिया । पर अपने यहाँ प्लंबर का कोई काम नहीं है !”

“अरे बाबा, उसे मैंने बुलाया था ! वह थाने में उससे कुछ काम करवाना है ।”

“जनाब, अब आगे से कहीं कैदियों को भी यहाँ मुलाक़ात के लिए मत बुलाने लग जाना ।”

“अब छोड़ भी सौम्या ! जल्दी से दो कप चाय बना दे । वह मेरे लिए काम करता है । हमें कुछ जरूरी बात करनी है इसीलिए उसे यहाँ बुलाया है ।” यह कहकर रणवीर तुरंत ड्राइंगरूम की तरफ लपका ।

“कहो मदन, हुआ कुछ काम ?” रणवीर ने मदन से पूछा जो ‘कालिया’ के नाम से ज्यादा मशहूर था ।

“जी साहब ! कल रात दो बजे के करीब मैं उस मकान में घुस गया था । वहाँ पर जो भी कागजात मिले हैं, उनकी फोटो मैं अपने मोबाइल में सेव करके ले आया हूँ । उस घर में सभी कागजात अविनाश चौधरी से संबन्धित मिले हैं । एक फोटो-एल्बम भी मिली है, जिसकी सभी फोटो इस मोबाइल में हैं ।”

“ठीक है । तुम यहीं रुको, मैं ये सब अपने लैपटॉप में कॉपी कर लेता हूँ । उसके बाद तुम ये सारे डॉक्यूमेंट्स अपने फोन से डिलीट कर देना ।” रणवीर ने मोबाइल से सारा डाटा कॉपी करने के लिए उसे लैपटॉप से जोड़ दिया ।

“जी साहब ! वहाँ के हालात से तो यही लगता था कि उस घर में काफी दिनों से कोई रह नहीं रहा है ।”

“हाँ, तभी तो तुम्हें भेजा था वहाँ । लो, चाय लो । कोई और खास बात वहाँ पर तुम्हारी निगाह में आई हो ?” रणवीर ने उसे चाय का कप देते हुए पूछा, जो सौम्या उन्हें सर्व करके गई थी ।

“वहाँ पर तो कोई खास बात नहीं है; लेकिन मोहित गेरा के बारे में आपको खबर देनी थी ।” मदन फुसफुसाते हुए रहस्यपूर्ण ढंग से बोला ।

“मोहित गेरा ! क्या बात करते हो ! कहाँ छुपा बैठा है वो ?” रणवीर ने आश्चर्य से पूछा ।

“वह... एमएलए रामचरण के घर में है ।”

“क्या ! तुम पक्के तौर पर ये कह सकते हो ?” इसके बदले उसने मोहित की कुछ तस्वीरें अपने मोबाइल पर दिखाई, जो मोहित गेरा की रामचरण के परिवार के साथ उसके घर में होने की पुष्टि कर रही थी ।

रणवीर के माथे पर शिकन की लकीरें उभर आईं । अगर उसके मुखबिर की बात सही थी तो उसे तुरंत उस बात पर कार्यवाही करनी चाहिए थी, मगर मामला सियासी था । अगर उससे कहीं चूक होती तो इस बात का उसे तगड़ा खामियाजा भुगतना पड़ सकता था ।

कौन-सा ये पहली बार होगा !

उसने जसवीर राणा से बात करने का निश्चय किया । मदन के चले जाने के बाद उसने जसवीर राणा से बात की । राणा ने उसे मोहित के वारंट के साथ लुक आउट नोटिस भी निकलवाने का आश्वासन दिया ।

नाश्ता करते हुए रणवीर उन सारे कागजातों और फोटोग्राफ को अपने लैपटॉप की स्क्रीन पर देख रहा था, जो उसे मदन देकर गया था । उसकी निगाह एक फोटो पर जाकर अटक गई । इसमें अविनाश चौधरी दो आदमियों के साथ खड़ा नजर आ रहा था । अभी हाल ही में उसने उस आदमी को देखा था । तभी उसका मोबाइल वाइब्रेट होने लगा ।

सब-इंस्पेक्टर रोशन वर्मा लाइन पर था । रणवीर ने उसे दस मिनट में सिटी पुलिस स्टेशन पहुँचने को कहा और वह खुद भी नाश्ता निपटाकर अपने ऑफिस की तरफ रवाना हो गया ।

जब वह ऑफिस पहुँचा तो उसके ऑफिस में नरेश मल्होत्रा और पुनीत खन्ना बैठे हुए उसका इंतजार कर रहे थे । रणवीर ने ऑफिस में दाखिल होते ही सब-इंस्पेक्टर रोशन वर्मा और दिनेश को ऑफिस में बुलाया ।

“हाँ तो मिस्टर पुनीत ! आपके अनुसार कितने ठिकाने हैं, जहाँ आपको नकली दवाइयाँ होने का शक है और उसके लिए आपके पास पुख्ता सबूत हैं ?”

जवाब में पुनीत ने सीएमओ ऑफिस में दी गई रिपोर्ट की एक कॉपी और ‘वेलकेयर फार्मा’ के हैड-ऑफिस जारी की हुई कमेटी की रिपोर्ट रणवीर के सामने रख दी । रिपोर्ट पढ़ने के बाद रणवीर ने उन्हें अपनी रूपरेखा बताई ।

“मिस्टर मल्होत्रा ! आपकी कमेटी में तीन आदमी हैं और पुनीत तुम भी अपनी कंपनी से दो आदमी और बुला लो । यहाँ से मैं तीन टीम बनाकर आपके साथ भेज रहा हूँ । एक टीम में पुनीत के साथ सब-इंस्पेक्टर दिनेश, दूसरी में रोशन वर्मा और नरेश मल्होत्रा और तीसरी टीम में मैं खुद रहूँगा । पुनीत के अनुसार टोटल नौ ठिकाने हैं, जहाँ पर नकली दवाइयों के होने के सबूत हैं । हरेक टीम को एरिया के हिसाब से तीन-तीन ठिकाने दिये गए हैं । शार्प नौ बजे हम अपना अभियान शुरू करेंगे । हर दुकान या स्टोर हाउस में एंटर करते ही आप लोगों ने वहाँ से सभी लोगों के मोबाइल अपने कब्जे में लेकर स्विच ऑफ करने हैं, ताकि वह लोग आगे कोई इन्फॉर्मेशन न दे सकें । अगर हमारे पहुँचने से पहले ही कोई सूचना उन लोगों तक पहुँच गई तो हमारे हाथ फिर कुछ नहीं आने वाला ।”

“नहीं इंस्पेक्टर साहब ! ये बात मेरे, पुनीत और सीएमओ साहब के बीच में है । टीम के बाकी मेम्बर्स को आज सीधा यहीं पर बुलाया गया है, इसलिए रिपोर्ट लीक होने के कोई चान्स नहीं हैं ।” नरेश मल्होत्रा आश्वस्त स्वर में बोला ।

“गुड । लेट्स होप फॉर द बेस्ट एंड बेस्ट ऑफ लक टू ऑल ऑफ यू !”

वे लोग तुरंत तीन वाहनों में बैठकर अपने मकसद को पूरा करने के लिए रवाना हो गए । उनका अभियान काफी सफल रहा । बहुत बड़ी मात्रा में ‘वेलकेयर फार्मा’ कंपनी के नकली उत्पाद पकड़े गए । इसके साथ ही बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित दवाइयाँ भी पकड़ी गईं, जिसे युवा वर्ग नशे के रूप में प्रयोग करता था ।

रणवीर ने अपने टीम के लिए मेट्रो हॉस्पिटल के मेन-गेट और हॉस्पिटल के अंदर स्थित दुकानें चुनी थी । नरेश की बात सही साबित हुई थी कि इस अभियान की भनक किसी को नहीं थी । इसका मुख्य कारण यह भी था कि ‘वेलकेयर फ़ार्मा’ कंपनी इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री के पास पहुँच गई थी और इस मामले के लिए मुख्यमंत्री सचिवालय से सीएमओ को पूरी सख्ती व गोपनीयता बरतने के आदेश थे ।

मेट्रो हॉस्पिटल से उसी बैच की दवाइयाँ निकली, जो संजय बंसल के घर से बरामद हुई थी और बक़ौल पुनीत खन्ना, वह सारी दवाइयाँ नकली थी । संजय बंसल और अनिकेत के तार इस गोरख धंधे से सीधे तौर जुड़े थे । मेट्रो हॉस्पिटल और उनके बीच की कड़ी थी मोहित और रोहित गेरा, जो ड्रग्स और नकली दवाओं का कारोबार इस हॉस्पिटल से चला रहे थे । तीनों दुकानें सील कर दी गई और इस पूरी कार्यवाही की वीडियोग्राफी साथ में चलती रही ।

नरेश मल्होत्रा की अगुवाई में हुए इस अभियान से फारिग होकर तीनों टीम दोपहर दो बजे वापिस सिटी पुलिस स्टेशन पहुँची । ये सारी कार्यवाही चीफ़ मेडिकल ऑफिसर की कमेटी के जेरे-साए हुई थी । इस कार्यवाही में 12 आदमी हिरासत में लिये गए । पुलिस का अगला काम उनसे पूछताछ करके उन्हें जल्द-से-जल्द कोर्ट में पेश करना था । इस काम में आज का पूरा दिन लगना था और पुलिस के पास पूरे चौबीस घंटे की मोहलत थी ।

रणवीर कागजी कार्यवाही के लिए रोशन और दिनेश को पुलिस स्टेशन में छोड़ खुद हवलदार कृष्ण को लेकर कोर्ट पहुँचा, जहाँ दोपहर दो बजे के बाद मोहित गेरा के खिलाफ वारंट जारी करने के लिए सुनवाई होनी थी । जसवीर राणा ने याचिका जज विष्णुवर्धन के कोर्ट में मूव की थी, जिसके सामने पिछली सुनवाई में वह लोग शमशेर गेरा को रिमांड में लेने के आदेश लेने में कामयाब हुए थे ।

जज विष्णुवर्धन ने कागजात को देखने के बाद अपने चश्मे में से जसवीर राणा को देखते हुए कहा, “ये क्या है डिस्ट्रिक्ट एटॉर्नी राणा ! चार सितंबर को ये घटना हुई और आप लोग अब तक सिर्फ वारंट माँग रहे हैं । अब तक तो अपराधी गिरफ्तार हो जाना चाहिए था । कौन है इस केस का इंवेस्टिगटिंग ऑफिसर ?”

“इस केस के इंवेस्टिगटिंग ऑफिसर इंस्पेक्टर रणवीर कालीरमण हैं, योअर ऑनर !”

“क्या वह अदालत में मौजूद है ? कहाँ है वो ?”

“जी, इंस्पेक्टर रणवीर अदालत मैं मौजूद हैं ।” जसवीर राणा ने रणवीर की ओर इशारा करते हुए कहा ।

“हाँ, तो इंस्पेक्टर रणवीर ! मेरे ख्याल से आप लोग इस मामले में अभी भी अंधेरे में भटक रहे हैं । क्या आपको ऐसा नहीं लगता कि पुलिस इस मामले में अपराधियों को पकड़ने में कुछ ज्यादा ही ढील बरत रही है ?”

“सर, ये एक-दूसरे से जुड़ी तीन जघन्य हत्याओं का मामला है ! इस मामले में जिस शख्स की पुलिस को तलाश है, उसे इस इलाके के रहनुमाओं से राजनैतिक शरण प्राप्त है, जिसकी वजह से हमारी तहक़ीक़ात में लगातार रुकावट आ रही हैं ।” रणवीर ने बेझिझक जज के सामने अपनी बात रखी ।

“हम्म । आपके पास इस बात के कोई पुख्ता सबूत भी हैं या यूँ ही अंधेरे में तीर चलाये जा रहे हो ? मेरे ख्याल से ये अच्छा होगा कि आप लोग अपनी बात पुख्ता सबूतों के साथ अदालत में रखें जिस पर विश्वास किया जा सके ।” जज विष्णुवर्धन ने गंभीरता से पूछा ।

“जी सर ! हमारे पास मुल्जिम मोहित गेरा के खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं । उसकी इस वक्त की मौजूदगी की इंटेलिजेंस रिपोर्ट भी हमारे पास है ।” वकील जसवीर राणा ने आश्वस्त स्वर में कहा ।

“मिस्टर राणा, आपकी क्या दरख्वास्त है इस बारे में ?”

“सर, अपराधी किसी ऐसी जगह छुपा हो सकता है जहाँ पर पुलिस का सीधा धावा बोल देना किसी खास आदमी के विशेषाधिकार के उल्लंघन का बायस बन सकता है ! इसके लिए पुलिस को अपराधी के खिलाफ जारी किये गए नॉन-बेलेबल वारंट मुलजिम को कहीं भी ढूँढने में सहायक सिद्ध होंगे । मैं आपसे मुल्जिम मोहित गेरा वल्द शमशेर गेरा के खिलाफ सेक्शन 73 के अंतर्गत नॉन-बेलेबल वारंट की दरख्वास्त करता हूँ, योअर ऑनर ।”

कुछ देर सोचने के बाद जज विष्णुवर्धन ने निर्णायक स्वर में कहा, “ओके । दरख्वास्त मंजूर की जाती है । इंस्पेक्टर रणवीर आजकल तो ‘सिंघम’ और ‘सूर्यवंशियों’ का जमाना है । तुम जरा अपनी स्पीड बढ़ाओ ।”

“यस सर ! उन्हें फिल्म प्रोड्यूसर का मुनाफे का लालच खुली छूट देता है और मुझे कानून के अनुसार चलना होता है ।”

“हम्म, वेल सेड डियर !” इतना कहकर विष्णुवर्धन ने मुस्कराते हुए क्लर्क को कोर्ट के अगले केस की फ़ाइल पेश करने का इशारा कर दिया ।

जिस दौरान रणवीर कोर्ट में मोहित गेरा के खिलाफ वारंट के लिए जद्दोजहद कर रहा था, उसी वक्त नरेश मल्होत्रा और पुनीत खन्ना की मौजूदगी में हुई पूछताछ में हिरासत में लिये गए दुकान के मालिकों ने अपना संबंध संजय बंसल और अनिकेत के साथ कबूल कर लिया और नकली दवाओं के वितरकों के रूप में भी दोनों का नाम कबूल कर लिया ।

मेट्रो हॉस्पिटल की दुकानों के प्रोप्राइटर्स ने पहले तो मालिक-मालिक की रट लगाई लेकिन जब दिनेश और रोशन वर्मा ने अपने पुलिसिया हथकंडे अपनाए तो वह जल्दी ही टूट गए । उन्हें नकली दवाइयों को बेचने के लिए मजबूर करने वाले के रूप में उन्होंने मोहित का नाम तसदीक शुदा रूप में अपने कबूलनामे में दर्ज करवा दिया ।

कोर्ट से लौटते ही रणवीर ने मुंशी रतनलाल को हिरासत में लिये गए सभी लोगों के बयान दर्ज करने के लिए कहा और तसदीक के लिए उनके ऊपर नरेश मल्होत्रा और पुनीत खन्ना के हस्ताक्षर लेने के लिए कह दिया । शाम होते-होते रणवीर ने पुलिस स्टेशन में मौजूद अपने लोगों को एक बार फिर एक नए अभियान के लिए तैयार रहने का हुक्म दिया ।

शाम को आठ बजे से पुलिस ने एक बार फिर मोहित की तलाशी का अभियान शुरू किया । उन्होंने वह सारे ठिकाने छान मारे जहाँ उसके अनुसार मोहित गेरा के होने की उम्मीद हो सकती थी, लेकिन उन्हें पहली बार की तरह हर जगह से खाली हाथ वापिस आना पड़ा । सारी रात उनकी आँखों में से गुजर गई पर नतीजा कुछ भी नहीं निकला ।

सुबह के 4:00 बजे थे । अपनी टीम की थकान उतारने के लिए रणवीर अपनी फोर्स के साथ रात को एक ढाबे पर रुका । पुलिस की जीप देखकर वहाँ पर रुके ट्रक ड्राइवर और सोये हुए नौकरों में जाग हो गई । दिनेश ने एक नौकर को बुलाकर सबके लिए चाय बनाने के लिए कहा ।

रणवीर का दिमाग अपनी इस असफलता पर भन्नाया हुआ था ।

क्या एक बार फिर उसे मुँह की खानी पड़ेगी ?

नहीं !

उसके दिमाग में मदन ‘कालिया’ की बात घूम रही थी । उसने मन-ही-मन निश्चय करते हुए चाय पीने के बाद साढ़े चार बजे के करीब अपने ड्राइवर को गाड़ी विधायक के निवास स्थान की तरफ मोड़ने का आदेश दिया । रोशन वर्मा ने सकपकाकर रणवीर की तरफ देखा । दिनेश भी सवालिया नजरों से उसकी तरफ देखने लगा ।

“ये आप क्या करने जा रहे हैं ? ये कदम उठाने से पहले आप एक बार फिर सोच लीजिये ।” रोशन वर्मा ने सलाह दी ।

“सोच लिया, रोशन ! इस कार्यवाही की जिम्मेवारी पूरी तरह मेरी रहेगी । जो अंजाम होगा, मैं उसे भुगतने के लिए तैयार हूँ ।”

“हम आपके साथ ही हैं, सर ! आप बेफिक्र रहें और हमें बताएँ क्या करना है !” दिनेश ने रणवीर को आश्वस्त करने वाले स्वर में कहा ।

“हम रामचरण के फार्महाउस में जा रहे हैं । मुझे खबर मिली है कि वह वहाँ छुपा हो सकता है । हम वहाँ जाकर दो ग्रुप्स में बँट जाएँगे । मैं मेन-गेट से जाऊँगा और मेरे साथ अनिल और रवि रहेंगे । रोशन और कृष्ण, तुम दाईं तरफ से दीवार फांदकर अंदर जाओगे ! दिनेश और कदम सिंह, तुम लोग बाहर तैनात रहोगे और अगर वह वहाँ से भागने की कोशिश करता है तो तुम्हें उसे उसी वक्त धर दबोचना है ।”

“हम समझ गए, सर ! कोई नहीं भाग पाएगा ।” रोशन ने दृढ़ स्वर में कहा ।

सब लोगों को अपनी हिदायत के अनुसार उतारने के बाद रणवीर ने गाड़ी मेन-गेट पर ले जाकर रोकी । गेटकीपर ने झिझकते हुए मेन-गेट खोल दिया । उसने तुरंत अंदर कहीं फोन करने के लिए फोन उठाया तो रणवीर ने उसे अपने पास बुला लिया ।

“सुबह-सुबह तेरा फोन कौन उठाएगा ? खुद भीतर जाकर सबको जगा । विधायक साहब का आज यहाँ जनता से मिलने का प्रोग्राम है । उसके लिए हमें यहाँ सिक्योरिटी के इंतजाम देखने हैं ।”

इंस्पेक्टर की सवेरे-सवेरे डाँट सुन गेट-कीपर अंदर की तरफ लपका और सामने के बड़े दरवाजा की कुंडी ज़ोर-ज़ोर से खड़काने लगा ।

       ***

विधायक रामचरण के निवास स्थान के अंदर मौजूद मोहित गेरा की आज न जाने क्यों एकदम से अचानक सुबह-सुबह आँख खुल गई । उसका सारा शरीर एयर-कंडीशनर चलने के बावजूद भी पसीने से नहाया हुआ था । जब से अनिकेत, संजय और गौरव की मौत का झमेला शुरू हुआ था, वह तभी से यहाँ छुपा हुआ था और बाहर की उसने रोशनी भी नहीं देखी थी । अपने भाई रोहित गेरा के अंतिम संस्कार में भी वह नहीं जा सका था । उसका बाप शमशेर सिंह उसे पुलिस के फंदे में नहीं पड़ने देना चाहता था । उसका मानना था कि अगर कुछ दिन वह अंडरग्राउंड रहेगा तो पुलिस का जोश कुछ दिनों के बाद अपने-आप ठंडा पड़ जाएगा । फिर इस हत्या और ड्रग्स के इस झमेले को साम-दाम-दंड-भेद से वह बाद में अपने ढंग से सुलझाने की कोशिश करता ।

उसके पिता शमशेर की सख्त हिदायत थी कि वह यहीं पर चुपचाप टिका रहे क्योंकि पुलिस को यहाँ की भनक भी नहीं लगने वाली थी । कल से पता नहीं क्यों उसका सिर दर्द से फटा जा रहा था । सुबह के पाँच बजने वाले थे । हो सकता है, इतने दिनों से कैदियों की तरह एक जगह बंद रहने की वजह से ऐसा हो रहा हो । इतने दिनों से सुबह से शाम तक दारू पीने और सोने के सिवा उसके पास दूसरा काम भी नहीं था ।

सिरदर्द से कुछ राहत मिले इसलिये वह अपने लिए एक कप कॉफी बनाने के लिए उठकर रसोई की तरफ बढ़ा । उनका नेपाली खानसामा तो नीचे पता नहीं कहाँ घोड़े बेचकर सोया हुआ होगा । उसे आवाज लगाने का कोई फायदा नहीं था । कॉफी के साथ कोई सिरदर्द की गोली लेकर वह फिर से दोबारा सोना चाहता था ।

***

गेट-कीपर के कई देर तक दरवाजा भड़भड़ाने के बाद एक नेपाली से लगने वाले नौकर ने लकड़ी के विशालकाय दरवाजे को अपनी मिच-मिची को मसलते हुए खोला । सामने इंस्पेक्टर रणवीर को देखकर उसका मुँह बंद हो गया और आँखें पूरी खुल गईं । हाथ सलाम की मुद्रा में अपने आप ही माथे पर जा टिका ।

“उठ गया ।”

“हो, शाब जी !”

“तेरे सिवाय कितने आदमी हैं घर के अंदर ?”

“शाब जी ! इधर तो मैं और एक नौकर रामू है, शाब जी !” हकलाती जुबान से उसने जवाब दिया ।

“इतनी बड़ी कोठी में बस तुम दोनों अंदर मौजूद हो और बाहर गेटकीपर । बस तीन आदमी ?”

“वह सफाई वाली और माली तो दिन में आते हैं शाब जी ! रात को तो हम ही यहाँ रहते हैं ।”

“अच्छा ये बता, ऊपर कितने कमरे हैं ?”

“ऊपर तो तीन कमरे हैं और एक ड्राइंगरूम है, शाब जी ! पर वह सब बंद हैं, शाब जी !”

“चल, एक बार दिखा तो हमको । यहाँ दिन में नेता जी का जनता से मिलने का प्रोग्राम हैं । हमने उनकी सिक्योरिटी के लिए यहाँ पर सब कुछ चेक करना है ।”

“उ शाब जी ! नेता जी तो लोगों से नीचे ही मिलते हैं पर अबकी बार इस प्रोग्राम के लिए हमें तो बताया नहीं, शाब जी !”

“हमें भी अभी-अभी पता चला है । कमिश्नर साहब का फोन आया है कि चीफ़ मिनिस्टर आ सकते हैं । अगर ऊपर के कमरे बंद हैं तो चाबी निकाल । हमारे साथ चलकर खोल सबको ।” तभी रोशन और कृष्ण पीछे से दीवार फांदकर आगे तक आ गए थे । रणवीर ने उन्हें वहीं रुकने का इशारा किया । वह खुद हवलदार अनिल और रवि के साथ ऊपर की तरफ बढ़ा । उसने रिवॉल्वर का होल्स्टर खोल अपना हाथ रिवॉल्वर की मूठ पर रख लिया ।

नेपाली आगे-आगे बढ़ा और उसने ऊपर की मंजिल के बड़े दरवाजे का लॉक खोला । जैसे ही उसने अंदर कदम रखा, उसके पीछे रणवीर ने भी अपना कदम हॉल के अंदर रखने के लिए उठाया । उसी वक्त एक कर्णभेदी धमाका हुआ और एक आग का बवंडर उनकी तरफ लपका । रणवीर ने तुरंत छलांग लगाते हुए अपने आपको दरवाजे से बाहर गिरा दिया और अनिल और रवि को भी बाहर धकेल दिया ।

ऊपर हुए धमाके की भीषण आवाज सुनकर रोशन और कृष्ण जल्दी से किसी अनहोनी की आशंका से त्रस्त हुए भागकर वहाँ पहुँचे । रणवीर को औंधे मुँह पड़े देखकर उनकी साँस गले में अटक गई । तब तक अनिल और रवि भी संभल चुके थे । दोनों ने तुरंत रणवीर को कमरे से बाहर आती लपटों से दूर एक तरफ खींचा । रणवीर का सिर फर्श से ज़ोर से टकराया था और वहाँ से खून की धारा फूट रही थी । रोशन ने तुरंत अपने गले में लिपटे हुए कपड़े को पट्टी की शक्ल में उसके सिर पर बाँधना चाहा लेकिन रणवीर ने उन्हें तुरंत कमरे में जाकर वहाँ के हालात देखने के लिए कहा । रणवीर अब खुद भी काफी हद तक संभल चुका था ।

वह उठकर दृढ़ कदमों से कमरे की तरफ बढ़ा । दिनेश और कदम सिंह भी भागकर ऊपर पहुँचे । तब तक गेटकीपर वहाँ आग बुझाने के लिए सिलिंडर लेकर आ चुका था, जिससे अनिल और रवि तुरंत आग को काबू करने का यत्न करने लगे ।

नेपाली बुरी तरह से घायल हुआ कमरे के बीच में पड़ा था । रणवीर ने दिनेश को तुरंत एम्बुलेंस के लिए फोन करने को कहा । अनिल सिलिंडर की मदद से आग बुझाता हुआ किचन तक पहुँच गया था । वहाँ उसे बुरी तरह से घायल और अधजला एक और शरीर दिखाई दिया, जिसके चिथड़े उड़ चुके थे ।

अनिल उसके शरीर पर लगी आग को काबू करने के बाद, उसे इस उम्मीद में खींचकर बीच के हॉल में लेकर आया कि शायद उसमें कोई साँस बाकी बची हो । हॉल में आने पर रणवीर ने उसका बारीकी से मुआयना किया । उसकी नजरें रोशन और दिनेश से मिलीं ।

वह आदमी मोहित गेरा था और इस फानी दुनिया को छोड़कर परलोक सिधार चुका था ।

रणवीर का उस पल और उस घड़ी वहाँ पर मौजूद होना एक ऐसी कामयाबी थी जिसके पीछे खड़ी नाकामयाबी उसका मुँह चिड़ा रही थी । इस देर से मिली सफलता का जश्न तो खैर कोई भी नहीं मनाने वाला था ।

तब तक एमएलए रामचरण के कानों तक यह खबर पहुँच चुकी थी । वहाँ पर सबसे पहले पहुँचने वालों में उसका खास पार्षद सम्पूर्ण सिंह था । मोहित की लाश देखकर वह सकते में आ गया और उसने तुरंत इसकी सूचना विधायक महोदय को दी । रणवीर ने उसे तुरंत वहाँ से नीचे चले जाने का हुकुम दिया । तब तक आस-पड़ोस के लोग इस हादसे को देखने के लिए जुटने लगे थे । रणवीर ने रवि, कृष्ण और कदम सिंह को उन्हें नीचे ही रोकने के लिए भेज दिया ताकि कोई ऊपर की तरफ न आ सके ।

पूरे वातावरण में गैस और माँस के जलने की बदबू फैली हुई थी । रसोई में व्यावसायिक कामों के इस्तेमाल होने वाला बड़ा सिलिंडर फटा हुआ था जिसकी वजह से इतना भीषण विस्फोट हुआ था और मोहित अपनी जान से हाथ धो बैठा था । उस जगह गैस के बदबू का फैला हुआ होना इस बात की तरफ इशारा कर रहा था कि वहाँ गैस सिलिंडर लीक हो रहा था । मोहित अनजाने में गैस को ऑन कर बैठा और अपनी जान से हाथ धो बैठा । विस्फोट इतना भीषण था कि रसोई की स्लैब के परखच्चे उड़ गए थे, तो मानव शरीर की क्या बिसात थी ।

सारी खिड़कियाँ दरवाजे खोलने के बाद कुछ गुबार कम हुआ तो रणवीर उस कमरे में पहुँचा जहाँ मोहित गेरा रुका हुआ था । वहाँ उसके मोबाइल के सिवा और कोई काम की चीज नहीं थी । उसके बेड के नीचे खाली व्हिस्की की बोतलें बता रही थी कि जरूर वह सारी रात नशे में पड़ा रहा होगा और उसी तरंग में उठकर सुबह-सुबह रसोई में जाकर अपनी मौत को निमंत्रण दे बैठा था ।

रणवीर ने मोबाइल को एक पॉलिथीन में लपेटकर फॉरेंसिक वालों को देने के लिए रख लिया । ऊपर की मंजिल पर जाने के लिए सीढ़ियों के सिरे पर एक ग्रिल लगी हुई थी, जो अंदर से बंद थी और उस पर ताला लगा हुआ था ।

रणवीर, रोशन और दिनेश के साथ जब तक वापिस ग्राउंड फ्लोर पर नीचे पहुँचा, तब तक सम्पूर्ण सिंह फोन पर अपना काम कर चुका था ।

“इंस्पेक्टर साहब, डीएसपी साहब आपसे बात करना चाहते हैं !” सम्पूर्ण सिंह अपना फोन रणवीर को देते हुए बोला ।

“कौन डीएसपी ?” रणवीर ने पूछा ।

“डीएसपी हरपाल सिंह !” सम्पूर्ण सिंह ने जवाब दिया ।

“यस, रणवीर कालीरमण स्पीकिंग !” रणवीर फोन हाथ में लेता हुआ बोला ।

“रणवीर, कहाँ हो तुम ?”

“एमएलए रामचरण के गेस्ट हाउस पर । सम्पूर्ण ने आपको बताया नहीं ?”

“बताया है, बताया है । सुबह-सुबह तुम वहाँ कैसे पहुँच गए ?”

“मोहित गेरा के बारे में हमें पुख्ता जानकारी मिली थी । उसी लीड को फॉलो करते हुए मैं यहाँ पर पहुँचा ।”

“अरे ! वह एक एमएलए का घर है, जहाँ पर तुम सुबह-सुबह चढ़ दौड़े हो । इस बात का अंदाजा है तुम्हें ? कम-से-कम ये कार्यवाही करने से पहले तुमने मुझे तो अपने कॉन्फ़िडेंस में लिया होता ।”

“सर ! मैं सारी रात उसके चक्कर में सारे शहर की खाक छानता रहा और मुझे सुबह उसके यहाँ पर होने की सूचना मिली । अगर मैं आज देर करता तो पुलिस को उसकी हवा भी नहीं लगनी थी ।”

“अब लग गई । तुमने अपनी बिसात से ज्यादा लंबी छलांग लगा दी, रणवीर ! ऊपर से वह लड़का मोहित भी मर गया । क्या हाथ आया तुम्हारे ?”

“चाहे उसकी राख हाथ आई पर कम-से-कम किसी मुकाम तक यह सिलसिला पहुँचा तो सही । आपका एमएलए एक ऐसे आदमी को अपनी गोद में छुपाए बैठा था, जिसकी तलाश में पुलिस सारी जगह मारी-मारी फिर रही थी । वह विधायक भी अब कानून का मुजरिम है । कल आप मुझसे पूछ रहे थे कि मैंने इस मामले में क्या किया और आज कह रहे हैं कि मैंने यह क्यों किया !”

“अरे, तुम छोड़ो इन बातों को ! तुम निकलो वहाँ से और अपने घर पहुँचो । तुम्हें आई चोट गंभीर भी हो सकती है । यहाँ का मामला यहीं पर छोड़ दो ।”

“तो आप क्या चाहते हैं ? मैं अपने दफ्तर में कबूतर की तरह आँखें बंद करके बैठ जाऊँ ताकि इस शहर की जनता ये कभी न जान पाए कि यहाँ का ये सफेदपोश नुमाइंदा, जिसको सबने मिलकर अपना रहबर चुना है, वह कानून तोड़ने वालों को अपने घर में पनाह देता है । उसके चाहने वाले हॉस्पिटल की आड़ में नकली दवाइयों और ड्रग्स का धंधा करते हैं । मैं जब ये सब सबूतों के साथ हासिल कर चुका हूँ तो आप मुझे यहाँ से जाने के लिए कहते हैं । आज उस आदमी के यहाँ कानून से पनाह माँगा मुल्जिम हलाक हो गया तो उस महाबली के तिरपन काँपने लगे कि उसकी पोल खुल गई । मेरे हाकिम मुझे ही सीख देने लगे कि मुझे क्या करना है ।”

“रणवीर, तुम खामख्वाह जज्बाती हो रहे हो ! तुम भूल रहे हो कि इस आदमी के खिलाफ ड्रग्स की छापेमारी मेरी ही अगुवाई में हुई थी । तुम मेरी बात को समझो । ये आदमी फिर तुम्हारे शिकंजे में होगा लेकिन फिलहाल वहाँ एक आदमी मारा जा चुका है और इस बात को तुम तूल मत दो । तुम बिना अपने आला अफसरों को बताए, यूँ किसी एमएलए के घर पर चढ़ाई नहीं कर सकते ।”

“क्यों ? ऐसा कौन-सा कानून है, जो मुझे मेरा काम करने से रोकता है ? ये बात आप कह रहे हो या आपसे कोई और कहलवा रहा है ! मेरे पास मोहित गेरा का कोर्ट से निकला वारंट है, जो मुझे अख्तियार देता है कि मैं अपने थाने के तीस किलोमीटर के दायरे में कहीं भी आरोपित की खोज कर सकता हूँ, जहाँ भी मुझे संदेह हो ।”

“अरे यार, तुम समझते नहीं हो ! थोड़ी देर में सारा मीडिया वहाँ पहुँच जाएगा और हमारी जान को बखेड़ा खड़ा हो जाएगा ।”

“बखेड़ा मेरी जान को होगा । आप लोग क्यों हलकान हो रहे हैं ।”

“इंस्पेक्टर रणवीर सिंह !” एक घड़घड़ाती आवाज इस वार्तालाप के बीच में रणवीर के कानों में पड़ी ।

“कौन ?” रणवीर ने उस बदली हुई आवाज से पूछा ।

“मैं तुम्हें अभी उस गेस्ट हाउस से चले जाने का हुकुम देता हूँ । डीएसपी हरपाल सिंह इतनी देर से तुम्हें जो कह रहे हैं, वह तुम्हें समझ नहीं आया ।”

“अरे, आप हैं कौन ? यहाँ जो आदमी हलाक हो गया है उसकी हमें एक ट्रिपल मर्डर के संभावित मुजरिम के तौर पर तलाश थी । अभी इस मामले की तफतीश होनी बाकी है ।”

“मैं एसपी ब्रिजलाल सिंह बोल रहा हूँ । जहाँ तक जाँच का सवाल है तो जाँच होती रहेगी । एक बात मेरी ध्यान से सुनो । अब तुम वहाँ जो खड़े हो, वह आउट ऑफ ड्यूटी और आउट ऑफ कंडक्ट की एक मिसाल है । इसलिए उस जगह से तुम अभी निकलो । तुरंत ।”

“क्यों सर ? मेरा कंडक्ट आउट ऑफ लाइंस क्यों है ? मैं यहाँ पर अपनी ड्यूटी ही कर रहा हूँ ।”

“क्या तुम्हें पता नहीं, तुम्हारा कल इस पोस्ट से तबादला हो गया है ? क्या तुम्हें ट्रान्सफर लेटर नहीं मिला ? शाम पाँच बजे तुम्हारे ऑफिस में इसकी इन्फॉर्मेशन दस्ती तौर पर पहुँचा दी गई थी । तुम अपने सीनियर्स के बार-बार आगाह करने के बावजूद वहाँ पर रहकर अपनी लिमिट्स क्रॉस कर रहे हो । सो यू आर सस्पेंडेड इमीजिएटली ! आज नौ बजे पुलिस लाइंस में रिपोर्ट करो । तुम्हारे मातहत रोशन वर्मा वहाँ पर मौजूद होगा, उससे मेरी बात करवाओ ।”

रणवीर इस बात को सुनकर सन्न रह गया ।

इस सिस्टम में दीमक थी तो सही, पर अब वह हरी शाखों को भी चट करने लगेगी, ऐसा उसने कभी सोचा न था ।

उसने फोन सम्पूर्ण सिंह को दे दिया और थके कदमों से दरवाजे की तरफ बढ़ा ।

“क्या हुआ, सर ?” दिनेश ने पूछा ।

“रोशन को कहो, सम्पूर्ण के फोन पर, एसपी से बात कर लेगा । अब यहाँ का इंचार्ज वह है ।”

रोशन उस फोन पर बात को पूरी तरह से सुनने के बाद उसके पास आया ।

“ये सब क्या है, जनाब ?” रोशन ने हैरान और परेशान होते हुए पूछा ।

“यही होता है, रोशन ! जब वजीर सामने वाले राजा के हाथ बिक जाए तो प्यादों को हलाल होना ही पड़ता है ।”

“अब हम क्या करें ? यहाँ से तो हमें जाने का हुकुम मिला है, इससे पहले कि मीडिया वाले आ जाएँ ।”

रणवीर मन-ही-मन कसमसाया । रणवीर के वहाँ से निकलने के बाद, उसके सारे साथी वहाँ से निकलकर अपनी गाड़ी में जा बैठे । अब उनकी मंजिल थी सिटी पुलिस स्टेशन । पुलिस स्टेशन पहुँचकर रणवीर ने मुंशी रतनलाल को बुलाया और उससे अपने तबादले के बारे में पूछा तो उसने अनभिज्ञता जाहिर की । उसने एक लिफाफा, जो कि बंद था, वह रणवीर को दे दिया ।

“जब आप शाम को मोहित गेरा की तलाश में निकले थे तो एसपी ऑफिस से एक आदमी आया था और ये आपको देने के लिए बोला था ।”

रणवीर ने वह लिफाफा खोला तो उसमें वही बात थी जो वह खुद एसपी ब्रिजलाल सिंह की जुबानी फोन पर सुन चुका था । उस तहरीर के अनुसार वह बीते कल के पाँच बजे से यहाँ का अधिकारी नहीं रहा था । उसको आज से पुलिस लाइन में हाजिरी भरनी थी । अब यहाँ का थाना-इंचार्ज इंस्पेक्टर वरियाम सिंह था । इस मामले की खानापूर्ति करने के बाद, उसने अपनी कुछ महत्वपूर्ण फ़ाइलें समेटी और कुछ समय के लिए अपनी कुर्सी पर बैठ गया । तभी उसके ऑफिस में कदम सिंह ने अर्दली के साथ कदम रखा, जो एक ट्रे में चाय लिये हुए था । उसके साथ रोशन, दिनेश, अनिल, कृष्ण, रवि और बाकी स्टाफ था । रोशन और दिनेश समेत सबके चेहरे पर उदासी थी ।

रणवीर ने हँसकर कहा, “वाह ! कदम सिंह को मेरी कमजोरी का पता है । आओ, बैठो सभी ।” सभी रणवीर के चारों तरफ एक घेरा बनाकर बैठ गए, “आप सब लोगों के चेहरे लटके हुए क्यों हैं ? हमने अपना काम पूरी मुस्तैदी से किया । अब अगर ऊपर से कोई इसे पूरा नहीं होने देना चाहता तो आप लोगों का इसमें कोई कसूर नहीं है ।”

“पर इस तरह से आपका बीच में तबादला कर देना....”

“छोड़िए । आप सब चाय लें । सारी रात की भागदौड़ से तुम सबको थकावट हो रही होगी ।”

सभी फिर चाय पीने लगे और माहौल को हल्का-फुल्का बनाने के लिए इधर-उधर की बातें करने लगे । सबके चले जाने के बाद रणवीर ने अपनी दराज से गेरा बंधुओं से संबन्धित जो भी कागजात थे, वह संभालकर रख लिए और फॉरेंसिक से संबन्धित डाक मुंशी रतनलाल के हवाले कर दी और उन्हें थाने की डायरी में उन्हें चढ़वा दिया ।

फिर उसने वेदपाल को फोन किया । नींद में खलल पड़ने से भन्नाए वेदपाल को उसने अपने ट्रान्सफर की सूचना दी । इस केस से संबन्धित जो भी डीएनए रिपोर्ट आनी बाकी थी, उसके बारे में उसे जरूर बताने के लिए कहा । वेदपाल हैरान था, लेकिन इस पूरे मामले में रणवीर को कोई हैरानी या परेशानी नहीं हुई । राजनीति जब धर्म की पटरी से उतरकर अधर्म के साथ हिंडोले में झूलने लगे तो जो कुछ भी न हो जाये वही अच्छा ।

जब वह घर पहुँचा तो सुबह के सात बजने वाले थे । सौम्या ने तुरंत दरवाजा खोला और एक स्निग्ध मुस्कान से रणवीर को निहारा । अपनी सारी थकान एक पल के लिये भूल गया रणवीर । रणवीर ने उसका माथा चूमा तो वह समझ गई कि प्यार की इस बयार में उसके दिल और दिमाग में भयंकर खलबली मची हुई है ।

प्रत्यक्ष रूप से वह जानबूझकर बोली, “आज तो सूरज निकलने के साथ ही आ गए, जनाब ! रात कैसी कटी ? मतलब जिस काम के लिये गए थे, वह मकसद पूरा हुआ ? मिला आपका वह मुजरिम ?”

“वह मिलकर भी नहीं मिल सका । अपने कर्मों की आग में खुद ही जलकर भस्म हो गया ।” रणवीर ने अपनी कैप उतारकर एक जगह रख दी । तब उसके जख्म पर सौम्या की निगाह पड़ी । वह भागकर फ़र्स्ट-ऐड का डिब्बा लेकर आई ।

सौम्या को सारी बात बताने के बाद वह सोने के लिए चला गया । घंटे भर की नींद लेना उसके लिए बेहद जरूरी था । फिर आज जाना भी तो पुलिस लाइन था । सिटी पुलिस स्टेशन अब उसका ठिकाना नहीं रहा था ।